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MP में फोरलेन सड़क बनाने के नाम पर कटे 1 लाख 41 हजार पेड़, पन्ना टाइगर रिजर्व पर मंडरा रहा खतरा

MP News: बुंदेलखंड में सागर-कानपुर, झांसी-खजुराहो के बाद अब गुलगंज-अमानगंज हाईवे के लिए हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं। 50 साल पुराने वृक्ष जमींदोज हो रहे हैं, जिससे जलवायु और वन्यजीवों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

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massive tree cutting for highway construction in bundelkhand panna tiger reserve in danger mp news

massive tree cutting for highway construction in bundelkhand (फोटो- Freepik)

MP News: बुंदेलखंड में विकास और सुगम यातायात के नाम पर प्रकृति के साथ जो खिलवाड़ हो रहा है, उसके भयावह परिणाम भविष्य में जलसंकट और भीषण गर्मी के रूप में सामने आने वाले हैं। जिले में नेशनल हाईवे और फोरलेन के नाम पर अब तक करीब 1 लाख 41 हजार से अधिक हरे-भरे पेड़ों को काट दिया गया है। वर्तमान में गुलगंज से अमानगंज के बीच बन रहे टू-लेन हाईवे के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) के बफर जोन और किशनगढ़ की घाटी में मशीनों से 50-50 साल पुराने विशालकाय पेड़ों को गिराने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है।

सांठिया घाटी में 25 हजार से ज्यादा पेड़ कटे

सागर-कानपुर फोरलेन निर्माण के दौरान छतरपुर जिले की सीमा में कुल 30607 पेड़ काटे गए है। इसमें सबसे अधिक विनाश हीरापुर के पास स्थित सांठिया घाटी में हुआ है, जहां घने जंगलों के बीच से सड़क निकालने के लिए अकेले एक ही घाटी में 25377 पेड़ काट दिए गए। इसके अलावा बड़ामलहरा और गढ़ीमलहरा क्षेत्र में भी हजारों पेड़ सड़कों की भेंट चढ़ गए। जबकि हाइवे निर्माणाधीन है, आगे भी हजारों-लाखों पेड़ों की बलि चढ़ाई जाएगी।

किशनगढ़ व बिजावर में 16321 पेड़ों की बालि

नेशनल हाईवे-43 पर गुलगंज से अमानगंज तक 111 किलोमीटर लंबा हाईवे दो चरणों में बनाया जा रहा है। इसका पहला फेज गुलगंज से बराना नदी तक और दूसरा फेज अभानगंज तक प्रस्तावित है। इस सड़क को चौड़ा करने की जद में बिजावर और किशनगढ़ के सधन वन क्षेत्र आ रहे हैं। यहां तेंदू, अर्जुन, जामुन, आम और सागौन जैसे बेशकीमती और फलदार पेड़ों को काटा जा रहा है। वन विभाग और पन्ना टाइगर रिजर्व की रेंजों से गुजरने वाले इस मार्ग के लिए अकेले 16321 पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई है, जिससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर भी खतरा मंडराने लगा है।

झांसी-खजुराहो मार्ग पर आज तक नहीं पनपा एक भी पौधा

सड़क निर्माण कंपनियां नियमतः पेड़ कॉटने के बदले वृक्षारोपण का वादा करती हैं, लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके विपरीत है। झांसी-खजुराहो फोरलेन के निर्माण के समय छतरपुर जिले में रिकॉर्ड 95 हजार पेड़ काटे गए थे। अनुबंध के अनुसार पीएनसी कंपनी को हाईवे के दोनों ओर सधन वृक्षारोपण करना था. लेकिन निर्माण पूरा होने के 5 साल बाद भी हाईवे के किनारे एक भी वृक्ष बनकर तैयार नहीं हुआ है। कंपनी द्वारा किए गए दावे केवल कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं।

बदल रही बुंदेलखंड की जलवायु

पर्यावरणविदों का कहना है कि पेड़ों की इस बेतहाशा कटाई (Massive Tree Cutting) का सीधा असर क्षेत्र की जलवायु पर पड़ रहा है। बुंदेलखंड में अब गर्मी के दिनों में तापमान 48 डिग्री के पार पहुंचने लगा है और वर्षा चक्र पूरी तरह अनियमित हो गया है। जंगलों के सफाए से भू-जल स्तर गिर रहा है और मिट्टी का कटाव बढ़ रहा है। यदि विकास के साथ-साथ इन पेड़ों की भरपाई नहीं की गई, तो आने वाली पीढियों के लिए यह इलाका रहने लायक नहीं बचेगा।

मुआवजा राशि का भुगतान कर दिया गया है

सागर-कानपुर फोरलेन निर्माण में काटे गए वृक्षों के एवज में मुआवजा राशि का भुगतान वन विभाग और राजस्व विभाग को कर दिया गया है। झांसी-खजुराहो फोरलेन पर दोनों ओर तार फेंसिंग करा दी गई है, जिससे अब पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।- देवेंद्र चापेकर, पीडी एनएचएआई (MP News)

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