दोनों आरक्षकों पर हत्या का मामला दर्ज किया जाए। परिवार के अनुसार, राजेश पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी। जिन पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़ा, उनमें से एक ड्यूटी पर भी नहीं था।
राजनगर थाने में पुलिस कस्टडी में 30 साल के राजेश पटेल की कथित तौर पर फंदा लगाकर आत्महत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। रविवार को मृतक के परिजन सैकड़ों लोगों के साथ राजनगर थाना पहुंचे और चक्काजाम कर प्रर्दशन किया। इस दौरान परिजनों की पुलिस से तीखी बहस हुई। पुलिस के समझाने के बाद भी परिजन प्रदर्शन करते रहे। परिजनों का कहना है कि पुलिस दोहरा चरित्र अपना रही है। आरक्षकों द्वारा मारपीट करने से राजेश की मौत हुई है। इनके द्वारा 50 हजार रुपए की मांग की गई थी। पुलिस विभाग ने केवल उन्हें सस्पेंड किया है, उन्हें रिमांड पर नहीं लिया गया है। परिजनों का कहना है कि दोनों आरक्षकों पर हत्या का मामला दर्ज किया जाए। परिवार के अनुसार, राजेश पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी। जिन पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़ा, उनमें से एक ड्यूटी पर भी नहीं था। थाना परिसर को सील कर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
विदित हो कि शनिवार की शाम 5 बजे राजनगर थाने के महिला सेल के वॉशरूम में राजेश का शव फंदे पर लटकते मिला था। शनिवार सुबह करीब 10 बजे दो पुलिसकर्मी, संजय कुमावत और शिवकुमार पाल, राजेश को घर से थाने ले गए थे। शव उस कमरे के वॉशरूम में मिला था, जहां महिलाओं और बच्चों की सुनवाई होती है। घटना की सूचना मिलते ही एसपी अगम जैन सहित मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचे थे। एफएसएल टीम ने जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद दोनों आरक्षकों को सस्पेंड कर दिया गया है। एसपी अगम जैन ने जानकारी दी कि मामले की जांच मजिस्ट्रेट कर रहे हैं।
मृतक के चाचा बाबूलाल पटेल ने बताया कि शनिवार सुबह करीब 10 बजे सिविल ड्रेस में आए आरक्षक संजय सिंह कुमावत तथा शिवकुमार पाल ने राजेश को मोटरसाइकिल से थाने ले गए थे। परिजन थाने पहुंचे तो युवक के साथ मारपीट करते देखा। आरक्षकों ने एक लाख रुपये की मांग की, जिसमें 50 हजार पर बात बनी। पैसे लेकर पहुंचने पर भी पुलिस ने राशि लेने से इनकार कर दिया तथा बाद में सूचना मिली कि राजेश की मौत हो गई। बाबूलाल पटेल के अनुसार युवक का शरीर चोटों से काला पड़ गया था तथा पोस्टमार्टम के समय भी चोटें स्पष्ट दिखाई दीं।
मदोपहर करीब दो बजे परिजन पोस्टमार्टम के लिए सहमत हुए। छतरपुर से डॉ. मनोज चौधरी, नौगांव से बीएमओ डॉ. रविंद्र पटेल, डॉ. अरविंद गुप्ता, डॉ. अजीत जादौन तथा डॉ. महबूब सलमान के पैनल ने व्यवहार न्यायाधीश तथा मृतक के परिजनों चाचा बाबूलाल पटेल एवं रिश्तेदार रज्जन पटेल की उपस्थिति में पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम के पश्चात भी परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया तथा आरोपी आरक्षकों पर एफआइआर दर्ज करने की मांग दोहराई। प्रदर्शन के दौरान एसडीओपी मनमोहन सिंह बघेल ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने हेतु सभी मार्गों पर बैरिकेडिंग लगाई, इसके बावजूद भारी संख्या में लोग जमा हो गए।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रविंदर सिंह ने घटना की ज्यूडिशियल जांच के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान दो जजों की उपस्थिति में घटनास्थल की वीडियोग्राफी कराई गई। पुलिस अधीक्षक अगम जैन ने थाने के दो आरक्षकों संजय कुमावत एवं शिवकुमार पाल को निलंबित कर दिया है।
राजनगर विधायक अरविंद पटैरिया ने अस्पताल पहुंचकर मृतक के परिजनों से मुलाकात की तथा उन्हें हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध उचित कार्यवाही की जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत ही युवक की मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा। इस घटना ने क्षेत्र में पुलिस व्यवस्था एवं हिरासत में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।