पिछले तीन सालों में जिले के एक भी अधिकारी ने परिवहन विभाग से फ्लैशर लाइट लगाने की अनुमति नहीं ली है। जिससे ये बत्ती और वाहन अवैध है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्पष्ट निर्देशों के बाद देश भर में लाल, नीली और पीली बत्ती के उपयोग पर प्रतिबंध लगाकर वीआईपी कल्चर को खत्म करने की कोशिश की गई थी। लेकिन छतरपुर जिले में बैठे अपात्र अफसरों का इस बत्ती मोह से पीछा नहीं छूट रहा है। जिले में प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर प्रभारी नायब तहसीलदार तक अपने वाहनों पर अवैध रूप से बहुरंगी बत्ती और हूटर का प्रयोग कर रहे हैं। चौंकाने वाला खुलासा यह है कि पिछले तीन सालों में जिले के एक भी अधिकारी ने परिवहन विभाग से फ्लैशर लाइट लगाने की अनुमति नहीं ली है। जिससे ये बत्ती और वाहन अवैध है।
परिवहन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जिले भर में किसी भी वाहन पर फ्लैशर (बहुरंगी बत्ती) लगाने के लिए एक भी पात्र अफसर ने परमिशन के लिए आवेदन नहीं किया है। नियमों के मुताबिक, यदि किसी अधिकारी के पास बत्ती लगाने की पात्रता है, तो उसे परिवहन विभाग की अनुमति को वाहन की विंडस्क्रीन (सामने का कांच) पर चस्पा करना अनिवार्य है। वर्तमान में जिले में किसी भी वाहन पर ऐसी अनुमति चस्पा नहीं है, जिसका सीधा अर्थ है कि सडक़ों पर दौड़ रहे सभी अफसरों के वाहनों पर लगी बत्ती और हूटर पूरी तरह से अवैध हैं।
परिवहन आयुक्त द्वारा जारी हालिया निर्देशों के बाद यह तथ्य सामने आया है कि मध्य प्रदेश में बहुरंगी बत्ती और हूटर के दुरुपयोग के मामले में छतरपुर जिला अव्वल स्थान पर है। यहां न केवल सरकारी गाडिय़ों में, बल्कि निजी वाहनों पर भी बेधडक़ बत्ती और हूटर का इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी तो दूर, राजनीतिक दलों से जुड़े लोग भी निजी वाहनों पर फ्लैशर लाइट लगाकर आम जनता पर धौंस जमा रहे हैं। भीड़भाड़ वाले इलाकों में हूटर का बेतहाशा प्रयोग ध्वनि प्रदूषण और दहशत का कारण बन रहा है।
ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ने प्रदेश भर में अवैध तरीके से बत्ती और हूटर लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश जारी किए थे। इसके बावजूद, छतरपुर का परिवहन विभाग अपने ही वरिष्ठ अधिकारियों की गाडिय़ों की जांच करने से परहेज कर रहा है। कानून का पाठ पढ़ाने वाले जिम्मेदार अधिकारी खुद खुलेआम नियमों को तार-तार कर रहे हैं, लेकिन उन पर हाथ डालने वाला कोई नहीं है।
जिले में एक और बड़ा ट्रेंड देखने को मिल रहा है, जहां रसूखदार लोग और कनिष्ठ स्तर के कर्मचारी अपने निजी चौपहिया वाहनों पर फ्लैश लाइट और हूटर फिट कराकर वीआईपी बनने का ढोंग कर रहे हैं। यह सीधे तौर पर मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन है, जिस पर तत्काल जुर्माने और जब्ती की कार्यवाही होनी चाहिए।
फ्लैशर बत्ती और हूटर के प्रयोग के लिए परिवहन विभाग की परमिशन वाहन की विंडस्क्रीन पर चस्पा करना अनिवार्य है। जिले में यदि किसी वाहन पर यह अनुमति नहीं है, तो वह अवैध है। जल्द ही संयुक्त टीम बनाकर ऐसे वाहनों की जांच की जाएगी और कार्यवाही की जाएगी।
मधु सिंह, एआरटीओ, छतरपुर