
छतरपुर। ओलावृष्टि से बर्वाद फसलों के मुआवजा, किसान कर्ज माफी की मांग और मनमाने बिजली बिलों से नाराज किसानों का आंदोलन शुक्रवार को भी जारी रहा। किसानों ने गुरुवार की दोपहर में कलेक्ट्रेट में धरना दिया था, जो ४८ घंटे बाद तक जारी रहा। रात 8.30 बजे प्रशासन ने किसानों को प्रति हेक्टेयर 30 हजार रुपए मुआवजा देने का आश्वासन दिया। इस पर किसानों ने 15 दिनों के लिए अपना आंदोलन वापस ले लिया। इसके पहले गुरुवार की रात प्रशासन और पुलिस द्वारा कलेक्ट्रेट के अंदर से हटाए जाने के बाद किसानों ने गेट के सामने ही धरना शुरू कर दिया था। पूरी रात किसान खुले आसमान के नीचे धरने डटे रहे। रात में यहीं पर किसानों ने खाना पकाया और खाया। शुक्रवार को प्रशासन की ओर से एसडीएम रविंद्र चौकसे किसानों के पास पहुंचे, लेकिन उनके बीच मांगों को लेकर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद किसानों ने अपना धरना जारी रखा। उधर किसानों ने ऐलान किया है कि अगर उनकी मांग प्रशासन नहीं सुनता है तो किसान जिले के सभी विधायक, सांसद और मंत्रियों के घरों की ओर रुख करेंगे और उनका घेराव करेंगे। उधर किसान लगतार दूसरी रात कलेक्टर के बाहर धरना देकर बैठने की तैयारी में रहे।
शुक्रवार को किसानों का आंदोलन और धरना चलता रहा। सुबह से कई गांवों के किसान और यहां पहुंच गए। इस पर प्रशासन सकते में आ गया। उधर प्रशासन के रवैये से नाराज किसानों ने अपने साथ ट्रालियों में लाए हुए ओले और खराब फसलें कलेक्ट्रेट के गेट पर डालकर गेट पर ही धरना शुरू कर दिया। सरकार और प्रशासन के विरोध में लगातार नारेबाजी करते हुए किसानों ने मांगें पूरी नहीं होने तक धरना जारी रखने की बात कही।
किसान आंदोलन को समाजवादी नेता एवं पूर्व विधायक जेपी निगम ने भी अपना समर्थन दिया है। वे शाम को धरना स्थल पर पहुंचे और किसानों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगें जायज है। आफत की स्थिति में शासन-प्रशासन को किसानों के साथ पूरा न्याय करना चाहिए। पूर्व विधायक निगम दो घंटे तक किसानों के साथ धरने पर बैठे रहे। इसके बाद प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया। इससे आंदोलन स्थगित हो गया।
मांगें माने जाने का आश्सवासन मिला, आंदोलन स्थगित :
कलेक्ट्रेट के बाहर दो दिनों से आंदोलन कर रहे किसानों ने रात 8.30 बजे प्रशासन की ओर से मिले ठोस आश्वासन के बाद 15 दिनों के लिए आंदोलन वापस ले लिया है। पूर्व विधायक जेपी निगम और समाजसेवी हरिप्रकाश अग्रवाल की मौजूदगी में किसानों को प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि ओला पीडि़त किसानों को 30 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा। इस मांग के माने जाने पर किसानों ने अपना आंदोलन 15 दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। आम आदमी पार्टी के नेता अमित भटनागर ने बताया कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो 15 दिन बाद किसान फिर से आंदोलन करेंगे।
एसडीएम-तहसीलदार को लौटाया :
इसके पूर्व सुबह 11 बजे धरना स्थल पर प्रशासन की तरफ से एसडीएम रविंद्र चौकसे और तहसीलदार सहित प्रशासन की टीम किसानों से बात करने पहुंची। लेकिन किसानों ने अपनी मांगों को लेकर ठोस आश्वासन की बात कहीं। अफसरों ने जब गोल-मोल जवाब दिया तो किसानों ने नारेबाजी कर उन्हें लौटा दिया।
प्रशासन ने खदेड़ा, महिलाओं-बच्चों ने खुले आकाश के नीचे गुजारी रात :
अपनी मांगों को लेकर एक दर्जन गांव के सैकड़ों किसान ट्रेक्टरों से कलेक्ट्रेट तक रैली निकालकर पहुंचे थे और कलेक्टर के आने व मांगे मानने को लेकर कलेक्ट्रेट का घेराव कर धरने पर बैठ गए थे। कलेक्टर रमेश भंडारी द्वारा किसानों की मांगों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिए जानेे के कारण किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर में ही धरना शुरू कर दिया था। रात 10.30 बजे बजे सीएसपी व पुलिस बल ने पुलिसिया अंदाज में किसानों को डराने व लाठीचार्ज की धमकी देकर खदेडऩे का प्रयास किया तो पुलिस से अमित भटनागर व किसानों से तीखी झड़प हुई। एसडीएम रविन्द्र चौकसे ने किसानों को कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर अनशन करने के लिए कहा और उन्हें बाहर करा दिया। किसानों के साथ आईं महिलाओं- बच्चों ने खुले आकाश के नीचे रात बिताई। जिससे बच्चों की तबियत भी खराब हो गई। इससे किसान और आक्रोशित हो गए। रात 12 बजे किसानों ने आग जलाकर यहां पर अपने लिए खाना बनाया और खुले आसमान के नीचे ही रात गुजारी। कई किसान यहां बिना खाना खाए ही सो गए। किसानों का आरोप था कि उनके साथ प्रशासन ने अमानवीय व्यवहार किया है।अफसरों ने यह कहकर कलेक्ट्रेट से बाहर कर दिया कि ट्रेजरी में प्रशासन का खजाना रखा है अगर चोरी हो गया तो कौन जवाबदेह होगा।
किसान बोले- हमारी कोई नहीं सुन रहा
प्रशासन हमारी सुनने को भी तैयार नहीं :
हम चौबीस घंटे से धरने पर बैठे हैं, लेकि प्रशासन हमारी मांग नहीं मान रहा है। हमारी बात तक सुनने के लिए तैयार रहीं हैं। हमें कलेकट्रेट के अंदर से रात में ही खदेड़कर भगा दिया। हम लोग पूरी रात से खुले आसमान के नीचे ठंड में पड़े रहे, लेकिन कोई भी सुध लेने नहीं आया है। किसानों के साथ सरकार और प्रशासन अन्याय कर रहा है। - छमाधर पटेल, किसान, ग्राम गुड़पारा
सूखा का ही मुआवजा अभी नहीं मिला :
प्रशासन ने अभी तक पूर्व में सूखा से चौपट हुई फसलों का ही मुआवजा नहीं दिया है। ऊपर से अब ओलावृष्टि से फसलें चौपट हो गईं, लेकिन प्रशासन कोई राहत राशि तक नहीं दे पाया है। हम अपनी जायज मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट आए हैं, लेकिन प्रशासन के अफसर सुनने तक के लिए तैयार रहीं हैं। हम मांग पूरी होने तक आंदोलन करते रहेंगे।
- हरप्रयाद यादव, किसान, ग्राम गुड़पारा
हम खाने तक के लिए मोहताज हो गए हैं : (फोटो१७)
सूखा के कारण पहले ही हम सभी परेशान थे। साल भर के लिए खाने-पीने कुछ बुआई की थी, लेकिन ओला से वह भी फसल चौपट हो गई है। हम खाने-पीने तक के लिए मोहताज हो गए हैं। यहां प्रशासन से मदद मांगने आए हैं लेकिन अफसर हमें धक्का देकर भगा रहे हैं। इतना जुल्म पहले कभी नहीं देखा।
- शांतिबाई अहिरवार, रामनगर
हमें प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा चाहिए : (फोटो१८)
हमारी फसलें चौपट हुई हैं। सूखा राहत का रुपया अब तक नहीं मिला है। फसल बीमा का भी कोई मुआवजा नहीं मिला है जबकि हमारे खाते से प्रीमियम कट जाता है। हम प्रति एकड़ 20 हजार रुपए के हिसाब से मुआवजा मांग रहे हैं। लेकिन प्रशासन हमारी मांग सुनने तक को तैयार नहीं है। पहले की राहत राशि नहीं दी तो अब हम कैसे भरोसा कर लें।
- भूरीबाई बंसल, रामनगर