छतरपुर

600 वर्गफीट का नियम, 72 फीट में नौनिहाल: छतरपुर की 74 आंगनबाडिय़ां किराए की संकरी कोठरियों में कैद

अधिकतम 3,000 प्रति माह का किराया निर्धारित है।वर्तमान समय में छतरपुर शहर के भीतर इस मामूली बजट में पर्याप्त जगह, सुरक्षित और शौचालय व पानी की सुविधा वाला भवन मिलना लगभग असंभव हो गया है।
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Jul 28, 2026
aganwadi
आंगनबाड़ी केंद्र

महिला एवं बाल विकास विभाग के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर छतरपुर शहर में साफ देखा जा सकता है। शहर में संचालित कुल 85 आंगनवाड़ी केंद्रों में से महज 9 केंद्रों के पास ही अपना खुद का सरकारी भवन है। बाकी 74 आंगनबाडिय़ां किराए के छोटे, संकरे और जर्जर कमरों में चलने को मजबूर हैं। सरकारी नियमानुसार एक आंगनबाड़ी केंद्र के संचालन के लिए कम से कम 600 वर्गफीट जगह का भवन होना चाहिए, लेकिन छतरपुर में ये केंद्र महज 72 से 120 वर्गफीट की तंग कोठरियों में सिमट कर रह गए हैं। भवन और पर्याप्त जगह की इस भारी कमी का सीधा असर केंद्रों में आने वाले मासूम बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को मिलने वाली सुविधाओं और गतिविधियों पर पड़ रहा है।

किराए का नियम बना सबसे बड़ा रोड़ा

इस पूरी समस्या की मुख्य जड़ विभाग द्वारा तय किया गया बजट और किराया निर्धारण है।शासकीय नियमों के अनुसार 600 वर्गफीट के मानक भवन के लिए अधिकतम 3,000 प्रति माह का किराया निर्धारित है।वर्तमान समय में छतरपुर शहर के भीतर इस मामूली बजट में पर्याप्त जगह, सुरक्षित और शौचालय व पानी की सुविधा वाला भवन मिलना लगभग असंभव हो गया है।मजबूरी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को छोटे और जर्जर कमरों में ही केंद्र संचालित करने पड़ रहे हैं।

बदहाली की तस्वीरें- कहीं छप्पर का सहारा, तो कहीं बैठने तक की जगह नहीं

1. वार्ड-31- पॉलीथिन से ढका छप्पर, 89 बच्चों का भविष्य अधर में

वार्ड-31 स्थित मातवाना मोहल्ले का आंगनबाड़ी केंद्र-54 महज 10 बाय 12 फीट (120 वर्गफीट) के कमरे में चल रहा है। यहां 6 साल तक के 89 बच्चे और 18 गर्भवती व धात्री महिलाएं पंजीकृत हैं। कमरे की छत पक्की न होकर छप्पर की है, जिसे बारिश के पानी से बचाने के लिए पॉलीथिन से ढका गया है। यदि सभी पंजीकृत हितग्राही एक साथ पहुंच जाएं, तो यहां खड़े होने तक की जगह नहीं बचती।

2. हटवारा स्कूल के पास- 72 वर्गफीट में 100 बच्चों की आंगनबाड़ी

हटवारा स्कूल के पीछे संचालित केंद्र-55 में 100 बच्चे और 12 महिलाएं पंजीकृत हैं। लेकिन इसके लिए जो कमरा उपलब्ध है, वह मात्र 72 वर्गफीट का है। ऊपर जाने वाली सीढिय़ों ने कमरे की जगह को और छोटा कर दिया है।

3. पहचान का संकट- बिना बोर्ड के चल रहे कई केंद्र

शहर के कई केंद्र ऐसे हैं जहां बाहर कोई सूचना बोर्ड तक नहीं लगा है। हटवारा, कड़ा की बरिया और सिटी कोतवाली के पीछे चल रहे केंद्रों का पता ढूंढने में पहली बार आने वाले लोगों को खासी मशक्कत करनी पड़ती है।

जिम्मेदार अधिकारी का बयान

शहर में किराए के भवनों में चल रहे आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति का मूल्यांकन कराया जा रहा है। नए भवनों के निर्माण के लिए 2 प्रस्ताव विभाग को भेजे जा चुके हैं। इसके अलावा स्थानीय विधायक, नगर पालिका अध्यक्ष, सीएमओ और वार्ड पार्षदों के सहयोग से बेहतर भवन उपलब्ध कराने का प्रयास जारी है।

विक्रम सिंह, शहरी परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास, छतरपुर

Updated on:
28 Jul 2026 11:01 am
Published on:
28 Jul 2026 10:54 am