एग्रीकल्चर और एमबीए जैसे प्रोफेशनल कोर्स तो शुरू कर दिए, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी इनके लिए बुनियादी ढांचा तक खड़ा नहीं किया जा सका है।
महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में प्रबंधन की घोर लापरवाही के कारण हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संकट में है। विश्वविद्यालय ने भारी-भरकम फीस वाले एग्रीकल्चर और एमबीए जैसे प्रोफेशनल कोर्स तो शुरू कर दिए, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी इनके लिए बुनियादी ढांचा तक खड़ा नहीं किया जा सका है। आलम यह है कि एग्रीकल्चर विभाग में जरूरी 8 लैब में से एक भी मौजूद नहीं है, वहीं एमबीए के छात्रों के पास अपनी कंप्यूटर लैब तक नहीं है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कड़े नियमों के बावजूद, विवि का कृषि विभाग बिना किसी प्रोफेसर और प्रयोगशाला के संचालित हो रहा है। छात्र प्रिंस दीक्षित, स्वयं सिंह और सत्यम यादव ने आरोप लगाया कि सीटों की संख्या बढ़ाकर 240 तो कर दी गई, लेकिन पढ़ाने के लिए स्थाई फैकल्टी नहीं है। मृदा विज्ञान, एग्रोनोमी, बागवानी, कीट विज्ञान, पादप रोग विज्ञान, आनुवंशिकी, पादप प्रजनन और कृषि सूक्ष्म जीव विज्ञान जैसी अनिवार्य प्रयोगशालाओं का कहीं नामोनिशान नहीं है।
नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों ने कौशल विकास के लिए योगा, एनएसएस , व्यक्तित्व विकास और डिजिटल जागरूकता जैसे विषय चुने थे। बीए प्रथम वर्ष के छात्र दीपक प्रजापति और अजय कुमार अहिरवार का कहना है कि पूरे सत्र में इन विषयों की एक भी कक्षा नहीं लगी। बिना मार्गदर्शन और अध्ययन सामग्री के छात्रों को सीधे परीक्षा में बैठा दिया गया, जिससे फेल होने का डर बना हुआ है। पिछले साल भी इसी अव्यवस्था के चलते 80 फीसदी छात्र एटीकेटी और फेल की श्रेणी में आए थे।
बीएससी फोरेंसिक साइंस के छात्र हर्षराज ने बताया कि जंतु विज्ञान जैसे प्रायोगिक विषय की कक्षाएं पूरे साल में महज 2-4 दिन लगीं। लैब न होने से छात्र यह भी नहीं जानते कि प्रैक्टिकल कैसे होते हैं। प्रायोगिक परीक्षा में उनसे ऐसे सवाल पूछे गए जो पाठ्यक्रम में कभी छुए तक नहीं गए। छात्रों ने मांग की है कि या तो नियमित योग्य प्राध्यापक नियुक्त किए जाएं या फिर इन अव्यवस्थित परीक्षाओं को निरस्त कर दोबारा आयोजित किया जाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलसचिव यशवंत सिंह पटेल का कहना है कि उन्होंने कक्षाओं की व्यवस्था की थी, संभव है कि छात्र न पहुंचे हों। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि लैब स्थापना की प्रक्रिया अब शुरू की गई है और कुछ उपकरण आ चुके हैं। विवि का दावा है कि वे परीक्षा परिणाम सुधारने पर विशेष फोकस कर रहे हैं।