17 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सटई रोड पर अंधेरा, सालभर में 186 हादसे और 13 मौतें, फिर भी जिम्मेदार बेपरवाह

शहर की 40 फीसदी आबादी वाले मुख्य मार्ग पर स्ट्रीट लाइट का अभाव, चौड़ीकरण के बाद भी हालात बदतर,पन्ना नाका से लेकर करीब तीन किलोमीटर का यह मुख्य मार्ग शाम होते ही अंधेरे में गुम हो जाता

2 min read
Google source verification
satai road in dark

सटई रोड पर अंधेरा

जिला प्रशासन द्वारा शहर के विकास के लिए बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं और करोड़ों रुपए का बजट भी खर्च होता है, लेकिन छतरपुर के सटई मार्ग के हालात आज भी नहीं सुधर पाए हैं। पन्ना नाका से लेकर करीब तीन किलोमीटर का यह मुख्य मार्ग शाम होते ही अंधेरे में गुम हो जाता है, जबकि इस मार्ग पर लोगों की निरंतर आवाजाही बनी रहती है। आंकड़ों पर गौर करें तो बीते एक साल में सटई रोड पर ही करीब 186 सड़क हादसे हुए हैं, जिनमें 13 लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद जिला प्रशासन और नगर पालिका अब तक सड़क पर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं कर पाए हैं। रात के समय रोशनी न होने के कारण लोग लगातार हादसों का शिकार होकर काल के गाल में समा रहे हैं।

अंधेरे में मवेशियों का खतरा

सटई रोड पर स्ट्रीट लाइट न होने से शाम के बाद सड़क पूरी तरह अंधेरे में डूब जाती है। सड़क के चौड़ीकरण के बाद व्यवस्थित डामरीकरण नहीं किया गया, जिससे सड़क की पट्टी पर वाहनों के फिसलने का डर बना रहता है। लाइट न होने से सड़क पर बैठे मवेशी रात के समय दिखाई नहीं देते, जिससे टकराकर आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं। गौरतलब है कि शहर की करीब 40 प्रतिशत आबादी इस मार्ग के चारों ओर निवास करती है। विकास कार्यों के नाम पर सड़कें तो चौड़ी कर दी गईं, लेकिन बिजली की व्यवस्था न होने से लोगों का सफर जानलेवा बना हुआ है।

हॉटस्पॉट बना सटई मार्ग

बसाहट वाला इलाका होने के कारण इस मार्ग पर रात के समय भी वाहनों का दबाव अधिक रहता है। रोशनी के अभाव में वाहन चालक मवेशियों और सड़क की खराब स्थिति को भांप नहीं पाते, जिसके चलते आए दिन सड़क दुर्घटनाओं की खबरें आती रहती हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि शाम ढलते ही यहाँ से गुजरना जोखिम भरा हो जाता है।

प्रशासन के पास नहीं कोई ठोस योजना

इस गंभीर मुद्दे पर जिला प्रशासन द्वारा केवल सुधार का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन धरातल पर नगर पालिका और प्रशासन इस ओर ध्यान देने में देरी कर रहे हैं। जबकि यहां आए दिन होने वाले दर्दनाक हादसों में लोग जख्मी हो रहे हैं और कई अपनी जान गंवा चुके हैं। प्रशासन की यह अनदेखी अब आम जनता के जीवन पर भारी पड़ रही है।