स्वयं मोबाइल एप के माध्यम से अपने परिवार का विवरण दर्ज कर सकेंगे। छतरपुर जिले में इस आधुनिक जनगणना की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
देश की आगामी जनगणना इतिहास रचने जा रही है। आजादी के बाद यह आठवीं जनगणना होगी, लेकिन पहली बार इसे पूरी तरह से डिजिटल स्वरूप दिया गया है। अब नागरिकों को सरकारी प्रगणक (गणना करने वाले कर्मचारी) का घर पर इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी; वे स्वयं मोबाइल एप के माध्यम से अपने परिवार का विवरण दर्ज कर सकेंगे। छतरपुर जिले में इस आधुनिक जनगणना की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
डिजिटल जनगणना 2027 की सबसे बड़ी विशेषता सेल्फ-इन्यूमरेशन सुविधा है। इसके तहत आम नागरिक आधिकारिक मोबाइल एप पर लॉगिन कर अपने परिवार के सदस्यों से संबंधित सभी 33 प्रकार की जानकारियां खुद भर सकेंगे। इससे डेटा संग्रहण में त्रुटियां कम होंगी और प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। नागरिकों द्वारा डेटा भरने के बाद, सरकारी प्रगणक केवल उस जानकारी के भौतिक सत्यापन (वेरिफिकेशन) के लिए घर आएंगे, जिससे समय और संसाधनों की भारी बचत होगी।
इस बार की गणना में रजिस्टर और फाइलों की जगह तीन आधुनिक मोबाइल एप का उपयोग किया जाएगा।
1. पापुलेशन एप: जनसंख्या सूचीकरण और व्यक्तिगत डेटा दर्ज करने के लिए।
2. हाउस लिस्टिंग एप: मकानों की सटीक गिनती सुनिश्चित करने के लिए।
3. डिजिटल लेआउट मैप : जीपीएस तकनीक के जरिए हर ब्लॉक और गली की सटीक लोकेशन मैप करने के लिए।
नागरिकों से कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनमें परिवार के सदस्यों की संख्या, शिक्षा का स्तर, व्यवसाय, मातृभाषा, धर्म, दिव्यांगता, आवास की प्रकृति, पेयजल और बिजली कनेक्शन जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल होंगे। प्रगणकों को हर व्यक्ति से चर्चा करने में लगभग 10 से 15 मिनट का समय लगेगा।
वर्ष 2011 की जनगणना के बाद छतरपुर शहर और जिले की आबादी में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, छतरपुर शहर की आबादी जो 2011 में 1.33 लाख थी, वह अब बढकऱ लगभग 2.98 लाख होने का अनुमान है। वहीं, पूरे जिले की अनुमानित आबादी 29 लाख 19 हजार 895 तक पहुंच सकती है। इस वृद्धि का मुख्य कारण ग्रामीण क्षेत्रों से शहर की ओर पलायन और बेहतर सुविधाओं की तलाश माना जा रहा है।
जनगणना का कार्य दो चरणों में संपन्न होगा। पहला चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक चलेगा, जिसमें मकानों का सूचीकरण किया जाएगा। दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा, जिसमें वास्तविक जनसंख्या की गणना होगी। जिला जनगणना समन्वय समिति का गठन कर दिया गया है, जिसके प्रमुख कलेक्टर पार्थ जैसवाल होंगे। प्रशासनिक स्पष्टता के लिए 31 दिसंबर 2025 से ही जिले और गांवों की सीमाएं फ्रीज कर दी गई हैं, ताकि डेटा में कोई विसंगति न आए।