प्रधानमंत्री मोदी के महुआ कुकीज की सराहना से स्व-सहायता समूह की महिलाएं उत्साहित, घरेलू व्यवसाय और लघु उद्योगों से मिला संबल
ब्यूटी पार्लर से लेकर आटा चक्की हो या फिर महुआ कुकीज से लेकर मोती की खेती तक ग्रामीण महिलाएं लीडर हैं। इनके दम पर इस समय ग्रामीण अर्थव्यवस्था कुलांचे भर कर दौड़ रही है। स्व-सहायता समूहों के व्यवसाय और लघु उद्योग से महिलाओं के हाथों में अच्छी खासी आय आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाल ही में राजाखोह के एक स्व-सहायता समूह की तारीफ करने से ये महिलाएं उत्साहित हैं।
देखा जाए तो 23.76 लाख की आबादी वाले छिंदवाड़ा और पांढुर्ना जिलों में पिछले दो दशक में महिला स्व-सहायता समूहों का गठन किया गया है। इसके साथ ही इन समूहों को व्यवसाय और लघु उद्योग संचालित करने लोन भी दिया गया है। इससे ये महिलाएं आर्थिक जरूरतों के लिए क्षेत्रीय साहूकारों के चंगुल से मुक्त हो गई हैं। उन्हें स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ही लोन उपलब्ध है, जिसे पहले साहूकारों से लेना पड़ता था। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इस बदलाव से महिलाओं के साथ उनका परिवार सशक्त हुआ है।
स्व-सहायता समूह के कामकाज का अध्ययन किया जाए तो 70 फीसदी महिलाओं ने अपना कार्यक्षेत्र खेती को चुना है। इसमें करीब 38 हजार महिलाएं खाद-बीज और अनाज की बिक्री कर रही हैं। इसके साथ ही मुर्गीपालन, बकरीपालन जैसे उद्योग चला रही हैं। नवाचार के रूप में जुन्नारदेव में मोती की खेती की शुरुआत की है। शेष 30 फीसदी में महिलाएं ब्यूटी पार्लर, आटा चक्की, कपड़ा सिलाई, जनरल स्टोर समेत अन्य व्यवसाय और उद्योग कर रही है।
ग्रामीण महिलाएं मछली पालन और सब्जी उत्पादन में भी हाथ आजमा रही हैं। एक उत्पादन कंपनी की शेयर होल्डर हैं। इनकी सदस्य संख्या 10 हजार है। कृषक संगठन एफपीओ में भी 850 महिलाएं साथ मिलकर काम कर रही है। प्राकृतिक खेती के साथ ही नीमास्त्र व अन्य कीटनाशक भी बना रही है। तामिया में बटेर पालन शुरू किया गया है। तामिया में ही महिलाएं ट्रेनिंग सेंटर का संचालन कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के महुआ कुकीज की सराहना से ग्रामीण महिलाएं उत्साहित है। इससे उनके स्व-सहायता समूहों के कामकाज को संबल मिला है। करीब एक लाख से ज्यादा महिलाएं अलग-अलग कार्यक्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का संचालन कर रही है।
-रेखा अहिरवार, जिला संचालक मप्र डे ग्रामीण आजीविका मिशन