किसानों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण के दौरान उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया गया और उनकी सिंचित जमीनों को जानबूझकर असिंचित दर्शाया गया है।
जिले में सागर-कानपुर फोरलेन के निर्माण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। फोरलेन निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई किसानों की भूमि को लेकर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण के दौरान उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया गया और उनकी सिंचित जमीनों को जानबूझकर असिंचित दर्शाया गया है। ढड़ारी गांव के किसान गौरीशंकर, पूरनलाल, मगललाल साहू और मुरलीधर रैकवार का कहना है कि उन्होंने वर्षों से उर्मिल नदी और कुओं के माध्यम से अपनी जमीनों को सिंचित कर खेती की है, लेकिन सर्वे रिपोर्ट में इन जमीनों को असिंचित दिखाया गया है। इससे मुआवजे की राशि में भारी अंतर आ गया है।
सागर रोड रेलवे ब्रिज के पास जब ठेकेदार ने सडक़ निर्माण के लिए सीमांकन करते हुए खुदाई शुरू की, तभी किसानों ने मौके पर पहुंचकर विरोध किया और कार्य रुकवा दिया। किसानों का साफ कहना है कि जब तक मुआवजे की राशि सही ढंग से नहीं दी जाती, तब तक फोरलेन का काम नहीं होने दिया जाएगा। लगभग 15 दिनों से निर्माण कार्य ठप पड़ा हुआ है।
सर्वे रिपोर्ट में किसानों के नाम तक छोड़ेढड़ारी निवासी नत्थू रैकवार ने बताया कि उनकी जमीन फोरलेन की अधिग्रहण सीमा में आती है, लेकिन सर्वे रिपोर्ट में उनका नाम ही नहीं जोड़ा गया है। उन्होंने प्रशासन को आवेदन देकर दोबारा सर्वे की मांग की है और कहा है कि जमीन मालिकों को उनका हक मिलना चाहिए।
साठिया घाटी से चौका गांव तक तीसरे फेज और चौका गांव से कैमाा बैरियर तक चौथे फेज में कुल 98 किलोमीटर लंबा फोरलेन प्रस्तावित है। तीसरे फेज में 55 किमी की सडक़ पर 1008 करोड़ रुपए और चौथे फेज में 43 किमी की सडक़ पर 997 करोड़ रुपए का खर्च प्रस्तावित है। यह सडक़ छतरपुर जिले की कनेक्टिविटी को उत्तर भारत से जोडऩे का बड़ा जरिया बनेगी।
केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने जनवरी 2023 में सागर-कानपुर फोरलेन प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी थी। एनएचएआई ने वर्ष 2026 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इस प्रोजेक्ट के तहत 232 किलोमीटर सडक़ों का निर्माण किया जाना है। पहले फेज के तहत सागर से मोहारी गांव तक 50 किलोमीटर लंबे हाइवे का काम एनएचएआई की सागर इकाई के अधीन तेजी से चल रहा है।
फोरलेन के लिए अधिग्रहित जमीनों का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की गई है। राजस्व टीम ने मौके का निरीक्षण कर भू-स्वामियों को मुआवजा देने के लिए जमीन चिह्नित की है। जिन किसानों को मुआवजे में समस्या आ रही है, उनके मामलों को प्राथमिकता से हल किया जा रहा है।
अखिल राठौर, एसडीएम