विधानसभा में सरकार का ध्यान आकर्षित करा चुके हैं विधायक वर्ष 2008 में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी घोषणा
छिंदवाड़ा जिले के दक्षिणी हिस्से को तोडकऱ पांढुर्ना जिला बनाया जा चुका है, तो वहीं इस समय जुन्नारदेव व परासिया ब्लॉक को जिला बनाने की मांग की जा रही है। इसे देखते हुए छिंदवाड़ा को संभाग बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। सांसद बंटी साहू मुख्यमंत्री के समक्ष इस मुद्दे को लगातार उठाएं तो यह सौगात छिंदवाड़ा जिले को मिल सकती है।
पिछले दो सप्ताह से जुन्नारदेव कन्हान मंच के पत्र पर राज्य शासन ने जुन्नारदेव तहसील को जिला बनाने कलेक्टर छिंदवाड़ा से अभिमत मांगा है। ये प्रक्रिया कुछ आगे बढ़ती, इससे पहले ही परासिया के रहवासियों ने भी एक मंच का गठन किया और परासिया को जिला बनाने की मांग की। इस मुद्दे पर परासिया विधायक सोहन बाल्मीक भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिल चुके हैं। इनमें से कौन सा जिला बनेगा और कौन किसका हिस्सा होगा, ये तो भविष्य ही तय करेगा। फिलहाल जिला स्तर पर एक और मांग पर सुगबुगाहट सुनी जा रही है। यह मांग 16 साल पुरानी छिंदवाड़ा सम्भाग की है। यदि जुन्नारदेव या परासिया में से कोई एक जिला बनता है, तो छिंदवाड़ा को सम्भाग बनाया जा सकता है।
छिंदवाड़ा को संभाग बनाने की मांग से संबंधित सवाल परासिया विधायक सोहन बाल्मीक व जुन्नारदेव के सुनील उइके की ओर से लगाए गए। सरकार से इसका जवाब भी मांगा गया। हर बार उत्तर नहीं में आया। फिर भी विधायकों के प्रयास जारी रहे। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वर्ष 2008 में शहर में सभा ली थी। इस सभा में उन्होंने छिंदवाड़ा को सम्भाग का दर्जा दिए जाने की घोषणा की थी। इसके बाद जब वे सिवनी-बालाघाट गए, तब वहां के रहवासियों ने इसका विरोध किया। शासन के इस प्रस्ताव पर असहमति जाहिर की। इसके चलते छिंदवाड़ा 16 साल बाद भी सम्भाग नहीं बना। यदि उस समय विरोध के स्वर नहीं उठते तो छिंदवाड़ा में संभाग कमिश्नर की कुर्सी आ गई होती।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष विश्वनाथ ओक्टे का कहना है कि वर्ष 2019 में कमलनाथ मुख्यमंत्री बने थे, तब छिंदवाड़ा को सम्भाग बनाने के प्रयास हुए थे। सरकार गिर जाने के बाद फिर कोई ऐसे प्रयास नहीं कर पाया। ओक्टे ने कहा कि छिंदवाड़ा में सम्भाग ऐसा बने, जिसका सर्वसुविधायुक्त भवन, प्रशासनिक दक्षता के लिए आसपास के जिले सिवनी, बालाघाट, बैतूल, नरसिंपुर और छिंदवाड़ा सम्मिलित किए जाए। इससे यह गरिमामय दर्जा पा सकेगा।