
छिंदवाड़ा. रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित विषय समूह को लेकर आ रही परेशानी को सुलझाने सोमवार को जिले के निजी कॉलेज संचालक उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक से मुलाकात करने जबलपुर जाएंगे। गौरतलब है कि कुछ शासकीय एवं अशासकीय कॉलेजों ने सागर विवि से निर्धारित विषय समूह पर ही विद्यार्थियों को प्रवेश दे दिया था। विद्यार्थियों ने इसके आधार पर तीन माह पढ़ाई भी कर ली है। इसके पीछे कॉलेजों का तर्क है कि बीते वर्ष रादुविवि ने सागर विवि से निर्धारित विषय समूह को मान्य करते हुए परीक्षा आयोजित कराई थी। निजी कॉलेज संचालकों का कहना है कि विषय समूह को लेकर विश्वविद्यालय ने प्रवेश के समय कोई निर्देश नहीं दिए। अब बीच सत्र में विद्यार्थियों के नामांकन के समय विश्वविद्यालय विषय समूह जारी कर अड़चन पैदा कर रही है। रविवार को निजी कॉलेजों ने अतिरिक्त संचालक से फोन पर बात की। अतिरिक्त संचालक ने सभी को जबलपुर बुलाया है। उनका कहना है कि सभी लोग विवि कुलपति से मिलकर समस्या का निवारण कराने का प्रयास करेंगे।
नामांकन की आखिरी तिथि कल
कुलपति पहले ही कॉलेजों को स्पष्ट कर चुके हैं कि वे निर्धारित विषय समूह में ही विद्यार्थियों के नामांकन कराएं। विद्यार्थियों को भी विश्वविद्यालय के तरफ से एसएमएस भेजे जा चुके हैं। इधर 20 नवम्बर नामांकन की आखिरी तिथि विवि द्वारा घोषित की गई है। अगर विवि कुलपति सोमवार को कॉलेज संचालकों की बात नहीं मानें तो फिर विद्यार्थियों को विषय ग्रुप में फेरबदल कर नामांकन करना होगा।
यूजीसी की राशि समय-सीमा में व्यय नहीं कर पाए कॉलेज
यूजीसी द्वारा कॉलेजों में विशेष कक्षाओं के संचालन के लिए जारी की गई राशि को समय-सीमा में व्यय न करने पर उच्च शिक्षा विभाग अवर सचिव ने नाराजगी जताई है। इस सम्बंध में अवर सचिव वीरन सिंह भलावी ने प्राचार्यों से कहा है कि विभाग की ऑडिट रिपोर्ट 2012-13 के माध्यम से शासन के ध्यान में यह तथ्य सामने आया है कि एससी, एसटी, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों को सक्षम बनाने एवं कुशलता से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए ११वीं योजना में नियमित समय-सारिणी के बाहर कॉलेजों में विशेष कक्षाएं आयोजित करने के लिए यूजीसी द्वारा राशि आवंटित की गई थी। जिले समेत प्रदेश के कॉलेजों में किए गए जांच में पाया गया कि कुछ कॉलेजों ने पूर्ण प्रावधान राशि का उपयोग नहीं किया है। ऐसे में शासन के उद्देश्य की पूर्ति नहीं हुई एवं राशि वापस की गई। अवर सचिव ने इस पर चिंता जताते हुए प्राचार्यों से कहा है कि यूजीसी से प्राप्त राशि का उपयोग समय-सीमा में किया जाना सुनिश्चित किया जाए। इस सम्बंध में प्रत्येक प्राचार्य राशि के उपयोगिता प्रमाण-पत्र आयुक्त को वित्तीय वर्ष के अंत तक अनिवार्य उपलब्ध कराएंगे। भविष्य में यदि इस कार्य में लापरवाही होती है तो प्राचार्यों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।