MP News: ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुल के ढहने में रेत माफियाओं की सक्रियता और अवैध खनन का बड़ा हाथ है...
MP News: ग्राम पंचायत चंद्रपुरा में स्थित 50 मीटर लंबे पुल का मामला अब ग्रामीणों के लिए एक गंभीर संकट बन गया है। यह पुल 2025 में हुई अतिवृष्टि के दौरान ढह गया था और तब से लेकर आज तक इसकी मरम्मत या पुनर्निर्माण को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हुई है। पुल के टूटने से मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश को जोडऩे वाला संपर्क पूरी तरह बाधित हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें रोजाना कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
इससे समय, पैसा और मेहनत तीनों की बर्बादी हो रही है। आपातकालीन परिस्थितियों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। बीमार मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी होती है, जबकि स्कूली बच्चों को जोखिम भरे वैकल्पिक रास्तों से गुजरना पड़ता है। किसान अपनी फसल और उपज बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुल के ढहने में रेत माफियाओं की सक्रियता और अवैध खनन का बड़ा हाथ है। पुल के आसपास लंबे समय से खनन जारी था। लगातार होने वाले खनन ने पुल की नींव कमजोर कर दी थी और अतिवृष्टि के दौरान वह दबाव झेल न सकी। अब तक न तो रेत माफियाओं पर कोई कार्रवाई हुई, न ही पुल के पुनर्निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय पत्राचार और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया में आम जनता की समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। लोग रोजाना जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने शासन स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि संयुक्त निरीक्षण कर यह स्पष्ट किया जाए कि पुल किस विभाग के अंतर्गत आता है। साथ ही अवैध रेत खनन पर सख्त कार्रवाई करते हुए दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाए और पुल का शीघ्र पुनर्निर्माण कर संपर्क बहाल किया जाए।
इस मामले में नौगांव जनपद सीईओ प्रभाष राज घनघोरिया ने बताया कि यह पुल जल संसाधन विभाग के अंतर्गत आता है। उन्होंने कहा कि पुल के संबंध में तीन से चार बार जल संसाधन विभाग को पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि अब विभाग को एक बार फिर रिमाइंडर भेजा जाएगा।
वहीं दूसरी ओर जल संसाधन विभाग के उपयंत्री बीके अहिरवार ने इस दावे से साफ इनकार किया। उनका कहना है कि टूटे हुए पुल का उनके विभाग से कोई संबंध नहीं है और न ही जनपद पंचायत की ओर से उन्हें इस संबंध में कोई पत्र मिला है। उन्होंने कहा कि अधिक जानकारी के लिए एसडीओ से संपर्क करें।