बैठक का मुख्य उद्देश्य विस्थापित होने वाले ग्रामीणों की समस्याओं को सुनना और मुआवजे से जुड़ी विसंगतियों को दूर करना था।
बुंदेलखंड की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित होने वाले परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे की गुत्थी सुलझाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। पर्यटन नगरी खजुराहो के होटल क्लार्क में कलेक्टर पार्थ जैसवाल के निर्देशन में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विस्थापित होने वाले ग्रामीणों की समस्याओं को सुनना और मुआवजे से जुड़ी विसंगतियों को दूर करना था।
बैठक में जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया और केन-बेतवा लिंक परियोजना के वरिष्ठ अधिकारी नवीन गौर मुख्य रूप से उपस्थित रहे। प्रशासन और परियोजना अधिकारियों ने रूंझ-मझगांय क्षेत्र से आए विस्थापितों के प्रतिनिधियों के साथ आमने-सामने बैठकर चर्चा की। बैठक का माहौल सौहार्दपूर्ण रहा, जहां अधिकारियों ने ग्रामीणों के पक्ष को बिना किसी दबाव के विस्तार से सुना।
मुआवजे में 100% बढ़ोतरी का प्रस्तावबैठक के दौरान विस्थापित किसानों और प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों को लेकर एक स्पष्ट रुख अपनाया। ग्रामीणों ने प्रमुख रूप से निम्नलिखित प्रस्ताव शासन के समक्ष रखे।
ग्रामीणों ने मांग की कि वर्तमान में दी जाने वाली 12.5 लाख रुपए की मुआवजा राशि आज की महंगाई और विस्थापन के कष्ट को देखते हुए पर्याप्त नहीं है। इसे बढ़ाकर 25 लाख रुपए किया जाना चाहिए।
वर्तमान में पात्रता निर्धारण के लिए दो अलग-अलग कट-ऑफ तिथियां (निजी और आबादी) हैं। प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि इसे सरल और एकीकृत करते हुए 1 अप्रेल 2026 की नई कट-ऑफ तिथि निर्धारित की जाए, ताकि अधिक से अधिक पात्र लोगों को लाभ मिल सके।
विस्थापितों ने पुरजोर तरीके से कहा कि उन्हें केवल नकद राशि न दी जाए, बल्कि गांव के बदले गांव बसाने की नीति पर काम हो, ताकि उनका सामाजिक ढांचा और सामुदायिक जीवन सुरक्षित रहे।
ग्रामीणों की दलीलों को सुनने के बाद जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया और परियोजना अधिकारी नवीन गौर ने आश्वासन दिया कि स्थानीय स्तर पर प्रशासन विस्थापितों के हितों के प्रति संवेदनशील है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मुआवजे की राशि बढ़ाने और कट-ऑफ डेट में बदलाव जैसे नीतिगत निर्णय राज्य और केंद्र सरकार के स्तर पर होते हैं। इसलिए, बैठक में प्राप्त सभी सुझावों और मांगों को विस्तृत रिपोर्ट के साथ उच्च स्तरीय अधिकारियों और संबंधित मंत्रालयों को भेजा जाएगा।
प्रशासन ने प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि भविष्य में भी इस तरह के संवाद जारी रहेंगे ताकि परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान किसी भी ग्रामीण को अन्याय का सामना न करना पड़े। बैठक में रूंझ-मझगांय और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों के दर्जनों प्रतिनिधि शामिल हुए, जिन्होंने शासन की इस पहल का स्वागत किया।