छतरपुर

केन-बेतवा लिंक परियोजना: 12 दिनों से जारी चिता आंदोलन हुआ समाप्त, प्रशासन के आश्वासन पर आदिवासियों ने पीछे खींचे कदम

प्रशासन ने अगले 7 दिनों के भीतर सर्वे की प्रक्रिया को दुरुस्त करने का वादा किया है।

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Apr 17, 2026
आंदोलन स्थगित करने की घोषणा करते हुए

केन-बेतवा लिंक परियोजना के डूब क्षेत्र में आ रहे प्रभावितों के हक की लड़ाई अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। पिछले 12 दिनों से अपनी मांगों को लेकर जल सत्याग्रह और चिता आंदोलन कर रहे आदिवासी परिवारों और किसानों ने आज अपना आंदोलन सशर्त समाप्त कर दिया है। पन्ना और छतरपुर जिला प्रशासन के आला अधिकारियों के साथ हुई मैराथन बैठक के बाद यह सहमति बनी। फिलहाल, धरना स्थल से टेंट हटने लगे हैं और किसान अपने गांवों की ओर लौट रहे हैं। हालांकि, क्षेत्र में तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सभी की नजरें अब प्रशासन के उस 7 दिवसीय सर्वे पर टिकी हैं, जो इस पूरी परियोजना और हजारों परिवारों के भविष्य की दिशा तय करेगा।

आंदोलन की मुख्य वजह और मांगें

यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से उचित मुआवजे और सम्मानजनक पुनर्वास की मांग को लेकर था। प्रभावित ग्रामीणों का आरोप था कि सर्वे में भारी विसंगतियां हैं और उन्हें उनकी जमीन व आजीविका के बदले उचित हर्जाना नहीं मिल रहा है। आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कड़ाके की ठंड और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं और बुजुर्ग धरने पर डटे रहे।

प्रशासन का ठोस आश्वासन


बैठक के दौरान प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को भरोसा दिलाया गया कि अब कोई भी विसंगति नहीं रहने दी जाएगी। गांव-गांव जाकर सर्वे किया जाएगा और क्षेत्र के एसडीएम खुद मौके पर जाकर प्रत्येक गांव का दौरा करेंगे। साथ ही निजी स्तर पर जांच की जाएगी। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि वे व्यक्तिगत रूप से सर्वे रिपोर्ट की जांच करेंगे ताकि किसी भी पात्र किसान या आदिवासी का नाम छूटने न पाए। इसके अलावा 7 दिवसीय कार्ययोजना बनाई गई है। प्रशासन ने अगले 7 दिनों के भीतर सर्वे की प्रक्रिया को दुरुस्त करने का वादा किया है।


यह अंत नहीं, केवल विराम है

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे किसान नेता अमित भटनागर ने स्पष्ट किया कि यह जीत नहीं, बल्कि प्रशासन को दिया गया एक मौका है। उन्होंने कहा हमने प्रशासन के भरोसे पर केवल 10 दिनों के लिए आंदोलन स्थगित किया है। यदि 10 दिनों के भीतर हमारी मांगें धरातल पर पूरी नहीं होती हैं, तो हम इससे भी बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष अभिषेक परमार ने भी प्रभावितों के समर्थन में कहा कि युवाओं की टोली आदिवासियों के हक के लिए जमीन पर लड़ती रहेगी और सर्वे की पारदर्शिता पर पैनी नजर रखेगी।

Published on:
17 Apr 2026 10:50 am
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