पत्रिका अभियान...ताकि सुरक्षित रहे जिंदगी, हरिओम गौशाला में घायल गौ-वंश का होता है इलाज
धर्मेन्द्र सिंह. छतरपुर। शहर से लगी चरनोई भूमि भूमाफियाओं ने बेच दी या कब्जा कर लिया,एक-एक करके गौशालाएं बंद हो रही हैं,कांजी हाउस पहले ही बंद हो गए,इन्हीं कारणों से गौ-वंश सड़कों पर आ गए हैं। गौ-वंश की सुरक्षा और संवर्धन के लिए जरूरी चरनोई जमीन को कई वर्षो से चल रही साजिश के तहत खत्म कर दिया गया। पन्ना रोड पर 270 एकड़ चरनोई चमीन, सागर रोड पर 15 एकड़ और शहर से लगे सौंरा,गठेवरा,हमा,बगौता,नारायणपुर गांव में गौ-वंश के लिए जमीन ही नहीं बची है, सभी जगह कॉलोनियां बन गई हैं, या प्लॉटिंग चल रही है। रोज ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाएं हो रही हैं। लोग अनजान दहशत के बीच शहर की सड़कों से गुजरते हैं,कि कहीं किसी गौ-वंश से टकरा न जाए,कहीं सड़क पर गौ-वंश की लड़ाई के बीच दुर्घटना का शिकार न हो जाएं। लोगों में दहशत और गौ-वंश की ऐसी दुर्दशा के पीछे कुछ लोगों के निजी स्वार्थ और लालच मुख्य वजह हैं। कुछ लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए गौ-वंश के ठिकाने खत्म कर दिए,उनके चारा-पानी का इंतजाम नष्ट कर दिया। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं,जो निस्वार्थ भाव से गौसेवा कर रहे हैं। सेवा का ये सिलसिला पिछले 10 वर्षो से चल रहा है,गुमनाम रहकर शहर के करीब 70 लोग गौ-वंश के इलाज, चारा-पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। अपनी कमाई का कुछ हिस्सा चुपचाप गौवंश की सेवा में लगा रहे हैं। ये युवा एक उदाहरण पेश कर रहे हैं, कि सही मायने में सेवा क्या होती है।
गुमनाम रहकर कर ऐसे कर रहे सेवा :
शहर के युवाओं के चार ग्रुप हैं,जो बिना किसी प्रचार प्रसार के गौ-सेवा का काम कर रहे हैं। किसी सरकारी अनुदान से इनका कोई नाता भी नहीं है,न ही ये किसी से मदद मांगने जाते हैं। हर गुप्र से 10 से 12 युवा जुड़े हैं। कालीमाता गउ सेवा समिति,हरिओम गौशाला,बरसाना दरबार और सिद्धेश्वर गौ सेवा समिति के युवा शहर की सड़कों पर मारे-मारे घूम रहे गौ-वंश के लिए छाया की व्यवस्था,चारा-पानी की व्यवस्था और इलाज तक की व्यवस्था कर रहे हैं। ये सभी ग्रुप गौ-वंश के चारा पानी की व्यवस्था करने का काम करते हैं, इसके साथ ही कालीमाता गउ सेवा समिति गौ-वंश के लिए छाया की व्यवस्था करने के लिए शहर में कई जगह टीन शेड लगाने का काम पिछले 6 वर्ष से कर रही है। हरिओम गौशाला घायल,बीमार गौ-वंश का इलाज करने का काम पिछले 10 वर्षो से कर रही है। 2009 में शुरु हुई हरिओम गौशाला में दुर्घटना में घायल 185 गौ-वंश हैं,जिनमें से 55 गंभीर और बाकी सभी शरीर से या तो लाचार हैं, या इलाजरत हैं। गौशाला बरसाना दरबार और सिद्धेश्वर गौ सेवा समिति रोजाना शहर के 15 स्थान पर चारा-पानी का इंतजाम रोज करती है। चार पहिया वाहन और स्कूटी जैसे वाहनों से युवाओं की टीम सर्दी,गर्मी और बारिश के मौसम में रोजाना चारा पहुंचाने का काम पिछले 10 वर्ष से कर रही है। ये युवा कालीमाता मंदिर, बघराजन मंदिर, सौरा मंदिर, सीताराम कॉलोनी, चेतगिरी कॉलोनी, सागर रोड पर 4 सीजन होटल के पास, डीआइजी बंगले के पास, पन्ना रोड पर रेलवे स्टेशन के पास गौ-वंश के चारा-पानी की व्यवस्था रोज करते हैं।
पुलिस ने भी की सराहनीय पहल :
शहर की सड़कों पर गौ-वंश की मौजूदगी के कारण रोजाना 5 दुर्घटनाएं होती है। बारिश के मौैसम में रोजाना 15 दुर्घटनाएं तक होती है,जिनमें कम से कम 5 गौ-वंश की रोजाना जान चली जाती है। आमदिनों में भी दुर्घटना में कम से कम 2 से 3 गाय मारी जाती है,रोजाना इतनी ही गाय गंभीर रुप से घायल होती हैं। दुर्घटना रोकने के लिए पुलिस ने सराहनीय पहल करते हुए डेढ साल पहले गौ-ंवश के सींग में रेडियम स्ट्रिप लगाने का अभियान शुरु किया था। जो हर साल बारिश के मौसम में विशेष रुप से किया जाता है। रेडियम स्ट्रिप लगाने से सड़कों पर मौजूद गौ-वंश शाम की कम रोशनी और अंधेर में भी नजर आ जाते हैं,जिससे दुर्घटना बच जाती है। रेडियम स्ट्रिप लगाने की ये पहल पुलिस अधीक्षक विनीत खन्ना ने छतरपुर आते ही शुरु की थी।
ये कहना है गौ सेवकों का
गौ-सेवा में परम सुख है
शहर में कहीं भी गौ-वंश के घायल या बीमार होने की सूचना मिलती है,तो हम उसे गौशाला ले आते हैं,इलाज करते हैं,उनके चारा-पानी की व्यवस्था करते हैं। गौ-सेवा का ये सिलसिला 2009 में शुरु हुआ था, जबतक संभव है,सेवा करते रहेंगे।
- पारस दुबे डब्बू,हरिओम गौशाला (गौ-अस्पताल)
पिछले दस वर्ष से शहर के युवाओं के चार ग्रुप गौ सेवा का काम कर रहे हैं,सभी ग्रुप के लोग एक दूसरे से जुड़े भी हैं। लोग भी खुद ही हमें मदद की पेशकश करते हैं, बिजावर,खजुराहो,बड़ामलहरा तक से लोग गौसेवा के काम में मदद देने खुद ही आते हैं। शायद ये पहला मौका है जब किसी समाचार पत्र ने हमारे बारे में पूछा और खबर छाप रहे हैं।
- पवन असाटी, गौ सेवक व कारोबारी
सुरक्षा के लिए एक प्रयास :
सड़क दुर्घटना मेें न केवल गौ-वंश बल्कि लोग भी शिकार हो जाते हैं। हमारा प्रयास रहता है कि, दुर्घटना न हो,जिससे सभी सुरक्षित रहें। इसके लिए रेडियम स्ट्रिप लगाने का काम समय-समय पर कर लेते हैं। सबकी सुरक्षा का प्रयास किया है,हमारी ये कोशिश जारी रहेगी।
- विनीत खन्ना, पुलिस अधीक्षक