
छतरपुर. अंग्रेजों ने दिसम्बर 1841 में बेलाताल महाराज पारीक्षत को हराने के लिए नौगांव नगर की स्थापना की थी। इसके बाद 20 साल यानि वर्ष 1842 से 1862 तक नौगांव नगर का मास्टर प्लान के तहत निर्माण हुआ। नगर का प्रथम शिलालेख वर्तमान जीटीसी स्कूल स्थित धूप घड़ी में हैं। जिसमें नौगांव सेंटर इंडिया 1862 लिखा हुआ हैं। दूसरा शिलालेख धोर्रा रोड पर है। जबकि तीसरा शिलालेख इंग्लिश चर्च व भंडार पुल पर हैं। चौथा शिलालेख सर्किट हाउस व सिटी चर्च में हैं जिसमे 1874,1889,1905 लेख हैं। पांचवा शिलालेख टीवी अस्पताल में स्थित पानी की टंकी जो अलिपुरा राजा हरपाल सिंह व पन्ना राजा द्वारा बनबाई गई थी, जिसमें 1935 का लेख हैं।
बंगला नंबर ४३ का इतिहास
इसके अलावा भी अनेक ऐसे शिलालेख हंै जो कि नौगांव का गौरवशाली इतिहास बयां करते हैं। नौगांव नगर मे बंगला नम्बर 43 आज भी मौजूद है, जिसमें पॉलीटिकल एजेंट का निवास व कार्यालय हुआ करता था। नौगांव नगर एक छोटा नगर होने के बावजूद सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण रहा हैं। यह लगभग 290 चौराहों के लिए मशहूर हैं। यहां पर 36 रियासतों के नियंत्रणकर्ता पॉलीटिकल एजेंट का निवास रहा हैं। इनके कार्यालय में यूनियन जैक झंडे को अधिकतम ऊंचाई पर फहराने के लिए जीटीसी स्कूल के भवन पर पहुंचने के लिए सीढ़ी बनाई गई थी, जो आज भी देखी जा सकती हैं।
६०० रियासतों का कराया था विलय
15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ, इसके बाद भारत सरकार के गृह मंत्री सरदार बल्भ भाई पटेल के नेतृत्व में लगभग 600 रियासतों का विलय करवाया गया। मंत्री के निज सचिव ने नौगांव और 36 रियासतों के राजाओं से पन्ना हाउस बंगला नंबर 51 में बैठक कर सभी राजाओं से प्रण पत्र पर हस्ताक्षर करवाए। प्रण पत्र पर हस्ताक्षर करते समय चूनागण, हैदराबाद, जम्मू कश्मीर व भोपाल के राजाओं ने आना-कानी की तो कोनिया व महेर के राजाओं ने भी उनका साथ दिया। हालांकि, बाद में सभी ने प्रणपत्र में हस्ताक्षर किए थे। 1947 से अप्रेल 1948 तक नौगांव विंध्यप्रदेश की राजधानी रहा। जिसके मुख्यमंत्री कामता प्रसाद सक्सेना रहे और मंत्रियों में महेंद्र मानव लालाराम वाजपेयी चतुर्भुज पाठक रहे। राजधानी के समय विधानसभा व सचिवालय प्राइमरी स्कूल में हुआ करता था। अप्रेल 1948 से 01 नवम्बर 1956 तक नौगांव कमिश्नरी रहा उस समय मध्यप्रदेश की स्थापना हुई और नौगांव सब तहसील बना 1995 के आसपास नौगांव को तहसील का दर्जा प्राप्त हुआ, तब से लेकर आज तक लगातार नौगांव विकास की मुख्य धारा से जुड़कर निरंतर विकास की अग्रसर हैं और समय के साथ वर्तमान में नगरपालिका का दर्जा प्राप्त हैं।
भवानी सिंह जू-देव के नाम से था नगर का नाम
1952 में जगनाथ सुनार के नाम मकान की स्वीकृति व 54 में बलभद्र पुस्तकालय की स्वीकृति उस समय के नगरपालिका लेटर हेड पर हैं, जिसमें नौगांव भवानी गंज लिखा हुआ हैं। नगर के इतिहासकार दिनेश सेन ने बताया कि 36 रियासतों पर नियंत्रण रखने के लिए 1842 में 36 रियासतों के प्रतिनिधियों के लिए 36 हाउस व अंग्रेजी अधिकारियों के लिए 36 बंगलों का निर्माण कराया गया था, जिनमें काफी हद तक हाउसों और बंगलों का विलय हो गया हैं और कुछ बंगले जर्जर स्थिति में हंै तो कुछ बंगलों में सरकारी दफ्तर संचालित हो रहे हैं।