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प्रशासन के आदेशों की धज्जियां, अवैध घोषित कॉलोनियों में धड़ल्ले से हो रही रजिस्ट्री और नामांतरण, राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हुआ एसडीएम का प्रतिबंध

शहर में तहसील प्रशासन और अनुविभागीय कार्यालय के आदेशों को ठेंगा दिखाकर अवैध कॉलोनाइजर्स का कारोबार फल-फूल रहा है।

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नई तहसील

शहर में तहसील प्रशासन और अनुविभागीय कार्यालय के आदेशों को ठेंगा दिखाकर अवैध कॉलोनाइजर्स का कारोबार फल-फूल रहा है। प्रशासन द्वारा जिन कॉलोनियों को अवैध घोषित कर वहां खरीद-बिक्री पर रोक लगाई गई थी, उन जमीनों पर न केवल रजिस्ट्रार कार्यालय से रजिस्ट्रियां हो रही हैं, बल्कि पटवारियों की मिलीभगत से नामांतरण का खेल भी बदस्तूर जारी है। हैरानी की बात यह है कि एसडीएम द्वारा जारी किए गए प्रतिबंधात्मक आदेश महीनों बाद भी राजस्व रिकॉर्ड (खसरा) में दर्ज नहीं किए गए हैं।

अवैध घोषित कॉलोनियों में थम नहीं रहा कारोबार

छतरपुर जिले में बिना अनुमति और नियमों को ताक पर रखकर अवैध कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसीपी) और रेरा की अनिवार्य अनुमतियों के बिना चल रहे प्लॉटिंग प्रोजेक्ट्स पर प्रशासन ने जांच के बाद रोक लगाई थी। सबसे अधिक अवैध प्लॉटिंग शहर से सटे सरानी, चंद्रपुरा, गुरैया, पलोठा, मुवासी, बगोता, डडारी, गौरगांय, पठापुर, बरकोहा और गठेवरा जैसे गांवों में पाई गई है। प्रशासन की सख्ती के बावजूद इन क्षेत्रों में अवैध प्लॉटिंग का काम धड़ल्ले से चल रहा है।

बगोता मौजा में बड़ा खेल- एसडीएम के आदेश के बाद भी हुआ नामांतरण

अवैध कारोबार का सबसे बड़ा उदाहरण बगोता मौजा में देखने को मिला है। यहां एसडीएम कार्यालय ने प्रकरण क्रमांक 1183/बी-121/2022-23 में सुनवाई के बाद खसरा नंबर 32/1 को अवैध कॉलोनी घोषित किया था और अनुविभागीय अधिकारी को प्रबंधक दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद, इस खसरा नंबर की न केवल रजिस्ट्री हुई, बल्कि पटवारी की रिपोर्ट पर तहसीलदार ने नामांतरण आदेश भी जारी कर दिया।

खसरा नंबर 51/7 और 51/6 में भी अनियमितता

नगर पालिका के वार्ड-36 (बगोता मौजा) के तहत खसरा नंबर 51/7 और 51/6 में भी अवैध कॉलोनी विकसित की गई है। एसडीएम ने इस संबंध में आदेश जारी किया था, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड के कॉलम नंबर 12 में इस प्रतिबंध को दर्ज नहीं किया गया। नतीजा यह है कि इन नंबरों पर आज भी धड़ल्ले से रजिस्ट्री और नामांतरण किए जा रहे हैं। मामले की शिकायत के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।

क्या है नियम और कहां हुई चूक?

नियम के अनुसार, जब किसी कॉलोनी को अवैध घोषित किया जाता है, तो सक्षम अधिकारी के जांच आदेश के बाद खसरा के कॉलम नंबर 12 में विक्रय से प्रतिबंध और प्रबंधक के रूप में कलेक्टर या एसडीएम का नाम दर्ज किया जाना चाहिए। एक बार रिकॉर्ड में दर्ज होने के बाद रजिस्ट्री और नामांतरण दोनों स्वत: प्रतिबंधित हो जाते हैं। छतरपुर में इसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को राजस्व रिकॉर्ड में अपडेट नहीं किया गया, जिसका फायदा भू-माफिया उठा रहे हैं।

एसडीएम का पक्ष- तहसीलदार और उप पंजीयक से करेंगे बात

इस पूरे मामले पर छतरपुर एसडीएम प्रशांत अग्रवाल का कहना है कि शहर में अवैध घोषित हुई कॉलोनियों में प्लांट विक्रय के बाद नामांतरण का मामला अब तक उनके सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा है तो वे संबंधित तहसीलदार और उप पंजीयक से बात करेंगे ताकि आगामी दिनों में रजिस्ट्री होने के बाद नामांतरण न हो सके।