छिंदवाड़ा

अम्मा अस्पताल को सीएमएचओ ने बंद करने के दिए आदेश, बिना आईसीयू, मेडिकल स्पेशलिस्ट के हुआ गर्भवती का उपचार

गर्भवती महिला के उपचार में लापरवाही की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग की दो सदस्यीय जांच दल ने की जांच, नए मरीजों की भर्ती पर रोक तथा भर्ती मरीजों को अन्य हॉस्पिटल में शिफ्ट करने के आदेश
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chhindwara
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छिंदवाड़ा. शहर के अम्मा अस्पताल को बंद करने के आदेश स्वास्थ्य विभाग ने दिए है, गर्भवती महिला के उपचार में लापरवाही बरतने की शिकायत पर जांच में लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की गई। नए मरीजों की भर्ती पर रोक तथा भर्ती मरीजों को अन्य हॉस्पिटल में शिफ्ट करने के भी सीएमएचओ ने आदेश दिए है। महिला को डिलेवरी के लिए शहर के खजरी मार्ग स्थित मर्सी हॉस्पिटल (अम्मा अस्पताल) में भर्ती कराया गया जहां पर डिलेवरी के दौरान जमकर लापरवाही बरती गई थी। जिसकी शिकायत महिला के पति ने सीएम हेल्पलाइन तथा विभाग को की थी। इस शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने दो सदस्यीय जांच दल ने जांच की तथा रिपोर्ट सीएमएचओ को सौंपी थी। जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद सीएमएचओ डॉ नरेश गोन्नाड़े ने लिखित आदेश जारी किया है।

विशाल शर्मा ने की थी शिकायत

मर्सी हॉस्पिटल के खिलाफ विशाल शर्मा ने सीएम हेल्प लाइन तथा ई-मेल के माध्यम से सीएमएचओ कार्यालय में शिकायत की थी। जो कि मरीज साक्षी शर्मा के उपचार में लापरवाही बरतने के संबंध में थी। शिकायत के बाद सीएमएचओ डॉ नरेश गोन्नाड़े ने दो सदस्यीय जांच दल गठित किया था जिसमें डॉ धीरज दवंडे जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अधिकारी एवं डॉ श्वेता पाठक स्त्री रोग विशेषज्ञ शामिल थे।

ना आईसीयू ना इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर, मेडिकल स्पेशलिस्ट की कमी

दो सदस्यीय जांच दल ने जांच की तथा अपना प्रतिवेदन सीएमएचओ को सौंपा था, जिसमें पाया गया कि मृतिका साक्षी शर्मा (25) गर्भावस्था में थी तथा आठ दिसंबर 2025 से एंटी हाईपरटेंशन की दवा ले रही थी। अल्ट्रासोनोग्राफी आठ दिसंबर 2025 की रिपोर्ट में पॉली हाईड्रोमिनीयास पाया गया, 15 दिसंबर 2025 को बीपी, फिटल मूवमेंट में कमी एवं लिकिंग थी जिससे वह हाई रिस्क में थी। 17 दिसंबर 2025 समय 12.30 बजे को फिटलडिस्ट्रेस एवं हाई बीपी था। उपरोक्त परिस्थितियों में इमरजेंसी पर 17 दिसंबर 2025 को रात्रि 8.30 को ओटी में शिफ्ट कर 9.10 रात को सीजेरियन ऑपरेशन किया गया जिसमें जीवित बच्चे की डिलेवरी हुई। सीजर ऑपरेशन के 03 घंटे बाद स्त्रीरोग विशेषज्ञ ने फालोअप जांच की तथा दो यूनिट ब्लड, ब्लड इंफ्यूजन की सलाह दी।

जांच में यह लापरवाही सामने आई कि मरीज के लगातार चिकित्सीय देखभाल के लिए कोई भी आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी नहीं था। नर्सिंग स्टॉफ ही मरीज को देखा एवं मरीज की जांच की जा रही थी एवं सुबह 5.15 बजे एनेस्थिसिया डॉ कान्हा अग्रवाल ने पेशेंट का मेडिकल ट्रीटमेंट एवं मैनेजमेंट किया गया तथा मरीज को हायर सेंटर हेतु रेफर किया। मेडिकल स्पेशलिस्ट की कमी के साथ ही हॉस्पिटल में आईसीयू भी नहीं था।

Updated on:
05 Apr 2026 05:16 pm
Published on:
05 Apr 2026 05:16 pm