छतरपुर

प्रभारी ईई के भरोसे महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट, छतरपुर में 6 महीने से अटके 7 हजार करोड़ के डीपीआर

केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखंड के लिए वरदान मानी जा रही थी, लेकिन जमीनी स्तर पर यह प्रशासनिक सुस्ती और घोर लापरवाही का शिकार हो गई है।
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Apr 09, 2026
ken betwa link office
केन बेतवा लिंक परियोजना कार्यालय छतरपुर

केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखंड के लिए वरदान मानी जा रही थी, लेकिन जमीनी स्तर पर यह प्रशासनिक सुस्ती और घोर लापरवाही का शिकार हो गई है। आलम यह है कि पिछले छह महीनों से करीब 7 हजार करोड़ रुपए की लागत वाले पांच डीपीआर फाइलों में दबे पड़े हैं। जिले में इस महत्वपूर्ण परियोजना का कार्य केवल एक प्रभारी कार्यपालन यंत्री के भरोसे चल रहा है, जिसके कारण विकास की गति पूरी तरह थम गई है।

कुर्सियां खाली, फाइलों का लगा अंबार

छतरपुर स्थित केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के कार्यालय की स्थिति बदहाल है। यहां न तो स्थाई ईई की नियुक्ति है और न ही पर्याप्त लिपिक (स्टाफ) मौजूद हैं। कार्यालय में कर्मचारियों का कहना है कि काम का दबाव तो बहुत है, लेकिन निर्णय लेने वाले अधिकारियों की कमी के कारण फाइलों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। अक्टूबर माह में परियोजना के तहत पंप हाउस निर्माण के लिए 6 महत्वपूर्ण प्रस्ताव भेजे गए थे। इनमें से जनवरी में केवल एक बड़े एलबीसी डीपीआर को मंजूरी मिल सकी, जबकि शेष 5 प्रस्ताव आज भी तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति के इंतजार में धूल फांक रहे हैं।


प्रभारी के पास दो जिलों का जिम्मा


परियोजना की कमान वर्तमान में प्रभारी ईई उमा गुप्ता के हाथों में है। विडंबना यह है कि उनके पास पन्ना जिले का भी अतिरिक्त प्रभार है। विभागीय नियमों के अनुसार, उन्हें सप्ताह में कम से कम तीन दिन छतरपुर मुख्यालय पर उपस्थित रहना चाहिए, लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि वे महीने में मुश्किल से एक या दो बार ही कार्यालय आती हैं। वरिष्ठ अधिकारियों की इस अनुपस्थिति के कारण न केवल पत्राचार प्रभावित हो रहा है, बल्कि महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर समय पर फॉलो-अप भी नहीं लिया जा पा रहा है।

पंप हाउस से खेतों तक पहुंचना है पानी

इस योजना का मुख्य उद्देश्य पाइप लाइन के जरिए पानी को सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाना है ताकि बर्बादी रोकी जा सके। छतरपुर और टीकमगढ़ जिले में कुल 7 पंप हाउस स्थापित होने हैं। इन पंप हाउसों के माध्यम से बुंदेलखंड के 10 लाख 52 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचित करने का लक्ष्य है। अकेले छतरपुर जिले की 3 लाख 46 हजार हेक्टेयर भूमि इस योजना से लाभान्वित होगी। लेकिन डीपीआर अटकने से पाइप लाइन बिछाने और पंप हाउस निर्माण का कार्य अधर में लटका हुआ है।


परियोजना पर एक नजर


कुल लागत- 44605 करोड़

बिजली उत्पादन- 103 मेगावाट जल विद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा
प्रभावित जिले- पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, सागर, शिवपुरी, दतिया, विदिशा और रायसेन।

कलेक्टर ने लिया संज्ञान

मामले की गंभीरता को देखते हुए छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि ईई के मुख्यालय में अनुपस्थित रहने के कारणों की जांच की जाएगी और उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। यह सरकार का एक अत्यंत महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है और इसकी प्रगति में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हम सुनिश्चित करेंगे कि कार्य समय सीमा के भीतर पूरा हो।


Updated on:
09 Apr 2026 11:00 am
Published on:
09 Apr 2026 11:00 am