प्रशासन का मुख्य उद्देश्य इन ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट होने से बचाना और उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है।
जिले की ऐतिहासिक विरासत और सदियों पुराने दुर्लभ ज्ञान को सहेजने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ी कार्ययोजना तैयार की है। ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत जिले में बिखरी पड़ी उन पुरानी और बहुमूल्य पांडुलिपियों को खोजा जाएगा, जो वर्तमान में विभिन्न मंदिरों, मठों, पुराने साहित्यकारों और निजी घरों में संरक्षित हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य इन ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट होने से बचाना और उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है।
प्राचीन ज्ञान जैसे इतिहास, आयुर्वेद, विज्ञान, और गणित को सुरक्षित रखने के लिए एक विशेष कमेटी बनाई गई है, जिसके अध्यक्ष कलेक्टर पार्थ जैसवाल हैं। इस कमेटी में जिला पंचायत सीईओ, महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार, नगरपालिका सीएमओ और जिला नोडल अधिकारी जैसे प्रमुख सदस्यों को शामिल किया गया है। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिले के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी इन पांडुलिपियों के संग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
ज्ञान भारतम मिशन के तहत संकलित की जाने वाली इन पांडुलिपियों को भारत सरकार के कृति संपदा नामक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाएगा। इस मिशन का लक्ष्य वर्ष 2031 तक देशभर की एक करोड़ से अधिक पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में लाना है। सरकार की यह दूरगामी योजना वर्ष 2047 तक भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाने के लिए तैयार की गई है।
प्रशासन ने नागरिकों से आग्रह किया है कि यदि उनके पास या उनके पूर्वजों की ऐसी कोई भी ऐतिहासिक धरोहर या हस्तलिखित पांडुलिपि उपलब्ध है, तो वे उसे मिशन टीम के साथ साझा करें। इससे उन दस्तावेजों को वैज्ञानिक पद्धति से सुरक्षित किया जा सकेगा और भविष्य की पीढिय़ों के लिए इस अनमोल ज्ञान को बचाया जा सकेगा। कोई भी व्यक्ति अपने पास उपलब्ध ग्रंथों की जानकारी प्रशासन को देकर इस राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा बन सकता है।