लोग पेट भरने के लिए जंगल और सूख चुकी सुकरी नदी में भोजन की तलाश कर रहे है।
परासिया. पगारा क्षेत्र में प्रतिवर्ष रोजगार की तलाश में बडे पैमाने पर पलायन होता है। दो वक्त की रोटी के लिए गांव के गांव खाली हो जाते है। रोजगार मूलक योजनाओं के हाल बेहाल है। रोजगार की गारंटी देने वाली मनरेगा नौकरशाही का शिकार हो गई है। ग्रामीण इलाकों में रोजगार नहीं मिलने पर लोग पेट भरने के लिए जंगल और सूख चुकी सुकरी नदी में भोजन की तलाश कर रहे है। पचकौड़ी अपने परिवार के साथ शाम के लिए भोजन की व्यवस्था करने सूखी नदी में पत्थरों के नीचे केकड़ा और झींगा ढूंढ़ रहे है। सातवीं कक्षा में पढऩे वाली उनकी पुत्री सुहाना स्कूल नहीं गई है वह बताती है कि केकड़ा एवं झींगा से दो दिन के खाने का जुगाड़ हो जाएगा। पांचवीं में अध्यनरत दिनेश कहता है कि वह क्लास में हमेशा अव्वल आता है। वह भी स्कूल से गेप कर परिवार के साथ खाने के इंतजाम में लगा रहा। मां भी उनकी मदद करती है। पचकौडी ने बताया कि ग्राम पंचायत में अभी कोई काम नहीं खुला है, और मनरेगा में काम करने से फायदा नहीं हैं। हाड़तोड़ मेहनत के बाद मूल्यांकन में निर्धारित मजदूरी का आधा भी नहीं मिलता है। मजदूरी के लिए चक्कर काटने के बाद बड़ी मुश्किल से खाता में पैसा आता है। खेती किसानी का काम ठंडा पड़ा है इसलिए अभी कहीं मजदूरी नहीं मिल रही है। उसका पेशा मछली पकडऩा नहीं है, सुकरी नदी सूख गई है लेकिन पत्थरों के नीचे केकड़ा झींगा वगैरा मिल जाता है जिससे उनके दो तीन दिन के खाने का जुगाड़ हो जाता है।
बढ़ा बीमारी का खतरा
चौरई . नगरीय क्षेत्र चौरई में इन दिनों सूकर खुलेआम घने आवासीय क्षेत्रों में घूमते हुए देखी जा रही है। बदलते मौसम में सुअरों के इस तरह घनी बस्ती क्षेत्र में घूमने से बीमारियों के संक्रमण फैलने का खतरा बहुत अधिक बढ़ गया है। ऐसे हालात में नगरवासी भयभीत हैं सूकरों को नगर से हटाने के लिए नपा की ओर कार्रवाई करने के स्थान सिर्फ आश्वासन ही दिए जा रहे हैं। खानापूर्ति करने के लिए नगर पालिका द्वारा ***** पालकों को नोटिस जारी कर दिया जाता है। घूमते सूअरों से नगरवासी स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। लोगों भय इसलिए भी सता रहा है क्योंकि बिछुआ विकासखंड में स्वाइन फ्लू संदिग्ध मरीज मिल चुका है ऐसी चिंताजनक परिस्थिति निर्मित होने के बावजूद चौरई नगर पालिका के उदासीन रवैये को लेकर लोगों में जमकर आक्रोश पनप रहा है।