छिंदवाड़ा

छिंदवाड़ा…स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में दर्ज हैं ये तारीख, जब निकले थे आजादी के दीवाने

आजादी के अमृत महोत्सव के साल में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को नमन कर रहा छिंदवाड़ा

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tiranga
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छिंदवाड़ा.आजादी के अमृत महोत्सव के साल में जब पूरा देश महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के अमिट योगदान को याद कर रहा है तो छिंदवाड़ा भी इतिहास की तारीखों में दर्ज अपनी भागीदारी पर गर्व कर रहा है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिले के आजादी के दीवानों को नमन है, जिन्होंने अपने आसाधारण साहस से अंग्रेजी हुकूमत का मुकाबला किया और आजादी की राह प्रशस्त की।
देश की स्वतंत्रता के 75 साल बाद देखा जाए तो स्वतंत्रता संग्राम के साक्षी लोग मुश्किल से गिनती लायक मिलेंगे। इस समय उनकी आयु 90 साल से अधिक होगी। कुछ माह पहले निर्वाचन आयोग ने सौ वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं की खोज में छिंदवाड़ा जिले में 108 शतायु पार बुजर्गो के जीवित होने की जानकारी दी थी। इनमें से अधिकांश समय काल के हिसाब से सुनने-कहने के लायक नहीं रह गए हैं। उनके परिजनों से ही स्वतंत्रता संग्राम की कहानियां सुनी जा सकती है। बस इतिहास की पुस्तकों में आजादी की लड़ाई में छिंदवाड़ा के योगदान का जिक्र मिलता है। इनमें कहीं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू एवं अन्य राष्ट्रीय नायकों के आगमन का उल्लेख है। बताते हैं कि गांधी जी के आह्वान पर हजारों आजादी के दीवाने घर छोड़कर तिरंगा थामे सड़क पर निकल पड़े थे। आदिवासी नेता बादलभोई के नेतृत्व में आदिवासियों के संघर्ष की जानकारी मिलती है। इसके साथ ही सैकड़ों आजादी के दीवाने के नाम दर्ज है। जिन्हें समय के साथ भुला दिया गया है। जिलेवासियों को अपनी नई पीढ़ी को इस योगदान को याद कराना होगा। तभी उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में योगदान की प्रमुख तारीखें
1.स्वतंत्रता आन्दोलन का जनजागरण राष्ट्र जागृति आन्दोलन के नेता डॉ.बी.एस.गुंज एवं दादा साहेब खापरे के 11 मई 1906 मे आगमन से हुआ।
2. महात्मा गांधी छिन्दवाड़ा पहली बार 6 जनवरी 1921 एवं दूसरी बार 29 नवम्बर 1933 में आए। उन्होंने सभाएं ली।
3.1923 में आदिवासी नेता बादल भोई द्वारा तहसील तामिया में कांग्रेस की एक सभा आयोजित की गई जिसमें उनके नेतृत्व में हजारों आदिवासियों ने भाग लिया। उसके बाद आदिवासियों ने छिन्दवाड़ा के जिलाधीश के निवास का घेराव किया था ।
4. डॉ.सरोजिनी नायडू 18 अप्रैल 1922 तथा पण्डित जवाहरलाल नेहरू
31 दिसंबर 1936 को छिन्दवाड़ा आए।
5.1942 में महात्मा गांधीजी के अंग्रेजों भारत छोड़ो आन्दोलन में नगर के अधिवक्ता एवं गणमान्य नागरिक सम्मिलित हुए। ं मुख्य रुप से अर्जुनसिंह सिसोदिया, आरके हलदुलकर, गोविन्दराम त्रिवेदी, देवमन वानखेड़े, ी साल्पेकर आदि नेता गिरफ्तार हुए।
6.इतिहास में यह भी उल्लेख है कि 1857-58 में प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के वीर सेनानी तात्या टोपे छिन्दवाड़ा आए थे । छिन्दवाड़ा जिले की हर्राकोट एवं रावखेड़ी के जागीरदार महावीर सिंह ने तात्याटोपे को न केवल शरण दी बल्कि सैन्य संग्रह में भी योगदान किया था।
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इन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका
छिन्दवाड़ा में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान स्व.विश्वनाथ साल्पेकर, स्व. कृष्णा स्वामी नायक, स्व. बैरिस्टर गुलाब चंद चौधरी, स्व. के.जी.रेखाड़े, स्व . अर्जुनसिंह सिसौदिया, अ.मजीद खान, स्व.गोविंदराम त्रिवेदी आदि के नेतृत्व में अनेक आंदोलन हुए । इनमें भारत छोड़ो आंदोलन, असहयोग आंदोलन, शराब बंदी आंदोलन, जंगल सत्याग्रह, झण्डा सत्याग्रह प्रमुख हैं ।
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Updated on:
14 Aug 2023 08:52 pm
Published on:
15 Aug 2023 05:03 pm