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दाखिला लेकर फंस गए विद्यार्थी, अब आरक्षण के विवाद में उलझी शिक्षकों की भर्ती

15 जुलाई से सत्र शुरू, एक महीना बीतने को है फिर भी खाली पड़े क्लासरूम, ठप पड़ीं बीए एलएलबी और कृषि की कक्षाएं
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महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय

महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा की उम्मीद लेकर आए सैकड़ों छात्र-छात्राओं के भविष्य पर गहरा संकट मंडराने लगा है। विश्वविद्यालय प्रशासन की लचर कार्यशैली और नीतिगत खामियों के कारण नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत ही भारी अव्यवस्थाओं के बीच हुई है। भारी-भरकम शुल्क चुकाकर दाखिला लेने वाले विद्यार्थी अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, क्योंकि 15 जुलाई से सत्र शुरू हुए एक महीना बीतने को है और अगस्त का आधा महीना ढल चुका है, फिर भी विभागों में पढ़ाने के लिए शिक्षक ही मौजूद नहीं हैं।

आरक्षण रोस्टर का पेच- प्रशासनिक चूक, सजा भुगत रहे छात्र

विश्वविद्यालय में अध्यापन व्यवस्था पूरी तरह अतिथि विद्वानों (अतिथि शिक्षकों) के भरोसे टिकी हुई है। लेकिन इस बार अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू होते ही गंभीर विवादों में घिर गई है। आरोप हैं कि विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा जारी किए गए भर्ती विज्ञापन में शासकीय आरक्षण रोस्टर और तय नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। रोस्टर में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आने के बाद पूरी चयन प्रक्रिया प्रशासनिक और कानूनी पेंच में उलझकर रह गई है। इस पूरी खींचतान का सीधा खामियाजा उन बेकसूर विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई का नुकसान उठाकर भुगतना पड़ रहा है।

व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का बुरा हाल, प्रायोगिक पढ़ाई भी ठप

सबसे चिंतनीय स्थिति विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण व्यावसायिक और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों की है।

बीए एलएलबी: 120 सीटों पर प्रवेश पूरा हो चुका है, लेकिन कानून की बारीकियां सिखाने वाला एक भी प्राध्यापक कक्षा में नहीं पहुंचा।

कृषि (स्नातक)- 195 सीटों पर विद्यार्थियों का दाखिला लिया गया है। सैद्धांतिक पढ़ाई तो दूर, प्रायोगिक कार्य के लिए भी विषय विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं।

अन्य विभाग- चित्रकला, संगीत, मनोविज्ञान, न्याय न्यायालयिक विज्ञान, संगणक विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी और पर्यटन जैसे विभागों में भी स्थिति चिंताजनक है। चित्रकला विभाग का जिम्मा तो केवल एक प्रयोगशाला सहायक के भरोसे छोड़ दिया गया है।

120 शिक्षकों हटाने से समस्या

उल्लेखनीय है कि बीते सत्र के समाप्त होते ही (15 मई को) विश्वविद्यालय में पदस्थ करीब 120 विषय विशेषज्ञों को कार्यमुक्त कर दिया गया था। नए सत्र की समय-सारणी 15 जुलाई से प्रभावी करने के निर्देश तो जारी कर दिए गए, लेकिन दो महीने का पर्याप्त समय मिलने के बावजूद समय पर पारदर्शी तरीके से भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

पिछड़ रहा पाठ्यक्रम, परीक्षा परिणाम का बढ़ा डर

शैक्षणिक समय-सारणी के हिसाब से अगस्त मध्य तक कम से कम 20 से 25 प्रतिशत पाठ्यक्रम पूरा हो जाना चाहिए था। नियमित कक्षाएं न लगने से छात्रों का पाठ्यक्रम समय पर पूरा होना नामुमकिन नजर आ रहा है। विद्यार्थियों में डर है कि यदि जल्द ही कक्षाएं शुरू नहीं हुईं, तो आधी-अधूरी तैयारी के साथ परीक्षा में बैठना पड़ेगा, जिससे उनका परिणाम बिगड़ेगा और पूरक परीक्षा (सप्लीमेंट्री) का सामना करना पड़ सकता है।

विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष

उपलब्ध संसाधनों और शिक्षकों के माध्यम से फिलहाल कक्षाएं संचालित कराने का प्रयास किया जा रहा है। प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण होते ही नियमानुसार और छात्र-संख्या के अनुपात में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया संपन्न कर ली जाएगी।

यशवंत सिंह पटेल, कुलसचिव

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