
जनपद पंचायत बिजावर
जनपद पंचायत बिजावर की ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना को पलीता लगाने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। शासकीय राशि का दुरुपयोग करने के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों ने तकनीकी चतुराई का ऐसा सहारा लिया है कि अब खुद मनरेगा पोर्टल ही उनके भ्रष्टाचार की गवाही दे रहा है। 26 ग्राम पंचायतों में फर्जी फोटो अपलोड कर भुगतान कराया जा रहा है, जिससे न केवल सरकारी खजाने को चूना लग रहा है, बल्कि स्थानीय मजदूरों का हक भी छीना जा रहा है।
मनरेगा पोर्टल पर अपलोड मस्टररोल की तस्वीरों ने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। कुछ तस्वीरों में मजदूर एसी के नीचे बैठकर मजदूरी करते नजर आ रहे हैं, जो जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। इतना ही नहीं, मस्टररोल में जिन महिलाओं के नाम दर्ज हैं, पोर्टल पर अपलोड फोटो से वे महिलाएं ही नदारद हैं। गंभीर बात यह है कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की फोटो पोर्टल पर डालकर उन्हें मजदूर दिखाया गया है, जो बाल श्रम के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
जांच में यह भी सामने आया है कि निर्माण कार्य स्थल पर जाकर लाइव फोटो खींचने के बजाय कर्मचारी मोबाइल या वीडियो से पुरानी फोटो की दोबारा फोटो खींचकर पोर्टल पर अपलोड कर रहे हैं। कई पंचायतों में एक ही फोटो को बार-बार अलग-अलग मस्टररोल में इस्तेमाल किया गया है। अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर समीक्षा के दौरान इन स्पष्ट अनियमितताओं को नजरअंदाज कैसे किया गया?
बिजावर की लगभग 26 ग्राम पंचायतों में यह फर्जीवाड़ा चरम पर है। यहां ग्रामीणों को रोजगार देने के नाम पर कागजों और पोर्टल पर झूठे आंकड़े पेश किए जा रहे हैं। स्थानीय मजदूरों का आरोप है कि उन्हें काम नहीं मिल रहा, जबकि मशीनों या फर्जी नामों के जरिए राशि का आहरण किया जा रहा है।
मामला संज्ञान में आया है। पोर्टल पर अपलोड फोटो और मस्टररोल की बारीकी से जांच कराई जाएगी। तथ्यों के आधार पर जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
नमः शिवाय अरजरिया, जिला पंचायत सीईओ, छतरपुर
Published on:
20 Feb 2026 11:00 am
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