छतरपुर

जियो टैगिंग में मेड़ से नहीं, अब खेत के बीच से लेनी होगी फोटो, 50 मीटर दूरी की छूट खत्म

अब सिस्टम में दूरी की सीमा को घटाकर 0 मीटर कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब है कि एप पर जो लोकेशन पॉइंट दिख रहा है, पटवारी को ठीक उसी बिंदु पर पहुंचकर फोटो अपलोड करनी होगी।

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Mar 03, 2026
गिरदावरी

गिरदावरी की नई तकनीकी व्यवस्था...सख्त नियमों ने रोके गेहूं पंजीयन, अब तक मात्र 30% ही हो सके

जिले में इस वर्ष गेहूं की बंपर पैदावार की उम्मीदों पर फसल गिरदावरी की नई तकनीकी व्यवस्था ने पानी फेरना शुरू कर दिया है। राजस्व विभाग द्वारा लागू किए गए जियो टैगिंग के कड़े नियमों के कारण गेहूं उपार्जन पंजीयन की गति बेहद धीमी हो गई है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पंजीयन के लिए 7 मार्च तक का समय शेष है, लेकिन अब तक पिछले साल के मुकाबले मात्र 30 प्रतिशत किसानों का ही पंजीयन पोर्टल पर दर्ज हो सका है। यदि जल्द ही तकनीकी सुधार या तिथि में विस्तार नहीं किया गया, तो बुंदेलखंड के हजारों किसान अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेचने से वंचित रह सकते हैं।

50 मीटर की मेड़ वाली सुविधा हुई खत्म

राजस्व अमले के सामने सबसे बड़ी चुनौती जियो टैग सिस्टम की नई सेटिंग है। पहले पटवारी खेत की मेड़ या खसरे की सीमा से 50 मीटर के भीतर खड़े होकर आसपास के कई खेतों की गिरदावरी कर लेते थे। लेकिन अब सिस्टम में दूरी की सीमा को घटाकर 0 मीटर कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब है कि एप पर जो लोकेशन पॉइंट दिख रहा है, पटवारी को ठीक उसी बिंदु पर पहुंचकर फोटो अपलोड करनी होगी।

किचन और ड्राइंग रूम में दिख रही खेत की लोकेशन

शहरी और विकसित इलाकों में यह समस्या और भी विकराल हो गई है। कई ऐसे खसरा नंबर हैं जहां अब कॉलोनियां बस चुकी हैं और पक्के मकान बन गए हैं। तकनीकी त्रुटि के चलते जब पटवारी गिरदावरी करने पहुंचते हैं, तो खसरे की लोकेशन किसी के घर के भीतर, जैसे ड्राइंग रूम या किचन में दिखाई देती है। नियम की मजबूरी ऐसी है कि जब तक उस सटीक बिंदु से फोटो नहीं ली जाती, गिरदावरी पोर्टल पर दर्ज नहीं होती। इस समस्या को लेकर पटवारी संघ पहले ही ज्ञापन देकर अपनी आपत्ति दर्ज करा चुका है।

तकनीकी पेच और समय की पाबंदी

जिले में गिरदावरी का काम 90 फीसदी पूर्ण बताया जा रहा है, लेकिन शेष 10 फीसदी काम ही सबसे बड़ी फांस बन गया है। कहीं खसरा नंबरों पर खेत-तालाब की लोकेशन आ रही है, तो कहीं नक्शों में विधिवत बटान (विभाजन) दर्ज न होने से काम अटका है। ऊपर से पोर्टल पर फोटो अपलोड करने का समय सुबह 6 से शाम 6 बजे तक ही तय है, जिससे तकनीकी और भौगोलिक चुनौतियों के बीच काम पूरा करना राजस्व अमले के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।

सरकारी संपत्तियों की भी निगरानी

इस बार विशेष अभियान के तहत केवल निजी भूमि ही नहीं, बल्कि सड़कों, शासकीय जमीनों और सार्वजनिक संपत्तियों की भी जियो टैग गिरदावरी की जा रही है। हर स्थान पर मौके पर पहुंचकर फोटो खींचना अनिवार्य है, जिससे समय का अधिक व्यय हो रहा है और मुख्य कार्य गेहूं पंजीयन की गति प्रभावित हो रही है।

पंजीयन तिथि बढ़ाने की मांग तेज

जिले के किसान संगठनों और राजस्व विभाग के भीतर से अब पंजीयन की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग उठने लगी है। प्रशासन स्तर पर भी इसकी प्रक्रिया शुरू होने की चर्चा है। यदि समय पर निर्णय नहीं लिया गया, तो किसान अपनी मेहनत की फसल को औने-पौने दामों पर बिचौलियों को बेचने के लिए मजबूर होंगे।

Updated on:
03 Mar 2026 10:37 am
Published on:
03 Mar 2026 10:36 am
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