जिला अस्पताल परिसर में 51 सालों तक संचालित रहा एएनएम ट्रेनिंग सेंटर वर्ष 2015 के बाद से बंद है। आठ साल से बंद पड़ा एएनएम ट्रेनिंग सेंटर अगस्त से शुरु किया जाना था, लेकिन अब तक शुरू नहीं हो सका है।
छतरपुर. जिला अस्पताल परिसर में 51 सालों तक संचालित रहा एएनएम ट्रेनिंग सेंटर वर्ष 2015 के बाद से बंद है। आठ साल से बंद पड़ा एएनएम ट्रेनिंग सेंटर अगस्त से शुरु किया जाना था, लेकिन अब तक शुरू नहीं हो सका है। जबकि इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने मई माह में इसकी तैयारियां शुरू कर दी थी। बिल्डिंग की मरम्मत का काम हो गया है। लेकिन नए सत्र के एडमिशन की प्रक्रिया और पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है। क्योंकि अब शासन ने पहले से चल रहे एएनएम सेंटर में प्रवेश लेने का निर्णय लिया है। उन सेंटरों की सीट भरने के बाद छतरपुर के सेंटर को शुरु किया जाएगा। ऐसे में इस सत्र में एएनएम सेंटर शुरू होने की उम्मीद नहीं है।
एएनएम सेंटर शुरू करने के लिए भवन, स्टाफ, फेसिलिटी जुटाई जाना है। लेकिन इस दिशा में काम पूरा नहीं हो पाया है। शासन ने इसके लिए फंड भी नहीं दिया है। जिससे छात्राओं के ठहरने, मैस सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में एडमिशन देने पर पढ़ाई कैसे होगी, इसलिए फिलहाल इस सत्र में अभी तक छतरपुर एएनएम सेंटर में प्रवेश प्रक्रिया भी नही की गई है। भवन की मरम्मत के साथ ही फर्नीचर की आवश्यकता भी है, इसका भी इंतजाम नहीं हो सका है। संसाधनों के लिए होने वाले खर्च को देखते हुए शासन ने फिलहाल सेंटर की शुरूआत रोक दी है।
मिशन संचालक ने 10 साल पहले इस केंद्र को बंद कर झाबुआ स्थानांतरित करने का आदेश जारी किया था। मप्र शासन ने 1964 में इस प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत की थी। मिशन संचालक ने केंद्र को बंद करने का आदेश 16 अक्टूबर 2015 को दिया था। साथ ही सेंटर का सामान झाबुआ भेजने के लिए 40 हजार रुपए की राशि जारी की थी। लोगों ने इसका विरोध किया तो दबाव में आकर सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सेंटर को झाबुआ भेजने का आदेश निरस्त कर दिया, लेकिन तभी से एडमिशन बंद हैं।
अभी भी तीन से अधिक कर्मचारी पदस्थ हैं। हालांकि पहले 6 ट्रेनर थे, जिसमें से कुछ रिटायर हो चुके हैं तो कुछ इधर-उधर हो गए। तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. वीएस वाजपेयी ने विभाग को एएनएम सेंटर में जीएनएम और बीएससी नर्सिंग का कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव भी भेजा था, लेकिन वह भी ठंडे बस्ते में चला गया।
छात्राओं को मिलेगी राहत 51 सालों तक संचालित इस केंद्र में जिलेभर की लगभग 70 छात्राएं हर साल प्रशिक्षण लेती थीं। इसमें छतरपुर के अलावा पन्ना, टीकमगढ़ और दमोह की छात्राएं के भी एडमिशन होते थे। छात्राओं का कम खर्चे पर आसानी से कोर्स हो जाता था, लेकिन सेंटर बंद होने से छात्राओं को मोटी फीस देकर निजी सेंटरों में एडमिशन कराना पड़ रहा है। अब सेंटर शुरू होने से छात्राओं को काफी हद तक राहत मिलेगी।
प्रदेश में जो फंक्शनल एएनएम ट्रेनिंग सेंटर हैं। उनमें एडमिशन लिए जा रहे हैं। उनकी सीटें भरने पर छतरपुर के सेंटर को एक्टिवेट किया जाएगा। संसाधान जुटाए जाएंगे।
डॉ. आरपी गुप्ता, सीएमएचओ