बीमार बच्चों को चिह्नित करने में जुटा स्वास्थ्य अमला , 31 तक चलेगा अभियान
छतरपुर. दस्तक अभियान अंतर्गत शून्य से पांच साल तक के बच्चों की नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच और इलाज किया जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास विभाग ने टीमों का गठन किया है। अभियान में पांच वर्ष से छोटे बच्चों को दस्त, निमोनिया, कुपोषण एवं जन्मजात बीमारियों की पहचान कर उनका नि:शुल्क इलाज किया जाएगा। बीमार नवजातों और बच्चों की पहचान होगी।
इस अभियान के तहत पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में शैशव एवं बाल्यकालीन निमोनिया की त्वरित पहचान की जाएगी, साथ ही गंभीर कुपोषित बच्चों की सक्रिय पहचान होगी। इसके अलावा 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों में गंभीर एनीमिया की सक्रिय स्क्रीनिंग एवं प्रबंधन भी किया जाएगा। संक्रमण के बाद से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है, ऐसे में बच्चों में होने वाली विभिन्न बीमारियों का पता लगाकर उनका समुचित इलाज करना है। अभियान के माध्यम से बच्चों का सर्वे भी किया जाएगा, जिससे विभाग के पास डारा उपलब्ध रहेगा।
डायरिया एवं अति कुपोषित बच्चों का सर्वे दस्तक अभियान में डायरिया एवं अति कुपोषित बच्चों का सर्वे करते हुए प्रतिदिन का माइक्रो प्लान तैयार किया जा रहा है। सामान्य लक्षण है तो सर्वे स्थल पर ही और गंभीर बच्चे पाए जाने पर तुरंत एनआरसी में रेफर किए जा रहे हैं। इस अभियान में महिला बाल विकास, स्वास्थ्य, पंचयत ग्रामीण विकास विभाग का भी सहयोग है। कलक्टर ने अभियान में जिला अधिकारी और एसडीएम को मैदानी अंचलों में भ्रमण करने के निर्देश दिए हैं।
31 अगस्त तक चलेगा दस्तक अभियान
दस्तक अभियान 31 अगस्त चलेगा। इसका उद्देश्य पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में प्रमुख बाल्यकालीन बीमारियों की सामुदायिक स्तर पर सक्रिय पहचान और त्वरित प्रबंधन करन है, जिससे बाल मृत्यु दर में वांछित कमी लाई जा सके। अभियान में एएनएम, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर बीमार बच्चों की पहचान करेंगी। भ्रमण के दौरान आंशिक रूप से टीकाकरण एवं छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण किया जा रहा है।
फोटो- सीएचपी१६०८२३-78- सीएमएचओ कार्यालय