
वर्ष 2013 में जब छतरपुर जिले के नौगांव को शासकीय पॉलीटैक्निक के साथ-साथ शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज की सौगात मिली थी, तब केवल छतरपुर ही नहीं, बल्कि पन्ना, निवाड़ी, टीकमगढ़ और दमोह जैसे पिछड़े जिलों के युवाओं में एक नई उम्मीद जगी थी। बुंदेलखंड के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को पहली बार अपने ही अंचल में कम खर्च पर उच्च तकनीकी शिक्षा पाने का सुनहरा अवसर दिखा था। लेकिन 13 लंबे सालों का अंतराल बीत जाने के बाद भी यह सपना धरातल पर उतरने के बजाय सरकारी उपेक्षा और प्रशासनिक लाचारी का शिकार होकर रह गया है। करोड़ों रुपए का बजट बहाए जाने के बावजूद यह संस्थान आज भी अपने बुनियादी वजूद के लिए संघर्ष कर रहा है।
कोर्स बढ़ने के बजाय घट गए!पॉलीटैक्निक (डिप्लोमा) के साथ-साथ जब नौगांव को इंजीनियरिंग (डिग्री) कॉलेज की सौगात मिली, तो उम्मीद थी कि क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा का दायरा बढ़ेगा और नए दौर के आधुनिक विषय शुरू होंगे। लेकिन यहां ज़मीनी हकीकत और सरकारी दावों में ज़मीन-आसमान का अंतर देखने को मिल रहा है। पॉलीटैक्निक में 5 और इंजीनियरिंग में 4 कोर्स संचालित हैं।
कंप्यूटर साइंस जैसा मुख्य विषय गायब: आज के डिजिटल और आईटी युग में जिस कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की सबसे ज़्यादा मांग है, उसके पद ही स्वीकृत नहीं किए गए हैं।फैक्ट फाइल
शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज, नौगांव
सिविल इंजीनियरिंग
मैकेनिकल इंजीनियरिंग
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग
कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग
इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग
सिविल इंजीनियरिंग
मैकेनिकल इंजीनियरिंग
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग
इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग
वर्ष 2019 में नौरा पहाड़ी के पास कॉलेज के अपने भवन के लिए 23 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट जारी किया गया था। लेकिन इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बावजूद बुनियादी ढांचे का विस्तार बहुत सीमित रहा।
वर्तमान स्थिति: वर्तमान में 4 कोर्स के संचालन के लिए परिसर में महज 3 ब्लॉक मौजूद हैं। इनमें से 2 ब्लॉक में कक्षाएं (क्लास) लगती हैं और 1 में वर्कशॉप संचालित होती है। 2 नए ब्लॉक की सख्त जरूरत: उपलब्ध स्थान जरूरत के मुकाबले बेहद कम है। कॉलेज को सुचारू रूप से चलाने के लिए कम से कम 2 नए ब्लॉक भवनों का निर्माण अत्यंत आवश्यक है।
सुरक्षा से खिलवाड़: 1.5 किमी दूर सुनसान हॉस्टलशिक्षा के साथ-साथ यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की सुरक्षा और रहने की व्यवस्था भी पूरी तरह चिंताजनक बनी हुई है।
असुरक्षित और दूर स्थित हॉस्टल: कॉलेज का छात्रावास मुख्य परिसर से लगभग डेढ़ किलोमीटर (1.5 किमी) दूर एक सुनसान जगह पर स्थित है। यहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतज़ाम न होने से विद्यार्थी हॉस्टल में रहने से कतराते हैं।बुनियादी जरूरतों की किल्लत: छात्रावास में स्वच्छ पेयजल, निर्बाध बिजली और स्वच्छता जैसी प्राथमिक सुविधाओं की भारी कमी बनी हुई है।फैकल्टी का अकाल: 125 पदों पर महज 12 शिक्षककिसी भी शैक्षणिक संस्थान की रीढ़ उसकी फैकल्टी (शिक्षक) होती है, लेकिन नौगांव इंजीनियरिंग कॉलेज शिक्षकों के भीषण अकाल से जूझ रहा है:
स्वीकृत पद: 125
वर्तमान में कार्यरत स्टाफ: कुल 12 शिक्षक
स्टाफ का गणित: 6 नियमित प्राध्यापक और 6 संविदा/अस्थायी कर्मचारी।
125 स्वीकृत पदों के मुकाबले महज 12 शिक्षकों (जिनमें आधे संविदा हैं) के भरोसे पूरा इंजीनियरिंग कॉलेज चलाना शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यहां नियमित और स्थायी स्टाफ की तत्काल जरूरत है।
सुविधाओं और संसाधनों के अभाव के बीच वर्तमान में कॉलेज में कुल 200 छात्र अध्ययनरत हैं। हाल ही में कॉलेज प्रबंधन द्वारा एडमिशन बढ़ाने के लिए विशेष प्रचार-प्रसार पर फोकस किया गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं। हालिया प्रयासों से 32 नए एडमिशन दर्ज हुए हैं, जो इस घटते ग्राफ के बीच एक राहत भरी खबर है। हालांकि छात्रों की सबसे पसंदीदा और आधुनिक समय की मांग माने जाने वाले कंप्यूटर साइंस विषय के पद स्वीकृत न होने के कारण छात्र-छात्राओं को आईटी की पढ़ाई के लिए अन्य बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ रहा है।
कंप्यूटर साइंस के पद स्वीकृत हों: आज की मांग को देखते हुए कंप्यूटर साइंस ब्रांच को तत्काल स्वीकृति देकर शुरू किया जाए।2 नए ब्लॉक का निर्माण: कक्षाओं और प्रैक्टिकल के लिए कम से कम दो नए ब्लॉक भवनों का तत्काल निर्माण कराया जाए।नियमित शिक्षकों की भर्ती: स्वीकृत 125 पदों के सापेक्ष पर्याप्त नियमित प्राध्यापकों की स्थायी नियुक्ति हो।कैंपस में सुरक्षित हॉस्टल: दूर स्थित सुनसान हॉस्टल के बजाय मुख्य परिसर के भीतर ही सुरक्षित और सर्वसुविधायुक्त हॉस्टल बनाया जाए।प्राचार्य का पक्षभवन निर्माण, नियमित स्टाफ की नियुक्ति और नए स्वीकृत कोर्स (विशेषकर कंप्यूटर साइंस) को लेकर शासन से लगातार पत्राचार किया गया है। इसके अलावा कॉलेज में एडमिशन बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार पर फोकस किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं और 32 नए प्रवेश हुए हैं।
मुकेश वर्मा, प्राचार्य, शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, नौगांव