छतरपुर

केमिकल ट्रीटमेंट से सब्जियों और फलों का चमकाना, स्वास्थ्य पर डाल रहा है गंभीर असर

केमिकल से धुली सब्जियां और फल दिखने में आकर्षक और ताजगी से भरपूर प्रतीत होती हैं, लेकिन घर लाने के कुछ घंटों बाद ये जल्दी ही खराब होने लगते हैं।

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Mar 18, 2025
सब्जी को ताजा बनाने के लिए स्पे करते हुए कैरीकेचर

जिले में सब्जियों और फलों को ताजा और चमकदार बनाने के लिए केमिकल ट्रीटमेंट किया जा रहा है। हालांकि, यह केमिकल से धुली सब्जियां और फल दिखने में आकर्षक और ताजगी से भरपूर प्रतीत होती हैं, लेकिन घर लाने के कुछ घंटों बाद ये जल्दी ही खराब होने लगते हैं। इसके अलावा, इनका सेवन करने से एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है और यह किडनी व लिवर की जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकता है।

केमिकल से उत्पन्न हो रही ये गंभीर बीमारियां


जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. जीएल अहिरवार के अनुसार सब्जियों को केमिकल से चमकाने से यह शरीर में एकत्र होकर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं। कई बार, इन सब्जियों के सेवन से एलर्जिक रिएक्शन, हार्ट डिजीज, लिवर और किडनी फेल होने का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही, पेट की बीमारियां, बीपी, गैस, कैंसर, और फूड प्वाइजनिंग जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए, विशेष रूप से आकर्षक रंग और आकार वाली सब्जियों से बचना चाहिए और सामान्य रंग रूप वाली सब्जियों का सेवन करना शरीर के लिए अधिक लाभकारी है।

इन सब्जियों में हो रहा इस्तेमाल


शहर में बिक रही सब्जियों में कद्दू, लौकी, भिंडी, करेला, शिमला मिर्च, फूलगोभी, पत्तागोभी, धनियां, पालक, टिंडा, तुरई और परवल को ग्रीन केमिकल से चमकाया जाता है। बैगन में कीड़ों के छेद होने पर उसमें केमिकल मिश्रित मसाला भर दिया जाता है। इसके अलावा, लौकी के डंठल में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाने से लौकी रातों-रात लंबी हो जाती है। मेलाथियान के घोल में बासी सब्जियां डुबाकर 24 घंटे में ताजा सब्जी जैसी चमक प्राप्त की जाती है। हरे रंग का केमिकल भी इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें हरा रंग, सरसों का तेल और केमिकल मिलाकर सब्जियों को चमकाने के लिए डुबोया जाता है।

कैसे करें पहचान?


ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी राजीव सक्सेना ने बताया कि सब्जी की गंध से उसके केमिकल ट्रीटमेंट का पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा, यदि सब्जी को 12-16 घंटे तक खुले में रखा जाए तो केमिकल ट्रीटमेंट वाली सब्जी में कालापन आ जाता है। ज्यादा हरी सब्जियों को पानी से धोकर या हाथ से रगडकऱ भी इस ट्रीटमेंट का पता लगाया जा सकता है। साथ ही, केमिकल ट्रीटमेंट वाली सब्जी पकने में अधिक समय लेती है।

इनका कहना है


इस तरह के केमिकल ट्रीटमेंट का कोई आधिकारिक शिकायत अभी तक उनके पास नहीं आई है। हालांकि, अगर ऐसा हो रहा है तो उचित कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. आरपी गुप्ता, सीएमएचओ

Published on:
18 Mar 2025 10:30 am
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