
Dhirendra Shastri Controversy: भगवान कृष्ण के बारे में टिप्पणी कर बागेश्वर धाम प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। मध्यप्रदेश में उनकी इस टिप्पणी को लेकर गुस्सा दिखने लगा है। बुधवार को भी कई शहरों से उनके खिलाफ नाराजगी के स्वर उठ रहे हैं। उज्जैन, मथुरा, लखनऊ और सोशल मीडिया पर विरोध के स्वर उठ रहे हैं। एक संगठन ने बागेश्वर आश्रम में कथा बंद कराने की धमकी दी है। साथ ही कहा है कि एक हजार गाड़ियां लेकर आउंगा और ताला लगा दूंगा। इसके अलावा पंडित शास्त्री के खिलाफ मानहानि नोटिस भी दिया गया है।
शिवपुरी के करेरा में धीरेंद्र शास्त्री जिस तरह से बड़बोलेपन में भगवान कृष्ण पर टिप्पणी कर रहे थे, उसे लेकर वे सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हो रहे हैं। वहीं मध्यप्रदेश में भी कई लोग उनका विरोध कर रहे हैं। मध्यप्रदेश के साथ ही बुधवार को देशभर से विरोध के स्वर उठ रहे हैं।
मध्यप्रदेश के उज्जैन से खबर आ रही है कि आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य दामोदर यादव ने सीएम मोहन यादव से कहा है कि वे 14 नवंबर तक बागेश्वर धाम आश्रम में कथा बंद कराते हुए उसे सील करवा दें। उन्होंने इस अपील के साथ ही चेतावनी भी दे डाली है कि सरकार ने यदि कार्रवाई नहीं की तो वे अगले ही दिन 15 नवंबर को एक हजार गाड़ियों के साथ बागेश्वर धाम पहुंच जाएंगे। और आश्रम बंद करा देंगे। उज्जैन के टावर चौक पर मंगलवार को उन्होंने यह बात कही थी।
इधर, धीरेंद्र शास्त्री ने शिवपुरी जिले के करेरा में भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना की थी। उन्होंने कहा था कि श्रीकृष्ण के स्वरूप, मुद्रा, बांसुरी बजाने के अंदाज और वृंदावन को लेकर हंसी उड़ाने वाले अंदाज में यह टिप्पणी की थी। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि धीरेंद्र शास्त्री मंगलवार 2 नवंबर को वीडियो जारी कर सफाई दे चुके हैं और माफी भी मांग चुके हैं। शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण में भेद करना उनका उद्देश्य नहीं था। यदि उनकी बात से किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तो वे क्षमा मांगते हैं। उन्होंने कहा कि वे दोनों भगवानों की लीलाओं के अंतर को व्यंग्यात्मक तरीके से बताने का प्रयास कर रहे थे।
शिवपुरी जिले की करैरा में श्रीराम कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और उनके नाम पर की गई टिप्पणी के बाद उनके खिलाफ मानहानि नोटिस भेजा गया है। उत्तरप्रदेश हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच के अधिवक्ता कृष्ण कन्हैया पाल ने उन्हें यह नोटिस भेजा है। उन्होंने लिखा है कि 2002 से वकालत कर रहा हूं और हिन्दू धर्म का अनुयायी होने के साथ ही भगवान श्रीकृष्ण का अनन्य भक्त हूं। धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना अत्यंत अमर्यादित, आपत्तिजनक और उपहासात्मक भाषा का प्रयोग करते हुए की है।
अधिवक्ता पाल ने लिखा है कि धीरेंद्र शास्त्री का यह कृत्य भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करना), धारा 356 (मानहानि) और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत एक गंभीर दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में शास्त्री ने विनोद या भाव कहकर एक वीडियो संदेश के जरिए क्षमा प्रार्थी होने की बात कही है,परन्तु सार्वजनिक मंच से किए गए इस गंभीर कृत्य का प्रभाव और मुझको पहुंची मानसिंक व आत्मिक ठेस पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। एडवोकेट पाल ने 15 दिनों में मुझसे व्यक्तिगत रूप से और संपूर्ण कृष्ण भक्त समाज से बिना शर्त सार्वजनिक रूप से लिखित अथवा वीडियो माध्यम से स्पष्ट रूप से क्षमा मांगने को कहा है।
धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर मथुरा में भी श्रद्धालुओं में आक्रोश है। श्री माथुर चतुर्वेद परिषद के मुख्य संरक्षक व अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के संरक्षक महेश पाठक ने मीडिया से कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अमर्यादित टिप्पणी क्षमा योग्य नहीं है। भगवान श्रीकृष्ण केवल किसी एक समाज, संप्रदाय व क्षेत्र के आराध्य नहीं हैं, बल्कि संपूर्ण सनातन संस्कृति के प्राण, भारतीय दर्शन के आधार और विश्व मानवता के मार्गदर्शक हैं। गीता का दिव्य ज्ञान देने वाले योगेश्वर श्रीकृष्ण के प्रति किसी भी प्रकार का नारादरपूर्ण भाव व्यक्त करना करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को आहत करने वाला है। महासभा इसका पूरे देश में विरोध करेगा। ब्रज वासियों से भी बहिष्कार करने की अपील की गई है।