छतरपुर

6.30 करोड़ का बजट, मई में वर्क ऑर्डर, जून में डामर का टोटा! छतरपुर में पन्ना रोड सडक़ निर्माण के नाम पर अब पैचवर्क का खेल, पहली ही बारिश में बह जाएंगे सरकारी दावों के लाखों रुपए

जून का महीना आधा बीत जाने के बाद भी धरातल पर काम का एक पत्थर तक नहीं हिला है। अब बहाना बनाया जा रहा है कि मथुरा रिफाइनरी से डामर नहीं मिल रहा है, इसलिए मुख्य निर्माण कार्य बारिश के बाद ही शुरू हो पाएगा।
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Updated: 20 Jun 2026, 10:43 AM IST
panna road
पन्ना रोड

जब बजट करोड़ों का हो, टेंडर हो चुका हो और वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिया गया हो, तब भी यदि जनता को गड्ढों से भरी जानलेवा सडक़ पर सफर करना पड़े, तो इसे प्रशासनिक ढीठता नहीं तो और क्या कहेंगे? छतरपुर शहर की सबसे व्यस्ततम और लाइफलाइन मानी जाने वाली ट्रांसपोर्ट नगर से पन्ना नाका (पन्ना रोड) तक की सडक़ आज सिस्टम की इसी घोर लापरवाही का शिकार है। लोक निर्माण विभाग द्वारा इस मार्ग के कायाकल्प के लिए 6.30 करोड़ की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है। मई के महीने में ही काम शुरू करने का वर्क ऑर्डर भी थमा दिया गया था। लेकिन जून का महीना आधा बीत जाने के बाद भी धरातल पर काम का एक पत्थर तक नहीं हिला है। अब बहाना बनाया जा रहा है कि मथुरा रिफाइनरी से डामर नहीं मिल रहा है, इसलिए मुख्य निर्माण कार्य बारिश के बाद ही शुरू हो पाएगा।

जनता की आँखों में धूल झोंकने के लिए पैचवर्क का पुराना खेल

मई में वर्क ऑर्डर मिलने के बाद ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते डामर का इंतजाम क्यों नहीं किया, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। अब जब मानसून सिर पर खड़ा है और आसमान से कभी भी आफत बरस सकती है, तो जनता के भारी आक्रोश को दबाने के लिए विभाग ने अपना पुराना और घिसा-पिटा पैचवर्क का फॉर्मूला निकाल लिया है। स्थानीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि यह पैचवर्क कुछ और नहीं, बल्कि सरकारी धन की खुली बर्बादी और लीपापोती का खेल है। सब जानते हैं कि पहली ही तेज बारिश में यह पैचवर्क ताश के पत्तों की तरह बह जाएगा और जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई के लाखों रुपए सीधे नाली में चले जाएंगे।

जवाहर मार्ग की स्थिति बदतर, रोज हो रहे हादसे

इस मार्ग के अंतर्गत आने वाले जवाहर मार्ग की हालत इस समय सबसे ज्यादा डरावनी हो चुकी है। यह सडक़ पूरी तरह से गडढों में तब्दील हो चुकी है। 24 घंटे भारी वाहनों, यात्री बसों और वीआईपी गाडिय़ों की रेलमपेल वाले इस मार्ग पर वाहन चालकों का संतुलन बिगडऩा आम बात हो गई है। दोपहिया वाहन चालक आए दिन इन गहरे गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। राहगीरों का पैदल चलना भी किसी खतरे से खाली नहीं है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि अगर विभाग को पैचवर्क ही करना था, तो करोड़ों के टेंडर का ढिंढोरा क्यों पीटा गया?

जनता का सवाल- आखिर कब तक चलेगा बहानों का दौर?

शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि हर बार बारिश से ठीक पहले डामर का टोटा होना या तकनीकी दिक्कतों का बहाना बनाना लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मई में राशि जमा होने के बाद भी डामर न मिलना ठेकेदार की लापरवाही को दर्शाता है, जिस पर विभाग मेहरबान बना हुआ है। अब देखना यह है कि क्या इस बार का पैचवर्क पहली बारिश की बौछारें झेल पाता है, या फिर हर साल की तरह इस बार भी लाखों रुपए पानी में बह जाते हैं।

नाली निर्माण के फेर में उलझा 1200 मीटर का ड्रेनेज सिस्टम

सडक़ निर्माण में आ रही देरी और इसके बार-बार टूटने के पीछे एक और बड़ी तकनीकी लापरवाही सामने आई है। बस स्टैंड से लेकर चौबे तिगड्डा तक के लगभग 1200 मीटर के दायरे में पानी की निकासी के लिए पक्की नालियों का निर्माण बेहद जरूरी है। कॉलोनियों का गंदा पानी सडक़ पर बहने के कारण डामर टिक ही नहीं पाता। लोक निर्माण विभाग का कहना है कि नाली निर्माण के लिए नगर पालिका से पत्राचार किया गया है। लेकिन सच्चाई यह है कि दो सरकारी विभागों की आपसी खींचतान और तालमेल की कमी का खामियाजा शहर की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

हर साल होता है डामरीकरण

यह समस्या नई नहीं है। वर्ष 2022 में भी 5 करोड़ की लागत से किए गए डामरीकरण का यही हाल हुआ था। जुलाई 2022 में जवाहर रोड पर हुआ डामरीकरण महज 5 दिन में उखड़ गया था। तब भी मामला सामने आने पर पीडब्ल्यूडी ने ठेकेदार से मरम्मत कराई थी, लेकिन यह भी ज्यादा समय तक नहीं चला। वर्ष 2023, 2024 में भी बारिश के बाद सडक़ का डामरीकरण कराना पड़ा। इसी तरह 2025 में अगस्त में कांक्रीट से सडक़ के गड्ढे भरने पड़े थे। अब यही हालात इस साल भी बन रहे हैं।

पीडब्ल्यूडी विभाग का पक्ष

ट्रांसपोर्ट नगर से पन्ना रोड तक सडक़ निर्माण का ठेका फाइनल हो चुका है। ठेकेदार को डामर नहीं मिल पाने के कारण मुख्य कार्य रुका हुआ है। बारिश के मौसम में लोगों को ज्यादा परेशानी न हो, इसलिए फिलहाल पैचवर्क कराकर गड्ढों को भरा जाएगा।

आशीष भारती, कार्यपालन यंत्री, पीडब्ल्यूडी

Updated on:
20 Jun 2026, 10:43 AM IST
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