छतरपुर

खजुराहो के आंगन में घुंघरूओं की गूंज के साथ 52वें अंतरराष्ट्रीय नृत्य समारोह का भावपूर्ण समापन

समापन संध्या पर पद्मश्री और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कारों से अलंकृत दिग्गज नृत्यांगनाओं ने कथक, भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी और ओडिसी के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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Feb 27, 2026
अंतरराष्ट्रीय नृत्य समारोह

पद्मश्री सुनयना हजारीलाल और प्रतिभा प्रह्लाद की प्रस्तुतियों ने अध्यात्म और सौंदर्यबोध से सराबोर किया दर्शकों को

बुंदेलखंड की ऐतिहासिक धरती पर भारतीय संस्कृति, परंपरा और शास्त्रीय कलाओं का सात दिवसीय अनूठा समागम 52वां अंतरराष्ट्रीय खजुराहो नृत्य समारोह गुरुवार की शाम को अपनी अमिट स्मृतियों के साथ संपन्न हो गया। मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग, उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस उत्सव के अंतिम दिन खजुराहो के मंदिर न केवल वास्तुकला, बल्कि नृत्य की दिव्य ऊर्जा से भी आलोकित हो उठे। समापन संध्या पर पद्मश्री और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कारों से अलंकृत दिग्गज नृत्यांगनाओं ने कथक, भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी और ओडिसी के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कथक: शिव वंदना और नायिका के आनंद की सुंदर अभिव्यक्ति

शाम का मंगलारंभ पद्मश्री सुनयना हजारीलाल (मुंबई) के कथक नृत्य से हुआ। उन्होंने अपनी प्रस्तुति का प्रारंभ शिव वंदना (राग शंकरा) से किया, जिसमें भगवान नटराज के विराट स्वरूप और गंगा के अवतरण की कथा को नृत्य में पिरोया गया। इसके पश्चात सुश्री शीतल मावलंकर, सुश्री अरुणा स्वामी और साथियों के साथ उन्होंने तीनताल में शुद्ध नृत्य प्रस्तुत किया, जिसमें आमद, ठाठ और जटिल लयकारियों का अद्भुत गुलदस्ता पेश किया। प्रस्तुति के अगले चरण में ठुमरी आज आए री (राग भिन्न षड्ज) के माध्यम से एक विरहिणी नायिका के उस असीम आनंद को दर्शाया गया, जिसे अपने पति के घर लौटने का समाचार मिलता है। समापन राग मेघ मल्हार के तराने के साथ हुआ।

सामर्थ्य: रामायण की नारी शक्ति का महासंगम

समारोह का मुख्य आकर्षण पद्मश्री प्रतिभा प्रह्लाद (बेंगलुरु) और उनके समूह द्वारा प्रस्तुत नृत्य-नाटिका सामर्थ्य रही। इसमें भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, ओडिसी, कथकली और मोहिनीअट्टम जैसी पांच नृत्य शैलियों का अद्भुत संगम दिखा। महर्षि वाल्मीकि को सूत्रधार बनाकर दिखाई गई इस नाटिका में रामायण की स्त्री पात्रों सीता, कैकेयी, शूर्पणखा, उर्मिला और मंदोदरी के निर्णयों, धैर्य और अदम्य इच्छाशक्ति को रेखांकित किया गया। प्रतिभा प्रह्लाद ने सीता (भरतनाट्यम), अलेख्या पुंजाला ने मंदोदरी (कुचिपुड़ी) और संचिता भट्टाचार्य ने कैकेयी (ओडिसी) के रूप में नारी शक्ति के विभिन्न आयामों को जीवंत किया।

कुचिपुड़ी: शिव लीला और विषपान का चित्रण

संगीत नाटक अकादमी अवार्डी सुश्री भावना रेड्डी (दिल्ली) ने कुचिपुड़ी एकल नृत्य में शिव लीला प्रस्तुत की। रागमालिका में निबद्ध इस प्रस्तुति में शिव के निराकार और साकार दोनों रूपों का वर्णन किया गया। भावना ने अपनी नृत्य भंगिमाओं से समुद्र मंथन के दौरान शिव द्वारा विषपान करने और बालक मार्कंडेय की रक्षा के प्रसंगों को इतनी जीवंतता से दर्शाया कि दर्शक शिव भक्ति के रस में डूब गए। समापन कैलाश पर्वत पर नटराज के आनंद तांडव के साथ हुआ।

जय राम: ओडिसी में श्रीराम के गुणों का बखान

उत्सव की अंतिम प्रस्तुति श्री प्रभुतोष पांडा और उनके साथियों के ओडिसी नृत्य की रही। जय राम शीर्षक की इस प्रस्तुति में ओडिशा की लोक शैलियों और शास्त्रीय नृत्य का सुंदर समन्वय दिखा। मंगलाचरण से शुरू हुई इस प्रस्तुति में भगवान राम के दिव्य गुणों का गान किया गया। राग घनकेसी में निबद्ध सीता स्वयंवर के प्रसंग ने दर्शकों को उस ऐतिहासिक क्षण की अनुभूति कराई जब राम ने शिव धनुष भंग कर माता सीता का वरण किया था। इस प्रस्तुति में ओडिशा की लुप्तप्राय रामलीला धुन और सखी नाट परंपराओं की झलक ने समापन संध्या को यादगार बना दिया।

Published on:
27 Feb 2026 10:55 am
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