
छिंदवाड़ा. रामायण की संजीवनी बूटी की कथा को आधार बनाकर कार्य रही सामाजिक संस्था ग्रामीण आदिवासी समाज विकास संस्थान के प्रयास से जामसांवली हनुमान मंदिर में आने वाले मानसिक रोग से पीडि़त हजारों मरीज चिकित्सीय उपचार और औषधि से स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। मंदिर मानसिक रोगियों के उपचार संबंधी आस्था, विश्वास के लिए भी जाना जाता है। यहां प्रतिदिन विभिन्न राज्यों से हजारों लोग दर्शन के लिए आते हैं। इसमें कई ऐसे होते हैं जो मानसिक समस्याओं से पीडि़त होते हैं और हनुमानजी की शरण में आकर अपनी समस्या का समाधान चाहते हैं। ऐसे रोगियों को दवा एवं दुआ से ठीक करने की जिम्मेदारी सामाजिक संस्था कर रही है। संस्था को राष्ट्रपति द्वारा दिव्यांगजनों एवं मानसिक रोगियों की मानवीय सेवाओं हेतु भारत के प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रीय दिव्यांगजन सशक्तिकरण पुरस्कार 2020’ से सम्पूर्ण भारत से ‘सर्वश्रेष्ठ संस्थान’ के रूप में सम्मानित किया जा चुका है। संस्था अन्य प्रांतों में भी कार्य कर रही है। संस्था के अजय धवले ने बताया की हमारा उद्देश्य है की मानसिक रोग से पीडि़त मरीजों को पूर्ण रूप से स्वस्थ कर उन्हें जीवन की मुख्यधारा में लाना जाए।
अंध श्रद्धा की वजह से आते हैं मंदिर
ऐसी मान्यता है कि मंदिर परिसर में रोगी को रखने से रोग से मुक्ति मिल जाएगी। ऐसे में परिजन मानसिक रोगी को मंदिर में बेसहारा स्थिति में छोडकऱ चले जाते है। रोगियों को उचित उपचार न होने से वे परेशान रहते थे। इसे देखते हुए ग्रामीण आदिवासी समाज विकास संस्थान सामने आई और वर्ष 2011 में मानसिक स्वास्थ्य परामर्श केंद्र शुरू कर मंदिर परिसर में मानसिक रोग के प्रति जागरुकता का प्रचार-प्रसार के साथ कार्य शुरू किया
संजीवनी बूटी की कथा सुनाई तब मानें
संस्था द्वारा मंदिर में निशुल्क जांच शिविर का आयोजन एवं औषधि वितरण का कार्य किया जाता है। शुरू में कुछ मानसिक रोगियों के परिवारजनों ने अंधश्रद्धा के कारण मनोचिकित्सकीय उपचार लेने से मना कर दिया था। संस्था ने परिजनों को संजीवनी बूटी की कथा सुनाना शुरू किया और जिसके बाद लोग औषधि उपचार पर विश्वास करने लगे और कुछ ही दिनों में इसके सार्थक परिणाम देखने को मिलने लगा। लोग उपचार के बाद ठीक होने लगे।
पहले और तीसरे मंगलवार को लगता है शिविर
मंदिर परिसर में पहले और तीसरे मंगलवार को शिविर लगता है। चिकित्सक मानसिक समस्याओं से पीडि़त मरीजों की जांच कर निशुल्क दवाई देते हैं। यहां विगत 12 वर्षो में काफी संख्या में मानसिक रोगी स्वस्थ होकर जीवन यापन कर रहे। संस्था द्वारा मंदिर परिसर में मानसिक स्वास्थ्य परामर्श केंद्र का संचालन किया जा रहा है। यहां मानसिक रोगियों और उनके परिजनों को परामर्श के साथ चिकित्सीय उपचार किया जाता है। संस्था मंदिर परिसर के साथ क्षेत्र के 114 ग्रामों में मानसिक रोगियों पुनर्वास के लिए कार्य कर रही है।