
छिंदवाड़ा। जिन पर कभी बिजली आपूर्ति का पूरा दारोमदार रहता था, जिनके बिना इस सुविधा की कल्पना भी नहीं की जा सकती, बिजली व्यवस्था की लाइफलाइन कहे जाने वाले लाइनमैनों का अस्तित्व आगामी कुछ वर्षों में समाप्त हो जाएगा। यह स्थिति सिर्फ छिंदवाड़ा शहर सम्भाग का नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की ही है। इन लाइनमैन की जगह आउटसोर्स के कर्मचारी काम करेंगे।
छिंदवाड़ा शहर सम्भाग में पिछले दो वर्षों में 24 लाइनमैन रिटायर हो चुके हैं और आगामी कुछ वर्षों में शेष लाइनमैन भी रिटायर हो जाएंगे। शहर सम्भाग में करीब 67 हजार बिजली उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी 38 लाइनमैनों पर है।
छिंदवाड़ा शहर के लाइनमैनों की औसत उम्र 57-58 साल है, जो अब बिजली पोल में परंपरागत तरीके से नहीं चढ़ पाते। हालांकि उनके अनुभवों का लाभ बिजली कम्पनी को अभी भी मिल रहा है। शहर सम्भाग छिंदवाड़ा में फिलहाल 25 लाइनमैन अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। जबकि चंदनगांव विद्युत वितरण केंद्र में 13 लाइनमैन काम कर रहे हैं। इन पर लाइन सुधारने से लेकर बिजली बिल वसूली तक की जिम्मेदारी है।
सर्वे से लेकर कनेक्शन तक की जिम्मेदारी
भले ही लाइनमैनों के कार्य को बिजली कम्पनी कम आंक रही है, लेकिन इनका काम ही फ्रंट
लाइन पर होता है। बिजली कनेक्शन के लिए सर्वे हो या कनेक्शन जोडऩे, मीटर लगाने की जिम्मेदारी या फिर कनेक्शन काटने अथवा किसी भी फाल्ट को बनाने की जिम्मेदारी, यह समस्त काम लाइन मैन ही करते हैं।
प्रशिक्षण के बाद मिलती थी नियुक्ति
बिजली विभाग की मानें तो 1992 के बाद से लाइनमैनों की नियुक्तियां बंद कर दी गई थीं। इसके बाद जब भी जरूरत पड़ी तब आउटसोर्स के कर्मचारियों को अधिकतम साढ़े 11 हजार रुपए देकर काम चला लिया जाता है। कम्पनी के एक सब इंजीनियर ने बताया कि बिजली पोल पर चढऩे का अधिकार सिर्फ लाइनमैन को है उन्हे भी नहीं है। आउटसोर्स के लोग लाइन मैन के असिस्टेंट के रूप में काम करते हैं, लेकिन वह पूरा समय बिजली कम्पनी को नहीं देने के कारण उतने पारंगत नहीं होते जितना लाइनमैन होते हैं। शुरुआती दिनों में इन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है। समय-समय पर प्रशिक्षण शिविर भी लगाए जाते हैं।
पिछले दो वर्षों में करीब 24 लाइनमैन रिटायर हो चुके हैं। वर्तमान में सभी लाइनमैन 55 साल से अधिक उम्र के हैं, जिनके सहारे बिजली के समस्त काम हो रहे हैं।
- खुशियाल शिववंशी, कार्यपालन अभियंता, शहर सम्भाग