13 सितंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Success Story: कॉल सेंटर की नौकरी छूटी, गांव लौटकर खिलाए फूल, अब चेतन कमा रहे ढाई से 3 लाख रुपए

Success Story: चेतराम कुशवाहा ने कॉल सेंटर छोड़कर सवा एकड़ में गुलाब, गेंदा और गैलार्डिया की फूल खेती शुरू की। वैज्ञानिक मार्गदर्शन से मुनाफे का व्यवसाय शुरु किया।
2 min read
Google source verification
चेतराम कुशवाहा (Photo Source - Patrika) फूलों की फोटो- AI फोटो

चेतराम कुशवाहा (Photo Source - Patrika) फूलों की फोटो- AI फोटो

Chhatarpur news:मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के नौगांव क्षेत्र निवासी चेतराम कुशवाहा ने साबित किया है कि यदि लगन और सही मार्गदर्शन हो, तो खेती केवल जीवनयापन का साधन नहीं, बल्कि एक बेहतरीन मुनाफा कमाने का व्यवसाय बन सकती है। बीकॉम की पढ़ाई पूरी करने के बाद फरीदाबाद (हरियाणा) के एक कॉल सेंटर में नौकरी कर रहे चेतराम को परिवार की जिम्मेदारियों के चलते अचानक गांव लौटना पड़ा था। बड़े भाई के सड़क हादसे के बाद उपजी परिस्थितियों ने उन्हें शहर छोड़ने पर मजबूर किया। ऐसे में गांव लौटकर 2015 में फूलों की खेती शुरू की। आज वे सवा एकड़ जमीन में गुलाब, गेंदा व गैलार्डिया फूलों की खेती से सालाना ढाई से तीन लाख तक कमा रहे है।

मार्गदर्शन के बाद शुरू की खेती

चेतराम के अनुसार उन्होंने नौगांव कृषि केंद्र में कृषि वैज्ञानिक डॉ. कमलेश अहिरवार से मार्गदर्शन लिय। इसके बाद फूलों की किस्मों, नर्सरी तैयार करने, पौधों की देखभाल की जानकारी लेने के बाद उन्होंने अपने खेत में प्रयोग के तौर पर फूलों की खेती शुरू की। जिसके बाद धीरे-धीरे काम करते हुए उन्हें भी अनुभव प्राप्त हुआ।

एक महीने में तैयार हो जाती है नर्सरी

चेतराम ने बताया, फूलों की खेती शुरू करने से पहले पौधों की अच्छी नर्सरी तैयार करना जरूरी है। करीब एक माह में नर्सरी तैयार हो जाती है। इसके बाद खेत में पौधे लगाए जाते हैं। नियमित देखभाल की जाती है। लागत अपेक्षाकृत कम रहती है। फसल में खरपतवार की समस्या भी ज्यादा नहीं आती। वे बताते हैं कि गुलाब की उन्नत किस्मों से करीब एक साल तक फूल प्राप्त किए जा सकते हैं, जबकि गेंदा मौसमी फसल है। जरूरत के अनुसार अलग-अलग सीजन में फूलों की खेती करके खेत से लगातार आमदनी प्राप्त की जा सकती है।

ये भी जानिए

-फूलों की खेती की सबसे बड़ी खासियत रोजाना होने वाली आमदनी है।

-नौगांव के बाजार में वे फूल बेचते हैं। मांग और सीजन के अनुसार कीमत 80 से 120 रुपए प्रति किलो होती है।

-फसल तैयार होने के बाद एक साथ बड़ी रकम मिलने के बजाय नियमित रूप से आमदनी होती रहती है। गांव में ही रोजगार का बेहतर विकल्प भी मिला है।