
छिंदवाड़ा/नागपुर. ऑरेंजसिटी के लोग आवारा कुत्तों से परेशान हैं, इनकी नसबंदी की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक एबीसी सेंटर नहीं बनाए गए हैं। वहीं दूसरी ओर एक ‘कुत्ते’ के साथ कैप्टन विराट अभ्यास के दौरान सुबह के वक्त मस्ती करते नजर आए, उनकी तस्वीरें वायरल हुई है। दरअसल जिस ‘कुत्ते’ के साथ विराट कोहली ने मस्ती की वह सिक्योरिटी डॉग है। उससे कोहली हाथ मिलाते और उनसे बालों में हाथ भी फेरते दिखे। इससे पहले भी कोहली का कुत्तों के प्रति प्यार जग जाहिर है। विराट ने कुछ रोज पहले 15 नेत्रहीन कुत्तों को गोद लिया था, जिसकी जानकारी खुद बेंगलूरु स्थित चार्लीज एनिमल रेस्क्यू सेंटर ने दी थी।
जानकारी के अनुसार नागपुर शहर में आवारा कुत्तों की जनसंख्या को नियंत्रित रखने के लिए नागपुर महानगर पालिका की ओर से कुत्तों की नसबंदी की मुहीम शुरू की जा रही है। हालांकि इससे कुछ वर्ष पहले भी यह मुहीम शुरू की गई थी, लेकिन वह अभियान पूरी तरह से सफल नहीं हो पाया था। पिछले बार कई जगहों पर यह भी देखने में आया था कि कुत्तों की नसबंदी करने के तुरंत बाद उन्हें छोड़ दिया गया था। जबकि नियम यह है कि नसबंदी होने के बाद उसे करीब 3 दिनों तक उसकी देखभाल करनी होती है। कुछ दिन पहले द पीपल फॉर एनिमल्स संस्था की ओर से प्राणियों के साथ होने वाली क्रूरता और मनपा द्वारा कुत्तों की नसबंदी को लेकर प्रदर्शन किया गया था।
साढ़े तीन करोड़ रुपए होंगे खर्च
कुत्तों की नसबंदी को लेकर मानद पशु कल्याण अधिकारी करिश्मा गलानी ने बताया कि 50 हजार कुत्तों की नसबंदी के लिए करीब साढ़े तीन करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं, लेकिन नसबंदी करने के लिए सेंटर ही नहीं बनाए गए हैं। वर्ष 2013 में एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) की ट्रेनिंग के लिए भी 14 लोग ऊटी गए थे, जिसमें मनपा के पशु अधिकारी डॉ. महल्ले भी थे, लेकिन 4 साल बाद नागपुर महानगर पालिका को नसबंदी की याद आई है। निधि मिले हुए भी 6 से 7 महीने हो चुके हैं। बावजूद इसके अब तक नसबंदी शुरू नहीं हो पाई है। नागपुर महानगर पालिका के स्वास्थ विभाग ने अभी निविदा जारी की थी, जिसमें एक कुत्ते की नसबंदी के लिए 700 रुपए दिए जाने के साथ ही इसके ऐसी शर्त भी रखी कि संस्थाओं को नसबंदी के साथ जख्मीं कुत्तों का इलाज भी कराना होगा। गलानी ने कहा की यह शर्त हटनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी शहर में एक ही एनिमल शेल्टर है। जिसका महीने का खर्च 60 हजार रुपए है। शेल्टर में ही एबीसी सेंटर खोलने से दूसरे कुत्तों की गिनती भी एबीसी में होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि 50 हजार कुत्तों की नसबंदी के लिए कम से कम 4 सेंटर शुरू करने होंगे। इस बारे में मनपा के पशु चिकित्सक गजेंद्र महल्ले ने बताया कि अभी टेंडर प्रक्रिया शुरू है। अभी दो संस्थाओं को नागपुर गिट्टीखदान स्थित एसपीसीए और सातारा की एक संस्था है जिन्हें कुत्तों की नसबंदी का काम दिया जा रहा है। करीब 50 हजार कुत्तों के लिए 3 करोड़ 50 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। डेढ़ साल में यह नसबंदी करनी है। इस पूरी मुहीम में ज्यादा से ज्यादा एनजीओ को शामिल करने की भी योजना चल रही है। महल्ले ने कहा कि शहर में एबीसी के लिए करीब चार सेंटर शुरू करने होंगे। संस्थाओं से एग्रीमेंट होने के बाद संस्थाओं के साथ मीटिंग और प्लानिंग करेंगे और उसके बाद नसबंदी की शुरुआत की जाएगी।