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छतरपुर में सरकारी राशन की लूट, आरोपी विक्रेता को पहले किया बर्खास्त,फिर बना दिया समिति प्रबंधक

ऐसे सेल्समैन (विक्रेता) पर मेहरबानी बरसाई गई, जिस पर राशन की कालाबाजारी, गरीबों के हक के ओटीपी चुराने और स्टॉक में भारी हेराफेरी के गंभीर आरोप हैं।

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स्वामी विवेकानंद समिति में अंधेरगर्दी, 2100 किलो राशन गायब करने वाले आरोपी को थमा दी पूरी समिति की चाबी

सरकारी सिस्टम में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हो सकती हैं, इसका एक जीता-जागता उदाहरण छतरपुर की स्वामी विवेकानंद विपणन सहकारी समिति में देखने को मिला है। यहां एक ऐसे सेल्समैन (विक्रेता) पर मेहरबानी बरसाई गई, जिस पर राशन की कालाबाजारी, गरीबों के हक के ओटीपी चुराने और स्टॉक में भारी हेराफेरी के गंभीर आरोप हैं। ताज्जुब की बात यह है कि जिस सेल्समैन को सेवा से पृथक किया गया गया था, उसे उपकृत करते हुए अब पूरी समिति का प्रबंधक नियुक्त कर दिया गया है।

केस 1- गरीबों का निवाला छीनने का डिजिटल खेल

अक्टूबर 2024 में अनुविभागीय अधिकारी द्वारा जारी एक कारण बताओ नोटिस के अनुसार ग्राम पंचायत नैगुंवा के 60 से 70 ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि सरपंच पति और सचिव के साथ मिलीभगत कर विक्रेता अनुज पाठक ने धोखाधड़ी की। ग्रामीणों को ई-केवाईसी के नाम पर झांसा देकर उनसे ओटीपी लिया गया और उनके हक का राशन दुकान कोड 2305075 (कदवां) से खुर्द-बुर्द कर दिया गया। जांच में पाया गया कि पात्र परिवारों के राशन की ऑनलाइन वितरण दर्शाकर कालाबाजारी की गई, जो आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत दंडनीय अपराध है।

केस 2- स्टॉक में भारी अंतर और राशन की किल्लत

कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी द्वारा कदवां दुकान के भौतिक सत्यापन में स्टॉक का भारी अंतर पाया गया। गेहूं में पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक और मौके पर उपलब्ध स्टॉक में 1188 किलोग्राम का अंतर मिला। चावल में भी 928 किलोग्राम राशन गायब पाया गया। इसके अलावा शक्कर, नमक और मूंग के स्टॉक में भी हेराफेरी पाई गई। यह स्पष्ट रूप से सार्वजनिक वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेश 2015 का उल्लंघन है।

केस 3- ग्रामीण परेशान, फिर भी मेहरबानी जारी

29 नवंबर 2025 को कदवां के ग्रामवासियों ने सामूहिक हस्ताक्षर कर जिला आपूर्ति अधिकारी को पत्र लिखा। ग्रामीणों का आरोप है कि अनुज पाठक द्वारा शक्कर की पर्ची तो काटी जाती है, लेकिन वितरण एक ग्राम भी नहीं होता। सरकारी मुफ्त नमक के बदले हितग्राहियों से 10 रुपए प्रति किलो वसूले जा रहे हैं। प्रत्येक हितग्राही को तौल में 5 किलो राशन कम दिया जा रहा है।

आरोपी बना आका

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जहां 18 जनवरी 2023 को एक आदेश के जरिए अनुज पाठक को पद से पृथक कर संजय तिवारी को नियुक्त किया गया था, वहीं 6 नवंबर 2025 को पासा पलट गया। समिति की कार्यकारिणी ने विवादित विक्रेता अनुज पाठक को ही पदोन्नत कर प्रभारी समिति प्रबंधक बना दिया। जिस व्यक्ति पर राशन चोरी के संगीन आरोप लगे और जिसके विरुद्ध एफआईआर की चेतावनी दी गई थी, उसे ही पूरी समिति के अभिलेख सौंपने के निर्देश दे दिए गए।

2.92 करोड़ का घोटाला सिद्ध, रिकवरी के बाद भी जिपं अध्यक्ष पति ने बेटे को बना डाला प्रबंधक

सेवा सहकारी समिति डिकौली में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और मुख्यमंत्री ब्याज माफी योजना के नाम पर हुआ 2.92 करोड़ रुपए का घोटाला पहले ही जांच में सिद्ध हो चुका है। संयुक्त आयुक्त सहकारिता, संभाग सागर की जांच में वर्ष 2023 की ब्याज माफी योजना के तहत 567 किसानों के नाम जारी राशि में 292.54 लाख रुपए अपात्र पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि तत्कालीन समिति प्रबंधक और जिला पंचायत अध्यक्ष विद्या अग्निहोत्री के पति हरिओम अग्निहोत्री ने नियमों को ताक पर रखकर अपने परिजनों के नाम पात्रता से कई गुना अधिक केसीसी जारी किए। शासन की गाइडलाइन के अनुसार एक किसान को एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम डेढ़ लाख रुपए की पात्रता है, लेकिन परिवार के सदस्यों के खातों में लाखों रुपए स्वीकृत कर निकाले गए।

15 मई 2025 को सहकारिता विभाग के अपर मुख्य सचिव द्वारा कलेक्टर छतरपुर को पत्र जारी कर रिकवरी के निर्देश दिए गए। इसके बाद संबंधित राशि शासन को लौटाई गई और हरिओम अग्निहोत्री ने प्रबंधक पद से इस्तीफा दे दिया। लेकिन ताजा घटनाक्रम ने फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। घोटाले की पुष्टि और रिकवरी के बाद भी समिति की कमान उनके बेटे रविकांत अग्निहोत्री को सौंप दी गई। ऐसे में सहकारी व्यवस्था की पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमों के पालन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।भ्रष्टाचार के आरोपियों को सजा देने के बजाय पुरस्कारदस्तावेज बताते हैं कि एसडीएम छतरपुर ने बार-बार कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा कि क्यों न दुकान निलंबित कर दी जाए और पुलिस प्राथमिकी दर्ज कराई जाए। बावजूद इसके, विभाग और समिति की सांठगांठ के चलते आज भी आरोपी व्यवस्था के अहम पद पर बैठा है। यह केवल एक सेल्समैन की कहानी नहीं, बल्कि गरीबों के हक पर डाका डालने वाले उस तंत्र का पर्दाफाश है जो भ्रष्टाचार के आरोपियों को सजा देने के बजाय पुरस्कार देता है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो विकसित भारत की कल्पना कैसे साकार होगी। इस मामले में उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की सख्त जरूरत है।

इनका कहना है

दोनों समितियों में गड़बड़ी का मामला संज्ञान में आया है। एसडीएम से जानकारी तलब करेंगे कि कदंवा सोसायटी के मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई। डिकौली सोसायटी में पुत्र कैसे समिति प्रबंधक बना, इसकी जांच कराई जाएगी।

पार्थ जैसवाल, कलेक्टर