
Land Registry Fraud- मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में करोड़ों रूपयों की जालसाजी का मामला सामने आया है। सरकारी दावों और पहचान सत्यापन के कड़े नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए उप पंजीयक कार्यालय नौगांव से जालसाजी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। मामला सीधे तौर पर सरकारी सिस्टम की मिलीभगत या फिर घोर लापरवाही की ओर इशारा कर रहा है, जहां दस्तावेजों में खुलेआम हेरफेर करके एक महिला की करोड़ों रुपये की कीमती कृषि भूमि की तीन अलग-अलग रजिस्ट्रियां दूसरे के नाम दर्ज करा दी गईं। इस पूरे फर्जीवाड़े के खिलाफ अब पीड़िता सरोज राजपूत निवासी महोबा, उत्तर प्रदेश ने हरपालपुर थाने में लिखित शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने की गुहार लगाई है।
शुरुआती जांच और शिकायत के मुताबिक, इस पूरे खेल की पटकथा आधार कार्ड से शुरू हुई। सबसे पहले सुनीता नाम की एक महिला के आधार कार्ड (Fake Aadhaar card) में नाम बदलकर सरोज देवी उर्फ सुनीता किया गया। इस नाम बदलाव के लिए ग्राम पंचायत रानीपुरा के सरपंच और सचिव द्वारा जारी प्रमाण पत्र का इस्तेमाल हथियार के रूप में किया गया। बाद में इसी संदिग्ध आधार कार्ड को असली जमीन मालिक की पहचान के रूप में उप पंजीयक कार्यालय में पेश कर दिया गया और करोड़ों की जमीन का सौदा कागजों पर निपटा दिया गया।
जालसाजी की हद देखिए असली जमीन मालिक सरोज राजपूत के पति का नाम बलराम राजपूत है, जबकि रजिस्ट्री के खेल में जिस फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल हुआ, उसमें पति की जगह ओमप्रकाश राजपूत दर्ज है। नाम और पति का नाम अलग होने के बावजूद नौगांव रजिस्ट्री कार्यालय के जिम्मेदारों ने आंखें मूंदकर इस फाइल को हरी झंडी दे दी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि रजिस्ट्री बाबू और उप पंजीयक ने इस खुले अंतर को नजरअंदाज कैसे किया? क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर कोई गहरा गिरोह काम कर रहा है?
इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा मोड़ सेवा प्रदाता अशोक राजपूत से जुड़ा है, जिसके जरिए इन सभी रजिस्ट्रियों की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। दिलचस्प बात यह है कि पहली रजिस्ट्री में जो तीन महिलाएं खरीदार बनीं, उनमें से एक तारा राजपूत खुद इसी सेवा प्रदाता अशोक राजपूत की पत्नी हैं। रजिस्ट्री कराने वाले शख्स की पत्नी का ही खरीदार के रूप में सामने आना इस पूरे मामले को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा करता है। अब देखना यह है कि पुलिस और जांच एजेंसियां इस रसूखदार गिरोह पर कब और क्या कार्रवाई करती हैं।
पुलिस कर रही जांच
हरपालपुर थाना पुलिस ने शिकायतकर्ता के आवेदन और दस्तावेजों को संज्ञान में लेते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। पड़ताल में यह साफ है कि यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल फर्जी रजिस्ट्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पहचान सत्यापन, आधार दस्तावेजों में अवैध परिवर्तन और रजिस्ट्री प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा और इस बड़े नेटवर्क से जुड़े कई लोगों की गिरफ्तारियां हो सकती हैं।