1 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Chhatarpur News: बेटी को बचाने मुंह से सांस देती रही मलबे में दबी मां, 48 घंटे बाद होश आया तो मिली दुखद खबर

House Collapse Tragdy: मकान गिरा तो मां मलबे में दबी, पास मौजूद 2 महीने की बच्ची को बचाने 25-30 मिनट तक मुंह से सांस देती रही।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

छतरपुर

•

image

Shailendra Sharma

•

Updated: 13 Sep 2026, 5:23 PM IST

Chhatarpur House Collapse Tragdy

house collapse tragedy mother struggle save daughter, आपबीती बताती हेमा व क्षतिग्रस्त मकान जिसमें हादसा हुआ (Source-Patrika)

Chhatarpur House Collapse Tragdy: मध्यप्रदेश के छतरपुर में मकान गिरने के बाद मलबे में दबी मां ने अपनी 2 महीने की बेटी को बचाने के लिए हर संभव कोशिश की। खुद मलबे में दबी होने के बावजूद हेमा करीब 25-30 मिनट तक बेटी के मुंह में मुंह लगाकर सांस देती रही। हादसे में मासूम की मौत हो गई। दो दिन बाद जब हेमा को अस्पताल में होश आया तो उसे बेटी की मौत की खबर दी गई। बेटी की मौत की खबर सुनकर मां का रो-रोकर बुरा हाल है। मां के द्वारा बताई गई उस रात की आपबीती ने हर किसी के दिल को झकझोर दिया है।

दो दिन बाद होश में आई मां को मिली बेटी की मौत की खबर

छतरपुर के हिनौता थाना क्षेत्र के क्योटा गांव में बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात करीब 1 बजे एक कच्चा मकान भरभराकर गिर गया। घटना के वक्त मकान में एक महिला हेमा अपनी 2 महीने की मासूम बेटी हिमांशी और 13 साल की ननद रचना के साथ सो रही थी। मकान के गिरने से तीनों मलबे में दब गए। हादसे में 2 महीने की मासूम हिमांशी व 13 साल की रचना की मौत हो गई थी, जबकि हेमा का अस्पताल में दो दिन से इलाज चल रहा था। दो दिन बाद अस्पताल में जब हेमा को होश आया तो उसे बेटी हिमांशी की मौत की दुखद खबर मिली जिसे सुनकर हेमा का रो-रोकर बुरा हाल है।

बेटी को बचाने मुंह से दी सांस

होश में आने के बाद हेमा ने उस रात की जो आपबीती बताई है उसने हर किसी को झकझोर दिया है। हेमा ने बताया कि जब मकान गिरा तो वो दोनों बच्चियों के साथ खटिया पर सो रही थी। तीनों मलबे में दब गए। उसका पूरा शरीर मलबे में दबा हुआ था और वो हिल तक नहीं पा रही थी, उसके सीने और सिर के पास थोड़ी सी जगह थी। पास ही बेटी हिमांशी गिरी हुई थी, वो बेटी को छू भी नहीं पा रही थी लेकिन उसे महसूस कर पा रही थी। कुछ देर बाद उसे लगा कि बेटी की तबीयत बिगड़ रही है, उसने किसी तरह अपने मुंह से बेटी के मुंह में सांस देना शुरू किया, वो 25-30 मिनट तक बेटी को बचाने के लिए उसके मुंह में सांस देती रही।

दोनों बच्चियों की हो चुकी थी मौत

घटना वाली रात जब तक लोगों ने मलबे को हटाया और दोनों बच्चियों व हेमा को बाहर निकाला गया। हादसे में मासूम बच्ची हिमांशी और ननद रचना की मौत हो चुकी थी। हेमा की हालत गंभीर थी और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हेमा की हालत को देखते हुए उसे बच्ची की मौत के बारे में नहीं बताया गया था, लेकिन अब जब उसे होश आया तो बच्ची की मौत की सूचना दी गई।