इस महाअभियान में जहां कुछ विकासखंडों और नगर पालिकाओं का प्रदर्शन अत्यंत सराहनीय रहा है, वहीं कुछ नगरीय निकायों में ढर्रा सुस्त होने के कारण पेंडेंसी का ग्राफ जस का तस बना हुआ है।
राष्ट्रीय जनगणना की जमीनी तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा हाउसहोल्ड सत्यापन का महाअभियान अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। जिला प्रशासन द्वारा जारी ताजा समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, जिले के ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों को मिलाकर अब तक कुल 89.6 प्रतिशत मकानों का सुपरवाइजरों द्वारा भौतिक सत्यापन मुकम्मल कर लिया गया है।
आंकड़ों के मुताबिक, जिले भर में चिन्हित कुल 4 लाख 78 हजार 786 घरों में से 4 लाख 29 हजार 188 घरों का डेटा पूरी तरह वेरिफाई हो चुका है। हालांकि, शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने की राह में अभी भी 49 हजार 598 घरों का सत्यापन होना बाकी है। इस महाअभियान में जहां कुछ विकासखंडों और नगर पालिकाओं का प्रदर्शन अत्यंत सराहनीय रहा है, वहीं कुछ नगरीय निकायों में ढर्रा सुस्त होने के कारण पेंडेंसी का ग्राफ जस का तस बना हुआ है।
जनगणना के इस प्रारंभिक चरण में जिले के सभी 28 चार्ज (प्रशासनिक क्षेत्रों) में काम की प्रगति को नापा गया है।
कुल दर्ज (मकान)- 4,78,786सत्यापित हो चुके मकान- 4,29,188
सत्यापन के लिए लंबित मकान- 49,598
जिले का कुल सफलता प्रतिशत- 89.6प्रतिशतल
इस पूरी रिपोर्ट में सबसे दिलचस्प और ध्यान खींचने वाली स्थिति लवकुशनगर विकासखंड की है। यहां दो अलग-अलग प्रभारों में काम की रफ्तार में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिला है।
लवकुशनगर ग्रामीण (शानदार प्रदर्शन)- लवकुशनगर के मुख्य/ग्रामीण क्षेत्र के फील्ट स्टाफ और सुपरवाइजरों ने मुस्तैदी दिखाते हुए बेहतरीन काम किया है। यहंँ के कुल 18,815 घरों में से 16,944 का सत्यापन पूरा कर लिया गया है। यानी 90.06 प्रतिशत सफलता के साथ यह क्षेत्र जिले के औसत से भी आगे निकल चुका है।
लवकुशनगर नगर परिषद (पेंडेंसी बरकरार)- इसके विपरीत, लवकुशनगर नगर परिषद (टाउन एरिया) के आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। यहां कुल 5,611 घरों में से अब तक मात्र 2,979 घरों का ही सत्यापन हो सका है। 53.09 प्रतिशत की बेहद सुस्त रफ्तार के कारण यहां अभी भी 2,632 घरों का काम पेंडिंग है, जिसे समय पर पूरा करना एक बड़ी चुनौती है।
महाराजपुर और राजनगर शत-प्रतिशत के बिल्कुल करीब
जिले के कुछ क्षेत्रों ने इस महाअभियान में रिकॉर्ड तोड़ काम किया है और वे डिजिटल क्लोजर के बिल्कुल मुहाने पर खड़े हैं।महाराजपुर नगर पालिका- यहां 4,572 घरों में से 4,571 का काम पूरा हो चुका है। मात्र 1 घर शेष रहने के साथ यहां 99.98 प्रतिशत काम खत्म है।
राजनगर ग्रामीण- इस बड़े क्षेत्र ने अपनी विशाल आबादी के बावजूद 99.97 प्रतिशत का आंकड़ा छू लिया है। यहां 52,934 घरों में से 52,918 का वेरिफिकेशन हो चुका है, केवल 16 मामले लंबित हैं।
इस सूची में बारीगढ़ नगर परिषद (100 प्रतिशत) और बकस्वाहा नगर परिषद (100 प्रतिशत) ने सबसे पहले अपने पूरे कोटे का सत्यापन बंद कर शीर्ष स्थान हासिल किया है।
जिले की ओवरऑल प्रोग्रेस को 90 फीसदी से नीचे रोकने में कुछ चुनिंदा क्षेत्रों की सुस्ती मुख्य वजह मानी जा रही है।
गौरीहार- इस क्षेत्र में प्रतिशत 75.44 प्रतिशत है, लेकिन संख्या के लिहाज से यहां सबसे ज्यादा 11,425 घर लंबित हैं, जो पूरे जिले में सबसे बड़ा पेंडिंग लोड है।
बिजावर नगर परिषद- यहां भी काम की गति धीमी है और मात्र 63.34 प्रतिशत ही वेरिफिकेशन हो सका है।
छतरपुर ग्रामीण- जिला मुख्यालय से सटे इस ग्रामीण क्षेत्र में भी 78.10 प्रतिशत काम हुआ है और 7,606 घर अभी भी कतार में हैं।
लवकुशनगर नगर परिषद, बिजावर और गौरीहार जैसे पिछड़ रहे क्षेत्रों के प्रभारियों और सुपरवाइजरों को काम में तेजी लाने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। जनगणना जैसे महत्वपूर्ण और समय-सीमा वाले राष्ट्रीय कार्य में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन का पूरा जोर अब इन बचे हुए 49 हजार घरों को जल्द से जल्द सत्यापित कर पोर्टल लॉक करने पर है।