पंजीयन में देरी और फॉलोअप की कमी पाई गई है, जिससे मातृ मृत्यु दर पर प्रतिकूल असर पड़ा है। विशेष रूप से कंचन अहिरवार केस की समीक्षा में गर्भवती महिलाओं की निगरानी और उपचार में कमियां मिलीं।
कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में मातृ मृत्यु दर और एनसीडी (गैर-संचारी रोग) स्क्रीनिंग में पाई गई लापरवाही पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने संबंधित आशा, एएनएम और डॉक्टरों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
बैठक में कलेक्टर ने समीक्षा करते हुए बताया कि कुछ मामलों में पंजीयन में देरी और फॉलोअप की कमी पाई गई है, जिससे मातृ मृत्यु दर पर प्रतिकूल असर पड़ा है। विशेष रूप से कंचन अहिरवार केस की समीक्षा में गर्भवती महिलाओं की निगरानी और उपचार में कमियां मिलीं। इसके चलते संबंधित आशा एवं एएनएम उमा राजपूत, पीएचसी देवरा की डॉ. नीलम गुप्ता और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिजावर की डॉ. अंकिता दीक्षित को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में बेड ऑक्युपेंसी और उपचार दर बढ़ाई जाए। उन्होंने हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान और एनीमिया प्रबंधन की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी उप-स्वास्थ्य केंद्रों पर आयरन सुक्रोज और एफसीएम इंजेक्शन उपलब्ध हों।
एनसीडी स्क्रीनिंग में मॉनिटरिंग की कमी पाए जाने पर सीपीएचसी कंसल्टेंट को शोकॉज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। टीबी स्क्रीनिंग कम होने पर गौरिहार, लवकुशनगर और ईशानगर के बीएमओ की वेतन कटौती का भी आदेश दिया गया। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यदि आगे स्क्रीनिंग और मॉनिटरिंग में सुधार नहीं हुआ तो निलंबन का प्रस्ताव भेजा जाएगा।बैठक में जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया, सीएमएचओ डॉ. आरपी गुप्ता, सिविल सर्जन शरद चौरसिया, डीपीएम एनएच, जिले के सभी बीएमओ, बीपीएम और बीसीएम उपस्थित रहे। कलेक्टर ने स्वास्थ्य अधिकारियों को आवश्यक ब्लॉकों में मोबाइल मेडिकल यूनिट से टीबी मरीजों के एक्स-रे कराने, फूड बास्केट वितरण और एएनसी चेकअप बढ़ाने के भी निर्देश दिए।