पूरे प्रदेश में जिले और संभागों का नए सिरे से परिसीमन करने के लिए मुख्यमंत्री ने आयोग का गठन किया है। आयोग ने अपना काम भी शुरू कर दिया है। क्योंकि जल्द ही अपनी रिपोर्ट तैयार होना है। पुनर्गठन होने बुंदेलखंड में छतरपुर की सबसे ज्यादा संभावना बन रही है।
छतरपुर. पूरे प्रदेश में जिले और संभागों का नए सिरे से परिसीमन करने के लिए मुख्यमंत्री ने आयोग का गठन किया है। आयोग ने अपना काम भी शुरू कर दिया है। क्योंकि जल्द ही अपनी रिपोर्ट तैयार होना है। पुनर्गठन होने बुंदेलखंड में छतरपुर की सबसे ज्यादा संभावना बन रही है। क्योंकि यह संभाग का सबसे बड़ा जिला है। जिले टीकमगढ़, निवाड़ी और पन्ना से सागर की दूरी काफी अधिक है, जबकि छतरपुर इनसे नजदीक है। शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर के हिसाब से भी छतरपुर में पर्याप्त सुविधाएं हैं।
छतरपुर को संभाग बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। वर्ष 2019 में तत्कालीन विधायक आलोक चतुर्वेदी ने विधानसभा में छतरपुर को संभाग बनाने का प्रश्न उठाया था, इसके जवाब में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा था कि यह मामला विचाराधीन है। फिर कहा गया कलेक्टर ने प्रतिवेदन भेज भी दिया था। इसके बाद सरकार की तरफ से कहा गया कि सागर संभाग के अन्य जिलों के कलेक्टरों से भी प्रतिवेदन मांगा गया। लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
छतरपुर को संभाग का दर्जा मिलता है, तो कमिश्नर कोर्ट खुलने का रास्ता साफ हो जाएगा। हालांकि अभी कमिश्नर लिंक कोर्ट है, जो महीने में एक बार बैठती है, लेकिन उसमें भी इतने अधिक मामले पेंडिंग है कि लोगों को फैसले के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। संभाग बन जाने से कमिश्नरी खुलेगी, जिससे छतरपुर के अलावा टीकमगढ़, निवाड़ी, पन्ना के लोगों के समय और धन की बचत हो सकेगी।
जिला मुख्यालय से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लवकुशनगर को जिला बनाने की सशक्त दावेदारी उभरकर सामने आ सकती है, क्योंकि यहां भी कई सालों से यह मांग उठ रही है। लवकुशनगर को जिला बनाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आश्वस्त किया था। हालांकि चंदला, बड़ामलहरा तथा राजनगर से भी जिला बनाने की मांग उठ रही है। छतरपुर की दूरी सागर से कम सागर की तुलना में छतरपुर की दूरी पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी से कम है। ऐसे में क्षेत्रफल, दूरी और इन्फ्रास्ट्रक्चर के हिसाब से छतरपुर को संभाग बनाए जाने की संभावना है।