जिले के चार ब्लॉकों में योजना का हाल यह है कि सडक़ें खोदकर पाइप डाल दिए गए हैं, लेकिन जिन टंकियों से पानी की सप्लाई होनी है, उनका अस्तित्व ही नजर नहीं आ रहा।
जिले के प्यासे कंठों तक पानी पहुंचाने के नाम पर आई 2500 करोड़ रुपए की समूह जलप्रदाय योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जल निगम के दावों और धरातल की हकीकत के बीच एक ऐसी खाई नजर आ रही है, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के चार ब्लॉकों में योजना का हाल यह है कि सडक़ें खोदकर पाइप डाल दिए गए हैं, लेकिन जिन टंकियों से पानी की सप्लाई होनी है, उनका अस्तित्व ही नजर नहीं आ रहा।भुगतान में उदारता, काम में लापरवाहीयोजना के तहत जिले में कुल 336 टंकियां बनाई जानी थीं, लेकिन अब तक महज 46 टंकियां ही पूरी हो पाई हैं। ताज्जुब की बात यह है कि मुख्य संरचना (टंकी) का काम 15 प्रतिशत भी पूरा नहीं हुआ, लेकिन विभाग ने ठेकेदारों को कुल बजट का 65 प्रतिशत भुगतान कर दिया है। सवाल यह उठता है कि जब पानी स्टोर करने के लिए टंकी ही नहीं है, तो जमीन के नीचे दबी पाइपलाइन किस काम आएगी?
सूत्रों की मानें तो मुख्य कंपनियों को टंकी बनाने वाले एक्सपर्ट नहीं मिल रहे हैं। इसके चलते काम को पेटी कॉन्ट्रैक्ट (छोटे ठेकेदारों) पर दिया जा रहा है। ये छोटे ठेकेदार गांवों की सीसी सडक़ें खोदकर पाइप डालते हैं और जैसे ही पाइपलाइन का भुगतान होता है, काम अधूरा छोडक़र चंपत हो जाते हैं। नतीजा यह है कि ग्रामीण न केवल पानी से महरूम हैं, बल्कि उखड़ी हुई सडक़ों के कारण उनका चलना भी दूभर हो गया है।
1. छतरपुर ब्लॉक- 143 गांवों के लिए 74 टंकियां बननी हैं। कागजों में 77 प्रतिशत काम दिखाया गया है, लेकिन हकीकत में सडक़ें उखड़ी हैं और पानी के स्रोत का कोई अता-पता नहीं है।
2. नौगांव लुगासी जैसे बड़े गांवों में ठेकेदार सिर्फ टंकी का फाउंडेशन बनाकर गायब हो गया है। यहां 20 प्रतिशत से ज्यादा काम नजर नहीं आ रहा।
3. लवकुशनगर- 560 करोड़ की इस योजना में एक साल बीतने के बाद भी टंकियां केवल नींव तक ही सिमटी हुई हैं।
4. गौरिहार- यहां स्थिति सबसे बदतर है। पाइप डालकर गड्ढे तक नहीं भरे गए हैं। पिछले छह माह से काम पूरी तरह ठप पड़ा है।
जल निगम के अधिकारी एसी कमरों में बैठकर 70 प्रतिशत भौतिक प्रगति का दावा कर रहे हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि बिना वास्तविक मूल्यांकन किए ठेकेदारों को भारी भरकम राशि जारी कर दी गई है। 2500 करोड़ की इस महात्वाकांक्षी योजना में राशि के बंदरबांट की बू आ रही है।
जिन गांवों में काम रुका था, वहां फिर से शुरू कराया गया है। प्रगति के आधार पर ही भुगतान किया जा रहा है और विभाग लगातार इसकी मॉनिटरिंग कर रहा है।
राघवेंद्र सिंह नरवरिया, उप प्रबंधक, जल निगम, छतरपुर