
आत्महत्या
जिले में आत्महत्या का प्रयास करने की विकृत मानसिकता बढ़ी है और बीते तीन महीनों की तुलना में 20 फीसदी आंकड़े बढ़े हैं। वर्ष 2026 की शुरुआत से आज तक 70 से अधिक लोगों ने खुद की जान देने की कोशिश की और इनमें 13 मौतें दर्ज की गई हैं। जिला अस्पताल की एमएलसी में आए मरीजों के आंकड़े के अनुसार बीते अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर यानी तीन माह में 48 लोगों ने आत्महत्या का प्रयास किया था जिनमें 10 लोगों की मौत दर्ज हुई थी। वहीं इस साल डेढ़ महीने में ही ये आंकड़ा बढ़ गया है। जिले में युवाओं और महिलाओं में आत्महत्या व उसका प्रयास करने के मामले अधिक हैं। 70 मामलों में 32 मामले युवा वर्ग के हैं जिनमें पुरुषों ने आत्महत्या का प्रयास किया, वहीं 28 महिलाएं भी दर्ज हुई हैं।
जिला अस्पताल में आने वाले आत्महत्या के मामलों में सबसे अधिक केस जहर सेवन के आ रहे हैं। युवा वर्ग और किशोर अवस्था वाले युवा आत्महत्या का प्रयास करने की कोशिश करते हैं। इनमें 15 से 26 वर्ष के युवाओं की संख्या अधिक देखी जा रही है। कई मामलों में प्रेम-प्रसंग के या फिर घरेलू विवाद के चलते लोग आत्महत्या की ओर खौफनाक कदम उठा रहे हैं।
बीते डेढ़ माह में जिले में महिलाओं द्वारा फांसी लगाने के मामले देखे जा रहे हैं। महिलाओं में विवाहित 18 महिलाओं ने आत्महत्या का प्रयास किया जिसमें से 5 महिलाओं की मौत दर्ज हुई है। वहीं किशोरी बालिकाओं द्वारा जहर सेवन के मामले भी जिला अस्पताल में दर्ज हुए हैं। कुछ लोगों ने आग लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया, लेकिन उनकी संख्या अभी कम है।
छतरपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में एक 17 साल की छात्रा ने दुपट्टे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतका सागर-कानपुर नेशनल हाईवे स्थित श्री राम कॉलोनी की रहने वाली थी और शहर के ओलंपिक स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ती थी।
केस-2
बीते दिन संकट मोचन पहाडी निवासी एक तीस साल की महिला ने फांसी लगाकर जान दे दी। महिला घर पर अकेली थी और बच्चों को कोचिंग पढ़ने भेज दिया था। जब बच्चे कोचिंग से लौटे तो घर की टीन शेड से अपनी मां को झूलता पाया।
केस-3
जनवरी में छतरपुर में बीएससी माइक्रोबायोलॉजी की छात्रा दीक्षा गुप्ता ने चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। घटना सिंचाई कॉलोनी के जैन बिल्डिंग में हुई थी। छात्रा उत्तरप्रदेश के राठ की निवासी थी और पढ़ाई के लिए छतरपुर में अकेली रहती थी।
केस-4
हाल ही में राजनगर के 17 साल के युवक ने महज इस बात पर जहर पी लिया कि उसके पिता ने पेपर के प्रश्नों को ठीक से हल न करने की बात पर डांट दिया। किशोर ने घर में रखा फिनायल पी लिया। बाद में उसे जिला अस्पताल लाया गया। फिलहाल किशोर खतरे से बाहर है।
अस्पताल में रोजाना दो या तीन मामले आत्महत्या से जुड़े आते हैं। जिनमें जहर खाने के मामले अधिक होते हैं। अधिकांश मामलों में मामूली सी बातों पर सुसाइड करने जैसी विचारधारा देखी जा रही है।
डॉ नीरज सोनी, जिला अस्पताल
Published on:
18 Feb 2026 11:02 am
