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केन-बेतवा लिंक परियोजना: विस्थापित ग्राम डुगरिया में ग्रामीणों ने दिखाई सहमति, मुआवजे के बाद स्वेच्छा से हटाए गए 14 मकान

प्रशासन ने स्वयं के खर्च पर बुलडोजर और अन्य संसाधनों की व्यवस्था कराई ताकि उन्हें निर्माण हटाने में कोई असुविधा न हो।

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विस्थापन के लिए मकान गिराते हुए

देश की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत आने वाले डूब क्षेत्र और प्रभावित गांवों में विस्थापन की प्रक्रिया अब धरातल पर दिखने लगी है। इसी क्रम में विस्थापित ग्राम डुगरिया में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यवाही संपन्न हुई। यहां खास बात यह रही कि विस्थापन को लेकर ग्रामीणों और प्रशासन के बीच किसी टकराव के बजाय सहयोग का माहौल दिखा। नियमानुसार मुआवजा राशि प्राप्त करने के बाद ग्रामीणों की सहमति से कुल 14 मकानों को हटाने की प्रक्रिया पूरी की गई।

ग्रामीणों का सहयोग- 5 लोगों ने खुद आगे बढकऱ हटवाए मकान

विस्थापन की इस प्रक्रिया में ग्रामीणों का सकारात्मक रुख देखने को मिला। 5 ग्रामीणों ने पूरी तरह अपनी स्वेच्छा से मकान हटाने की सहमति दी। इन ग्रामीणों की इच्छा का सम्मान करते हुए प्रशासन ने स्वयं के खर्च पर बुलडोजर और अन्य संसाधनों की व्यवस्था कराई ताकि उन्हें निर्माण हटाने में कोई असुविधा न हो। इसके अलावा 9 अन्य मकान वे हटाए गए जिनके मालिकों के पास गांव में वैकल्पिक घर उपलब्ध थे या जिन्होंने अन्य स्थानों पर अपना स्थायी निवास पहले ही तैयार कर लिया था।

संवेदनशीलता- शादियों और एकल आवासों को मिली राहत

प्रशासनिक टीम ने मौके पर स्थिति का आकलन करते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया। कार्यवाही के दौरान उन मकानों को पूरी तरह छुआ तक नहीं गया जहां वर्तमान में विवाह या अन्य कोई सामाजिक मांगलिक कार्यक्रम तय हैं। जिन परिवारों के पास रहने के लिए गांव में मात्र एक ही घर है और उन्होंने अब तक कहीं और रहने का विकल्प तैयार नहीं किया है। प्रशासन का स्पष्ट उद्देश्य रहा कि विकास की इस गति में किसी भी परिवार को बिना किसी ठोस व्यवस्था के खुले आसमान के नीचे न आना पड़े।

विकास और विश्वास का समन्वय

केन-बेतवा लिंक परियोजना जैसे बड़े प्रोजेक्ट में विस्थापन अक्सर एक चुनौती होता है, लेकिन डुगरिया में ग्रामीणों ने आपसी समझ और विकास के प्रति अपनी सहमति दर्ज कराई है। मुआवजा मिलने के बाद ग्रामीण अब नए परिवेश में बसने की तैयारी कर रहे हैं। प्रशासन और विस्थापितों के बीच बना यह आपसी विश्वास न केवल इस परियोजना को समय पर पूरा करने में सहायक होगा, बल्कि अन्य प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी एक उदाहरण पेश करेगा। इस कार्यवाही के दौरान प्रशासनिक अधिकारी, राजस्व विभाग की टीम और स्थानीय पुलिस बल मौजूद रहा, जिन्होंने ग्रामीणों से संवाद करते हुए पूरी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया।

वीडियो जारी कर जताया विरोध

केन-बेतवा लिंक परियोजना में आदिवासियों के विस्थापन को लेकर विरोध कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है। जिसमें उन्होंने पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर एरिया को दिखाते हुए प्राकृतिक सुंदरता की बात कही है। अमित ने कहा कि फर्जी ग्राम सभाओं के माध्यम से आदिवासियों के अस्तित्व को खत्म किया जा रहा है। बुंदेलखंड की रीढ़ की हड्डी कही जाने वाली केन नदी को प्रशासन नहर में तब्दील कर रहा है। कई लाख पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है। वहीं आदिवासियों के 24 गांवों को विस्थापित किया गया है। अमित भटनागर ने वीडियो के माध्यम से बताया कि उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा, वे तब तक आंदोलन करेंगे जब तक आदिवासियों को उनका हक नहीं मिल जाता।

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