कहा- आवक की तुलना में शेडों की कमी, मंडी परिसर में बनाए जाएं अनाज गोदाम, मंडी शुल्क में कमी, परिसर में व्यापार के लिए फायदेमंद
छिंदवाड़ा। कृषि उपज मंडी, कुसमेली में अनाज व्यापारियों का नेतृत्व कर रहे प्रतीक शुक्ला को अध्यक्ष बने तीन साल का समय बीत चुका है। 2019 में जब उन्होंने छिंदवाड़ा अनाज व्यापारी संघ के अध्यक्ष के रूप में बागडोर सम्भाली थी, तब मंडी एवं व्यापारियों की स्थिति कुछ और थी। बीच में हालात काफी खराब हुए, लेकिन वर्तमान में मंडी परिसर में कामकाज सुचारू रूप से हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि प्रतीक शुक्ला को छिंदवाड़ा अनाज व्यापारी संघ अध्यक्ष के रूप में 2019 के बाद 2020 में फिर चुना गया। इसके बाद 2021 में उनके कार्यकाल को तीन साल के लिए और बढ़ा दिया गया। उनके तीन वर्ष पूरे होने पर छिंदवाड़ा अनाज व्यापारी संघ अध्यक्ष प्रतीक शुक्ला से मंडी की व्यवस्थाओं के सम्बंध में पत्रिका ने बातचीत की। बातचीत के प्रमुख अंश-
सवाल: कैसा रहा छिंदवाड़ा अनाज व्यापारी संघ अध्यक्ष के रूप में तीन साल का समय ।
जवाब: कोरोना काल के कारण तीन साल का समय उतार चढ़ाव का रहा। व्यापारी अनुशासित है, किसान खुश। अवैध कटौतियां बंद हुई हैं। हम्माली बढ़ी है। व्यापारी संघ की आवाज पर सीसीटीवी, सुरक्षा गार्ड, शेडों का निर्माण, मंडी शुल्क में कमी तक हुई है। सबसे मजबूत हमारा व्यापारी स्ंागठन है ।
सवाल: मंडी परिसर में निर्माण कार्यों में क्या कमियां रह गई हैं ।
जवाब: निर्माण कार्य तो हुए हैं, लेकिन कमियां हैं जैसे व्यापारियों के लिए गोदाम, पेयजल की स्थाई व्यवस्था, शेडों के बीच फर्शीकरण और किसानों के लिए अतिरिक्त शेडों का निर्माण सबसे जरूरी है। आवक के अनुसार शेडों की कमी बनी रहती है।
सवाल : तीन सालों में कितने आंदोलनों का सामना हुआ।
जवाब: मंडी एवं व्यापारियों के हित में आंदोलन किए गए। ई अनुज्ञा में संशोधन के लिए आंदोलन शुरू हुआ तो लगातार सफलता मिली। उसके बाद केंद्र सरकार के टीडीएस काटने के नियम, चाईना उत्पादों का बहिष्कार, सहित कई मामलों में मंडी व्यवस्था को लेकर भी आंदोलन हुए।
सवाल: मॉडल एक्ट को लेकर आपका क्या नजरिया है।
जवाब: मॉडल एक्ट से बहुराष्ट्रीय कंपनियों को बढ़ावा मिल रहा था। मंडी परिसर से बाहर की खरीदी पर टैक्स नहीं थी, पर किसान की सुरक्षा समाप्त हो रही थी। मंडियां बंद होने की कगार में थी। बाहर खरीदी में अधिक फायदा होने के बावजूद उनके संघ ने परिसर में ही खरीदी करना अधिक उपयुक्त समझा।
सवाल: सरकारी अवकाशों के अलावा कई बार व्यापारी भी अवकाश लेते हैं।
जवाब: व्यापारी भी किसी न किसी धर्म, से जुड़े हैं उनक ी भी परंपराएं हैं। परंपराओं का निर्वहन एवं त्यौहारों को मनाने के लिए अवकाश लिए जाते हैं। जिससे किसानों, हम्मालों, कर्मचारियों के बीच खुशियां बांटने के अवसर भी मिलते हैं।
सवाल: शेडों में उपज रखी रहने से किसानों को खुले में उपज नीलाम करवानी पड़ती है।
जवाब: शेडों की कमी है, आवक बढ़ती है तो कई बार किसानों को परिसर में भी उपज डालना पड़ता है। व्यापारियों को लेबर, ट्रांसपोर्ट, ट्रक की कमी, रैक की कमी सहित कई परेशानियों से दो चार होना पड़ता है। कई बार गाडिय़ों के लिए पर्याप्त खरीदी नहीं हो पाने से मंडी में ही उपज रखनी पड़ती है।
सवाल: मंडी टैक्स कम होना चाहिए अथवा नहीं।
जवाब: मॉडल एक्ट के समय बाहर खरीदी पर टैक्स समाप्त किया गया था, इसकी जगह मंडी परिसर में ही टैक्स कम कर देना चाहिए। संघ की मांग पर गत साल तीन माह के लिए आधा प्रतिशत टैक्स भी लागू किया गया था। टैक्स कम होने से बिना टैक्स परिवहन की प्रवृति पर लगाम लगेगा।
सवाल: निर्यात कितना लाभदायक हो सकता है ।
जवाब: उपज का निर्यात होता रहता तो किसानों सहित देश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ होता। वैश्विक स्तर पर देश की स्थिति मजबूत होती। यदि बंद ही करना था तो 15 दिन पहले बंद करने की सूचना अवश्य दी जानी चाहिए।
सवाल: क्या सभी व्यापारी मिल जुलकर खरीदी करते हैं।
जवाब: नहीं। यह संभव नहीं है, पारदर्शी प्रतिस्पर्धा होती है। मांग एवं आपूर्ति का नियम लागू होता है, जिसका फायदा किसान को होता है। व्यापारी मिलजुल कर उपज का रेट कम ज्यादा नहीं करते। दिल्ली, हैदराबाद, बंगलौर आदि के भी व्यापारी प्रतिनिधि नीलामी में भाग लेते हैं।