प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मासिक रिपोर्ट
छिंदवाड़ा. दिवाली के बाद छिंदवाड़ा की आबोहवा में कुछ सुधार आया है यानि वायु प्रदूषण कुछ हद तक कम दर्ज किया गया है। यह पिछले माह खतरनाक श्रेणी में पहुंच गया था।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मासिक रिपोर्ट में पीएम 10 में एयर क्वालिटी इंडेक्स 91.7 और पीएम 205 मानक में 53.6 पाया गया है। बोर्ड ने नवम्बर में प्रदेश के 15 शहरों का आकलन किया है, जिसमें मंडीदीप, ग्वालियर, भोपाल, सिंगरौली, इंदौर, सागर, कटनी, पीतमपुर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, शहडोल, उज्जैन, देवास और नागदा शहर शामिल हैं। इन शहरों में औद्योगिक क्षेत्र की हवा, सडक़ों पर धूल और वाहनों के धुएं का आकलन मशीनों से किया गया है। इस रीडिंग से साफ है कि इस बार दिवाली पर पटाखों से वायु प्रदूषण भी ज्यादा नहीं हुआ। इसके बाद मौसम में आई ठंडक का भी असर पड़ा है।
प्रदूषण से होती हैं ये बीमारियां
चिकित्सक मानते हैं कि बीमारियों के मूल में प्रदूषण बड़ी वजह है। एलर्जी के कारण जुकाम, खासी, अस्थमा, फेफड़ों का कैंसर जैसी बीमारियों के लिए पीएम-10 जिम्मेदार होते हैं। सिरदर्द और थकावट महसूस होना, कार्य क्षमता में कमी महसूस होना, बालों का झडऩा प्रदूषित वायु वाले वातावरण का ही असर होता है।
क्या है पीएम-10
पीएम-10 रेस्पायरेबल सस्पेंडेट पर्टिकुलेट मैटर है। यानी हवा में तैरते हुए धूल और धुएं के ऐसे कण जिनका आकार 10 माइक्रोमीटर और इससे कम आकार का होता है। हमारा श्वसन तंत्र 10 माइक्रोमीटर से अधिक आकार के धूल व कार्बन कणों को काफी हद तक फिल्टर कर लेता है पर 10 माइक्रोमीटर या इससे कम के धूल कण सीधे फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, मप्र में एक्यूआइ इंडेक्स बिगडऩे का सबसे बड़ा कारण पीएम-10 (रेस्पॉयरेबल सस्पेंडेट पर्टिकुलेट मैटर) है। हवा में पीएम-10 की बढ़ी हुई मात्रा के लिए खटारा वाहनों से निकलने वाला कार्बन कण युक्त धुआं और खराब सडक़ों के कारण बारीक कणों वाली धूल जिम्मेदार है।