दुकानदार, बिल्डर, एलआईसी या किसी भी तरह की कंपनी हो, फोरम का आदेश होने के बावजूद लोगों को क्षतिपूर्ति, मुआवजा, सामान या किसी भी तरह की राहत नहीं दे रही है। इस वजह से लोगों को दोबारा उपभोक्ता फोरम जाकर अपील करनी पड़ रही
लोगों को जिला और राज्य उपभोक्ता फोरम में अपने अधिकारों के लिए वर्षों कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है। मुश्किलें उस समय और बढ़ जाती हैं जब फोरम का आदेश होने के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिलती। दुकानदार, बिल्डर, एलआईसी या किसी भी तरह की कंपनी हो, फोरम का आदेश होने के बावजूद लोगों को क्षतिपूर्ति, मुआवजा, सामान या किसी भी तरह की राहत नहीं दे रही है। इस वजह से लोगों को दोबारा उपभोक्ता फोरम जाकर अपील करनी पड़ रही है कि आदेश होने के बावजूद उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। शहर और जिले में ऐसे दर्जनों केस हैं जिनमें फोरम का आदेश जारी होने के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिली है। चौंकाने वाली बात यह है कि फोरम द्वारा ऐसे लोगों पर सख्ती भी नहीं की जा रही है। केवल मामले की सुनवाई जारी है और तारीख दी जा रही है।
उपभोक्ता फोरम के नियमों के अनुसार जो भी मामले आते हैं, उन्हें 90 दिन में निपटाना होता है। 3 माह में हर हाल में सुनवाई पूरी कर फैसला देना होता है। लेकिन लोगों के मामले 3-3 साल तक लंबित हो रहे हैं। लोग कई साल तक फोरम के चक्कर काटते रहते हैं। जब उनके पक्ष में आदेश आ भी जाता है, तो सामने वाला पक्ष उन्हें समय पर पैसे या राहत नहीं देता है। इस वजह से लोगों को पैसा पाने के लिए फिर से फोरम में आवेदन देना पड़ रहा है और फोरम के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अभी जिले में हर महीने 10 से ज्यादा मामले केवल पैसे पाने के लिए ही आ रहे हैं। वहीं एक साल में ऐसे करीब 214 केस हैं, जिन पर आदेश होने के बावजूद लोगों को राहत नहीं मिली।
मिली जानकारी के अनुसार जिला आयोग में नौगांव और छतरपुर के केस सबसे अधिक लंबित हैं। यहां के करीब 85 केस निष्पादन के लिए पेंडिंग हैं। इन प्रकरणों में फोरम पहले ही फैसला दे चुका है, लेकिन उनके आदेश का पालन नहीं किया गया। इसके बाद गौरिहार के 08, बड़ामलहरा के 05, बमीठा 07 और खजुराहो के 13 केस लंबित हैं।
चौका के एक बुजुर्ग ने अपनी कार के क्लेम के लिए 5 साल केस लड़ा। कोर्ट ने सितंबर 2025 में कंपनी को दो लाख रुपए देने का आदेश दिया। आदेश के 8 महीने बाद भी कंपनी ने भुगतान नहीं किया। अब बुजुर्ग रकम पाने के लिए फोरम के फिर से चक्कर काट रहे हैं।
बेनीगंज मोहल्ला निवासी रामकुमार कुशवाहा ने 2024 में फ्लैट बुकिंग के लिए राशि दी थी। पजेशन न मिलने पर 2025 में परिवाद दायर किया। सितंबर 2025 में आदेश हुआ कि 12 प्रतिशत ब्याज के साथ राशि लौटाई जाए, लेकिन बिल्डर ने अभी तक उन्हें पैसे नहीं दिए।
उपभोक्ता फोरम में आदेश पारित होने के बाद विपक्षी पार्टी को अपील की अवधि में जुर्माना देना होता है। यदि वे नियत समय में जुर्माना नहीं देते, तो परिवादी उनके खिलाफ फोरम में निष्पादन आवेदन लगाता है। इसके बाद जमानती वारंट और उसका जवाब न देने पर गिरफ्तारी वारंट जारी होता है। फोरम के आदेश के बाद भी रकम न देने पर 3 साल की सजा का प्रावधान भी है।
आशीष शुक्ला, फोरम मामलों के सेवानिवृत्त अधिवक्ता