MP News: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में पोती के जन्म पर दादी ने अस्पताल के साथ बांटी खुशियां, प्रदेश के साथ ही देश को भी दिया बड़ा सामाजिक संदेश
MP News: समाज में आज भी ऐसे लोग है, जो बेटियों को बोझ मानते हैं। इसी का परिणाम है कि आज भी नवजात बेटियां कभी झाड़ियों में तो कभी किसी सन्नाटे में रोती-बिलखती मिलती हैं। दूसरी तरफ बेटी को जन्म देने वाली मां को जिंदगी भर बेटे का ताना सुनना पड़ता है। लेकिन इस सामाजिक क्रूरता के बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो बेटी का होना सौभाग्य मानते हैं।
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के जिला अस्पताल में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां बेटी के जन्म की खुशी में दादी ने सामाजिक संदेश देते हुए ऐसी मनाईं की परिवार तो परिवार पूरे अस्पताल में जश्न का माहौल हो गया। सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. पुष्पा शशि सिंह के घर पोती के रूप में बेटी का आगमन हुआ, उन्होंने इस अवसर पर अस्पताल की सुविधाओं का ख्याल रखते हुए टीवी गिफ्ट किया और स्टाफ के साथ भी खुशियां बांटीं।
डॉ. पुष्पा शशि सिंह के बेटे प्रत्यूष विक्रम और बहू अवंतिका सिंह को बेटी हुई। इस पर परिवार ने खुशी का इजहार करते हुए एनआईसीयू वार्ड में खुशी का माहौल बना दिया। एनआईसीयू को एक स्मार्ट टीवी उपहार में दे दिया। अब टीवी का उपयोग वार्ड में लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से नवजात शिशुओं की मॉनिटरिंग के लिए किया जाएगा।
डॉ. पुष्पा शशि सिंह ने कहा कि बेटियों की सामाजिक पहचान हमारे लिए गौरव का विषय है। उनके आगमन पर इस तरह का योगदान देना परिवार के लिए परम संतोष की बात है।
खुशी के इस अवसर पर डॉ. सिंह ने अस्पताल में सेवाएं दे रहीं 32 नर्सों के साथ ही वहां कार्यरत अन्य महिला कर्मचारियों को साड़ियां-मिठाइयां भेंट देकर उनका सम्मान किया। इस दौरान डॉ. सिंह ने कहा कि यह स्टाफ दिन-रात पूरी निष्ठा के साथ नवजात शिशुओं की सेवा में जुटा रहता है, इसलिए उनके घर आई नन्ही परी के स्वागत का जश्न इन सेवाभावी कर्मचारियों के बिना अधूरा है।
बेटी के जन्म पर परिवार ने वार्ड की सुविधाओं के साथ ही स्वच्छता और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अस्पताल को एक जूता स्टैंड भी उपलब्ध कराया है।
बताते चलें कि अब बेटी के जन्म के बाद खुशियों के ऐसे यादगर पल नजर आना आम हो चला है। लेकिन अब भी एक बड़ा तबका ऐसा है जो बेटियों के आने पर स्वागत करने के बजाय उसे स्वीकार तक नहीं करते। ऐसे लोगों के लिए ये मामले बड़े प्रेरणा देने वाले साबित हो सकते हैं। जागरुकता के लिए ये सामाजिक पहल का महत्व और बढ़ जाता है।